क़र्ज़ माफ़ी का भस्मासुर

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बचपन में हमारी दादी हमे एक कहानी सुनाती थी कि भस्मासुर नाम का एक राक्षस था जिसने भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या करी, उसकी तपस्या इतनी कठोर थी की भोलेनाथ का मन पिघल गया और भक्त पर प्रसन्न हो कर बोल दिया मांगो क्या मांगते हो ? राक्षस भी होशियार था पूरा कैलकुलेशन कर के सोच समझ कर बोल दिया कि जिसके सर पर हाथ रखु वो भस्म हो जाये| अब भोलेनाथ तो भोलेनाथ, बोल दिया “तथास्तु ” लेकिन जैसे ही वरदान दिया, भस्मासुर उनके ही पीछे पड़ गया | अब भोलेनाथ कैसे बचे, भस्मासुर कैसे मरा, ये हमारे आज के मुद्दे के लिए ज़रूरी नहीं है |

पर पता नहीं क्यों जब से मैंने कमलनाथ जी को, 10 दिन में प्रदेश के किसानो का क़र्ज़ माफ़ कर देने के लिए वचनबद्ध देखा है तब से भोलेनाथ का ये वरदान बेहद याद आ रहा है, कि सरकार का ये वरदान मप्र की जनता के लिए कही भस्मासुर तो नहीं बन जाएगी | दिग्विजय काल(2003 -2018 ) के पश्चात् पिछले 15 सालो से अपनी गाड़ी के आगे मुख्यमंत्री की प्लेट लगाने के लिए बेताब कांग्रेस ने, सत्ता को पाने के लिए घोषणाऐ-दावे-वादे-कसम-सौगंध सब ले ली, जब लगा इसमें कुछ कमी हैं तो राहुल जी ने बोल दिया कि मप्र में सरकार बनी तो किसानो का क़र्ज़ 10 दिन में माफ़ |अब आप टाइमिंग देखिये जब ये घोषणा की जा रही थी ठीक उसी समय माता सरस्वती, इंडो-इटेलियन राहुल गांधी की जिव्हा पर विराजमान हो गई इधर राहुल जी ने बोलें किसानो का क़र्ज़ माफ़ उधर प्रदेश में भाजपा का सूपड़ा साफ़ |

लेकिन 10 दिन बाद क़र्ज़, कम मूल्य मिलने के कारण आत्महत्या करने वाला किसान, उपकार के मनोज कुमार की तरह ” जय जवान – जय किसान” का नारा लगाएगा, उसके पहले हम मप्र की मजबूत वित्तीय अर्थव्यवस्था को समझ ले | राज्य सरकार के ऊपर मार्च 2018 तक एक लाख 60 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत में भी मप्र तीन हजार करोड़ रुपए का कर्ज बाजार से ले चुका है। राज्य सरकार दस साल के लिए अपनी गवर्नमेंट सिक्युरिटी बेचकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से दस साल के लिए विभिन्न् वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेती है। इसमें कई बैंक भी शामिल होते हैं। एक न्यूज़ के अनुसार उधारी का जानकारी इस प्रकार हैं |मार्च 2018 तक सरकार द्वारा विभिन्न् माध्यमों द्वारा लिया गया कर्ज
बाजार से– 88,491.64

कंपनसेशन और अन्य बांड–7501.92

वित्तीय संस्थानों से कर्ज– 10,469.67

केंद्र सरकार से लिया कर्ज और एडवांस– 15,340

अन्य कर्ज– 15,921.36

विशेष सुरक्षा निधि– 23,147.31 (राशि करोड़ रुपए में)

मध्य प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा किसानों के कर्ज माफी की जो घोषणा की गई है, उस पर यदि अमल होता है तो लगभग 35 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। आज की स्थिति में मप्र के 72 लाख किसानों पर करीब 75 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। राहुल गांधी छह जून 2018 को मंदसौर और फिर भोपाल में 17 सितंबर को किसानों की कर्ज माफी का ऐलान कर चुके है |
ये तो बात हुई चुनावी सभा की | अब बात करते हैं कांग्रेस सरकार के नए मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा कल एक समाचार को दिए गए इंटरव्यू कि | जिसमे उन्होंने बड़े ही साफ़ शब्दों में कहां कि शिव के राज में मप्र.के राजकोष की हालत शाहरुख़ खान की आने वाली फिल्म के नाम की तरह ” 0 ” हैं,
तो 35000 करोड़ कहा से आएंगे ? इसका उत्तर में खोज रहा हूँ |
वैसे कमलनाथ जी ने ये भी कहां हैं कि इस योजना को लागु करने के लिए रोड मैप तैयार किया जा रहा है तो हो सकता है कांग्रेस सरकार चुनावी चंदे की तरह माफ़ी चंदा भी आपस में इकट्ठा कर रही हो, किसानो को पैसे देने के लिए, इसलिए हमे धैर्य रखना चाहिए | वैसे अपनी मांगो के लिए आजकल बार-बार सडको पर उतरने वाले किसानो ने भी धैर्य तो रखा है इसिलए कई किसान कर्ज माफ़ी की उम्मीद में ब्याज़ नहीं चूका रहे है वैसे अगर ऐसा हो भी रहा है तो कृषि प्रधान भारत के किसान को इतनी उम्मीद करने का हक तो मिलना चाहिए कम से कम हमे इतना तो यकीन हैं की वो नीरव मोदी और माल्या जैसे देश से बहार नहीं भाग सकते | इसके साथ एक भयानक सच और आपको बताता हूँ एक न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित खबर के अनुसार आज भारत के हर एक नागरिक जिसमे मप्र के नागरिक भी शामिल हे उन पर 340 डॉलर का कर्ज है। इसे यदि रुपए में बदलें तो ये कर्ज 22 हजार 135 रुपए 70 पैसे बनता है । इसके लिए हम पर कई तरह के टैक्स पहले ही लगा रखे हैं| अब सत्ता पर काबिज़ होने के लिए सरकार ने किसानो के क़र्ज़ माफ़ी का जो बम फोड़ा दिया हैं तो इसके लिए कोई मज़बूत योजना राहुल के पास हो, तब तो ठीक हैं और अगर नहीं तो इसके लिए भी ऋण लिया जायेगा |फिर तो तैयार रहिये और ज्यादा टैक्स देने के लिए | मतलब एक के आंसू पोछने के लिए दूसरे को रुलाया जायेगा |

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुरमन भी बोले कि राजनैतिक उद्देश्यों से क़र्ज़ माफ़ी की घोषणाएं करना सही नहीं हैं| मैं जानना चाहता हूँ कि क्या ये घोषणा करने से पहले राहुल गांधीजी, कमलनाथ और सिंधियाजी ने मप्र की वित्तीय हालत,आय के स्त्रोत, किसानो की संख्या, लिया गया क़र्ज़, डूबत ऋण, डिफॉल्टर किसान, क़र्ज़ की राशि इन सभी बातों का पूरा आंकलन किया हैं या ये घोषणाएं 15 साल के इंतज़ार की बैचेनी हैं जिसकी कीमत अब मप्र के हर एक नागरिक को चुकानी पड़ेगी |
ये सवाल आपके ज़ेहन में छोड़े जा रहा हूँ मेरे साथ आप भी उत्तर खोजियेगा | धन्यवाद
विश्वम्भर नाथ तिवारी – Creative Editor

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