मुद्दों से ध्यान भटकाते राजनीतिक दल

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आज के भारत को यंग इंडिया कहा जाता है, लेकिन युवाओं की आबादी बढ़ने के साथ ही देश में बेरोजगारों की लंबी फौज तैयार हो रही है। इन युवाओं में बहुत बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो अशिक्षित हैं और कई ऐसे युवा भी हैं, जो शिक्षित तो है, पर उनमें कोई स्किल नहीं है, जिस कारण उन्हें रोजगार मिल सके। देश में गरीबी व भुखमरी है। किसान कर्ज से परेशान हैं। खुदकुशी करने को विवश है। परिवहन व्यवस्था की हालत खस्ता है। सड़कों पर गड्ढे हैं। देश की राजधानी दिल्ली की हवा में इतना प्रदूषण है कि सांस लेने में कठिनाई हो रही है।

बेहिसाब आबादी, बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी, प्रदूषण आदि समस्याएं हैं और ऐसी समस्याएं ही मुद्दा होती है। इन मुद्दों पर बात होनी चाहिए। इन समस्याओं का हल निकालना चाहिए। जब चुनाव का वक्त आता है तभी नेताओं की नींद खुलती है। देश की समस्याओं पर जनता का ध्यान केंद्रित करवाते हैं और आश्वासन देते हैं कि सत्ता उनके हाथों में आते ही सारी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा। जनता किसी एक राजनीतिक दल या नेता पर विश्वास करती है और उस दल या गठबंधन को सत्ता की कुर्सी सौंप देती है।

सत्तासीन दल या गठबंधन का कर्तव्य होता है कि वह अपने वादों को पूरा करे, लेकिन जो सरकारें सत्ता में आई, उन्होंने कुछ समस्याएं दूर की तो कुछ नई बढ़ा दी। कुछ सरकारों ने समाधान कम दिए, समस्याएं ज्यादा दी या कुछ सरकारों ने ऐसी समस्याएं दे दीं, जिनके कारण समाज बंट गया। पीवी नरसिंहराव के प्रधानमंत्री काल में तत्कालीन विपक्षी दल भाजपा ने बाबरी मस्जिद ढहाकर हिंदु-मुस्लिम बंटवारे को और गहरा दिया और अब नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण का कानून बनाकर सवर्ण और दलित हिंदुओं में अविश्वास और नफरत की भावना को और भड़का दिया। भुखमरी पर कैसे काबू पाया जा सके, बेरोजगारी दूर करने की बात, चिकित्सा सुविधा, शासन-प्रशासन के कार्य में जनता की भागीदारी ऐसे ही मुद्दों पर सत्ता में आने वाला दल इन समस्याओं का जिक्र करता है। वह वादा करता है कि वह समस्याओं का समाधान करेगा। तब कोई नेता यह नहीं कहता कि मेरे सामने इतनी परेशानियां है इसलिए मैं आपकी समस्याएं हल करने में असमर्थ हूं। सत्ता में आने के बाद नेताओं के पास काम न होने के हजारों बहाने होते हैं।

कांग्रेस राज में भ्रष्टाचार और महंगाई चरम सीमा पर जा पहुंची। ऐसे में मोदी में लोगों को आशा की नई किरण दिखी। मोदी की लुभावनी बातों ने जनता का दिल जीत लिया। लोगों ने मोदी में विश्वास प्रकट किया और वो देश के प्रधानमंत्री बन गए, लेकिन अब उनसे कोई सवाल पूछा तो एक ही जवाब मिलता है कि कांग्रेस ने 60 सालों में क्या किया ।

समझने की बात यह है कि सवाल सरकार से पूछे जाते हैं, जवाबदेही सरकार की होगी। विकास की कमी होने पर भाजपा यह नहीं कह सकती कि दूसरे दलों ने क्या किया। अब यदि भाजपा जनता के सवालों का जवाब नहीं दे रही तो वह मुद्दों से ध्यान भटका रही है। वह सवालों का जवाब देने के बजाय दूसरों पर दोष दे रही है। मुद्दे और सवाल कहीं गायब होते जा रहे हैं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव सिर पर है और इसके बाद लोकसभा चुनाव है। मुद्दे फिर से आग की तरह फैलेंगे, तब देखना होगा कि इन सबसे बचने के लिए  भाजपा कौन-सा नया बहाना बनाती है।

-कुशाग्र वालुस्कर

 

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