कांग्रेस का घी बेटे की या भतीजे की थाली में गिरेगा ! 

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यदि थाली जोशी परिवार की हुई तो घी किसकी थाली में गिरेगा भतीजे की या बेटे की थाली में या क्षेत्र क्रमांक तीन का विधानसभा चुनाव काका-भतीजे के मुगालते दूर करने वाले परिणाम का कारण बनेगा? इंदौर जिले की नौ विधानसभा सीटों में से फिलहाल एक ही सीट (तीन नंबर) ऐसी है, जहां कांग्रेस का टिकट जोशी परिवार को मिलना तय माना जा रहा है| मिलेगा किसे तीन बार विधायक रहे और पिछला चुनाव भाजपा की उषा ठाकुर से हारे (भतीजे) अश्विन को या पूर्व मंत्री महेश जोशी के पुत्र दीपक (पिंटू) जोशी को।

कांग्रेस के तमाम प्रादेशिक और राष्ट्रीय नेता चाहते तो यह हैं कि काका-भतीजा बैठकर घर में ही चर्चा कर सर्वसम्मति से नाम बता दें, पर आज तक की स्थिति में ऐसा होता नज़र नहीं आता है| राहुल गांधी के दौरे के बाद एक नवंबर तक सूची जारी होगी। इस क्षेत्र का विवाद तब तक नहीं निपटा तो बड़े नेता अपने हिसाब से निर्णय लेंगे।

इंदौर के इस सबसे छोटे विधानसभा क्षेत्र में इस बार महाभारत की स्थिति बन रही है। भाजपा विधायक उषा ठाकुर को यहां से टिकट नहीं मिलेगा। सीएम की जनआशीर्वाद यात्रा के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं में हुई मारपीट के बाद अधिकांश नेता उषा ठाकुर के खिलाफ हो गए हैं। उषा ठाकुर की जगह भाजपा से कई नाम चल रहे हैं। इसके विपरीत कांग्रेस में इस सीट से महेश जोशी के बेटे दीपक या भतीजे अश्विन, इन दो ही नाम में से कोई एक तय होना है।

अश्विन जोशी तो एक पखवाड़े से यह संकेत सार्वजनिक रूप से दे रहे हैं कि मैंने तो खुद को प्रत्याशी घोषित कर दिया है, बस चुनाव चिह्न मिलना शेष है या तो पंजा मिलेगा नहीं तो पतंग, ट्रैक्टर, तलवार जो भी मिल जाए चुनाव तो लड़ूंगा यानी उन्होंने निर्दलीय लड़ने का मन बना लिया है। उनका तर्क है कि काका (महेश जोशी) के सहयोग से पहला चुनाव ज़रूर जीता, परंतु बाद में दो चुनाव तो अपनी ताकत से जीता हूं। मैं पार्टी के ऐसे किसी क्राइटिरिया में नहीं आता कि टिकट न दिया जाए। हक तो मेरा ही बनता है, मैं निर्दलीय भी लड़ा तो जीत कर बताउंगा।

दूसरी तरफ इस सीट से महेश जोशी अपने पुत्र दीपक (पिंटू) को टिकट दिलाकर एक तरह से उसे अपनी राजनीतिक विरासत सौंपना चाहते हैं। दीपक का नाम पांच नंबर से भी चला था, लेकिन एक परिवार से दो लोगों को टिकट मिलना संभव नहीं इसलिए महेश जोशी मित्र मंडली तीन नंबर से ही पिंटू के लिए सक्रिय है। टिकट की चर्चा को लेकर मामला प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ तक भी पहुंचा था| उन्होंने महेश भाई का क्या कहना है जैसा प्रश्न पूछकर जोशी परिवार पर ही निराकरण का दायित्व डाल दिया है। इधर, अश्विन जोशी भी भोपाल से दिल्ली तक ज्योतिरादित्य से लेकर राहुल गांधी तक तार जोड़ने में लगे हैं। उन्हें भरोसा है कि विपरीत परिस्थितियों में सीट जीतना हर जगह उनके लिए प्लस पॉइंट रहेगा| उनके साथ वाले तो अभी से दावा भी करने लगे हैं कि बाबा चुनाव जीतेंगे और मंत्री भी बनेंगे, पर खुद अश्विन भी जानते हैं कि पुत्र को टिकट दिलाना काका ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है| राष्ट्रीय स्तर पर अशोक गहलोत से लेकर कमलनाथ, दिग्विजयसिंह तक का झुकाव महेश जोशी के पक्ष में अधिक रह सकता है।

जोशी परिवार को पता चल जाएगी औकात 

जोशी परिवार से टिकट किसी एक को ही मिलेगा। बहुत संभव है कि दीपक को ही मिले, ऐसी स्थिति में अश्विन निर्दलीय लड़ सकते हैं। ऐसा होने पर होगा यह कि वे खुद जीतें न जीतें, सारी कोशिश यह रहेगी कि पिंटू न जीते, ऐसे में न सिर्फ भतीजे वरन काका महेश जोशी परिवार को भी औकात पता चल जाएगी। दूसरी तरफ महेश जोशी मित्र मंडली का मानना है महेश भाई का एक तरह से यह आखिरी चुनाव रहेगा तो वे किसी कीमत पर नहीं चाहेंगे कि पिंटू को शिकस्त मिले। उनके नजदीकी बताते हैं कि वे राष्ट्रीय नेताओं को बता चुके हैं कि पिंटू को हारने नहीं दूंगा। जब वे अपने भतीजे को पहला चुनाव जितवा सकते हैं तो बेटे की जीत के लिए कसर नहीं छोड़ेंगे। भाजपा भी यह इंतजार कर रही है कि मैदान में भतीजा रहेगा या बेटा, उसी के आधार पर प्रत्याशी तय करेगी। यह क्षेत्र ब्राह्मण और महाराष्ट्रीयन बहुल होने से प्रत्याशी किस समाज का रहे, यह भी देखा जाएगा।

फिर उषा की जगह भाजपा से कौन? 

इस क्षेत्र से विधायक उषा ठाकुर को नहीं लड़ाया जाएगा, यह लगभग तय है? फिर भाजपा से कौन गोविंद मालू, सुमित्रा महाजन की बहू, नगर भाजपा अध्यक्ष गोपी नेमा, ललित पोरवाल, कैलाश पुत्र आकाश या अन्य कोई चौंकाने वाला नाम? उषा ठाकुर और गोविंद मालू के बीच जो मनमुटाव की स्थिति गंभीर हुई है, उसमें यदि उषा ठाकुर नहीं तो तीन नंबर से गोविंद मालू भी नहीं का कारण बन सकता है। सुमित्रा महाजन चाहेंगी कि उनके गृह क्षेत्र से उनकी पसंद के व्यक्ति को टिकट मिले। भाजपा रुको और देखो की नीति अपनाएगी, कांग्रेस से जिसका नाम फाइनल होगा, भाजपा उस आधार पर निर्णय लेगी। पिंटू को टिकट मिलने पर अश्विन जोशी निर्दलीय लड़ें, भाजपा अंदरुनी तौर पर मदद करे, यह भी संभव है। कांग्रेस यह भी कर सकती है कि बेटे-भतीजे वाला विवाद न सुलझे तो महेश जोशी को ही मैदान में उतार दे या किसी नए व्यक्ति को टिकट देकर जोशी परिवार पर जिताने का बोझ डाल दे।

-कीर्ति राणा

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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