करोड़पतियों की संख्या में इजाफ़ा, मोदी सरकार दे रही गरीबी को मात

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विपक्ष चाहे जितना ज़ोर लगा ले, लेकिन मोदी सरकार की सफलता जगजाहिर होने लगी है| एक तरह से देखा जाए तो पिछले 5 वर्षों में मोदी ने देश के नागरिकों के हित में कई फैसले लिए और वे कारगर भी सिद्ध हुए| नोटबंदी ने देश की जनता को थोड़ा दर्द दिया, लेकिन मोदी के अच्छे कार्यों की वजह से लोगों ने इस दर्द को सहन कर लिया| अब देश के नागरिक भी अपनी जिम्मेदारियों को समझने लगे हैं| यही वजह है कि देश में इनकम टैक्स का दायरा बढ़ाने की मोदी सरकार की कोशिश अब रंग लाने लगी है|

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में सामने आया है कि वर्ष 2014 से 2018 तक देश में धन्नासेठों यानी करोड़पतियों की संख्या में इज़ाफा हुआ है| 1 करोड़ रुपए से अधिक की आमदनी दिखाने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या पिछले 4 वर्ष में 60 फीसदी बढ़कर 1.40 लाख हो गई है| इनकम टैक्स विभाग के ताजा आंकड़ों ने यह साबित किया है| विभाग ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके अनुसार इनकम टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या 65 फीसदी बढ़कर 5.44 करोड़ हो गई है|

आंकड़ों के मुताबिक, निर्धारण वर्ष (जो 1 अप्रैल को शुरू होता है और 31 मार्च को खत्म) 2014-15 में जहां 48,416 लोगों ने एक करोड़ या उससे ज्यादा की आय घोषित की थी| वहीं वर्ष 2017 – 18 में यह संख्या बढ़कर 81,344 पहुंच गई है| यह बढ़ोतरी करीब 68 फीसदी है| यदि इसमें कंपनी और फर्मों को भी शामिल कर लिया जाए तो यह आंकड़ा 1,40,139 पर पहुंच जाएगा|

अपने कार्यकाल में मोदी ने लगातार यह कोशिश की कि इनकमटैक्स भरने वालों का दायरा बढ़े और रिटर्न भरने वालों की संख्या भी बढ़े| रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ है| वित्तीय वर्ष 2017-18 (1 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 तक) में 6.85 करोड़ रिटर्न फाइल किया गया है, जबकि 2014-15 में 3.79 करोड़ रिटर्न फाइल किया गया था यानी मोदी के कार्यकाल में 80 फीसदी का इजाफा हुआ है|

गरीबी हो रही कम

भारत में गरीबी को लेकर विपक्ष कितना भी हो हल्ला कर ले, लेकिन भारत में गरीबी को लेकर जो अंडे अब तक सामने आए हैं, उससे यही साबित होता है कि मोदी से अपने कार्यकाल में गरीबी नाम की बीमारी को खत्म करने की जो कोशिश की है, उसमें मोदीजी सफल साबित हुए हैं| अमरीकी शोध संस्था ‘ब्रूकिंग्स’ की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में हर मिनट 44 लोग गरीबी रेखा के ऊपर निकल रहे हैं| यह दुनिया में गरीबी घटने की सबसे तेज दर है|

शोध संस्था ‘ब्रूकिंग्स’ के अनुसार, देश में 2022 तक 3 फीसदी से कम लोग ही गरीबी रेखा के नीचे होंगे, वहीं 2030 तक देश में गरीबों की संख्या नहीं के बराबर रहेगी| इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत गरीबी के लिहाज से तीसरे स्थान पर है| रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दस वर्षों में दक्षिण एशिया के देशों जैसे भारत, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, फिलिपींस, चीन और पाकिस्तान में लोगों की आय तेजी से बढ़ी है| इस कारण दुनियाभर में गरीबी में कमी आई है|

-ह्रदय कुमार

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