करतारपुर: राह तो खुली है, परंतु संदेह बरकरार

0

पाकिस्तान स्थित करतारपुर गुरुद्वारा साहिब तक जाने का रास्ता साफ हो गया है। यह फैसला स्वागत योग्य है। सिख समुदाय वर्षों से इसकी मांग कर रहा था तो भारत सरकार भी दो दशकों से इस प्रयास में जुटी थी, परंतु पाकिस्तान के भारत विरोधी रवैये के कारण बात आगे नहीं बढ़ सकी। अब हालात बदले हैं तो गुरुनानक जयंती से ठीक एक दिन पहले भारत सरकार ने फैसला किया कि पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पाकिस्तान स्थित करतारपुर जाने के लिए विश्वस्तरीय गलियारे का निर्माण किया जाएगा ताकि गुरुद्वारा साहिब करतारपुर तक जाने का रास्ता बन सके।

भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने भी सद्भाव दिखाया और अपने यहां करतारपुर गुरुद्वारे आने वाले श्रद्धालुओं को सारी सुविधाएं देने की बात कही। भारत के उपराष्ट्रपति और पंजाब के मुख्यमंत्री इसकी नींव रखेंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी 28 नवंबर को अपने यहां एक समारोह में गुरुद्वारे से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक गलियारा निर्माण का उद्घाटन करेंगे। हालांकि पाकिस्तान ने इसका भी राजनीतिक उपयोग करने की कोशिश की।

विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ट्वीट किया तो विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैजल ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से तो भारत को करतारपुर सहित सारे मामलों पर बातचीत का प्रस्ताव दे दिया था, परंतु कोई जवाब ही नहीं मिला। भारत ने पाकिस्तान से वहां जाने वाले तीर्थयात्रियों की पूर्ण सुरक्षा के साथ निर्बाध रूप से 24 घंटे आने-जाने की इजाज़त का भी अनुरोध किया है परंतु पाकिस्तान की तरफ से अभी ऐसा आश्वासन नहीं मिला है।

करतारपुर के महत्व के समझते हुए पाकिस्तान को यह पहल काफी पहले ही करनी चाहिए थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यकाल में इसकी मांग भी की थी। इसके बाद मनमोहनसिंह ने भी कई बार इसका अनुरोध किया। हालांकि वीजा आदि की संख्या तो बढ़ी, परंतु इधर से उधर जाने का रास्ता तो आम भारतीयों को वहां ले जा सकता है, वह नहीं खुला। बहरहाल, सिखों के लिए करतारपुर का यह गुरुद्वारा एक अहम पवित्र स्थान है और पाकिस्तान ने सिख समुदाय के लिए अच्छा कदम उठाया है।  उम्मीद नहीं थी कि पाकिस्तान रास्ता खोलने को राज़ी होगा परंतु पाकिस्तान के ऐसे सद्भाव पर ज्यादा भरोसा करने की ज़रूरत भी नहीं है। अमृतसर के निरंकारी भवन में हुए हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।

खालिस्तान आतंकवादियों को वहां से मदद मिल रही है। ख़बर यह भी है कि 21-22 नवंबर को गुरुद्वारा ननकाना साहिब में भारतीय राजनयिक को न केवल गुरुद्वारे में जाने से रोका गया, बल्कि उनसे दुर्व्यवहार भी किया गया। गुरुद्वारा में हर व्यक्ति को जाने की इजाज़त है तो भारतीय राजयनिक को रोकने का क्या अर्थ निकाला जाए। इस पर गौर करना चाहिए। करतारपुर की राह तो खुली है, परंतु संदेह अभी बरकरार है।

भारत-पाक : नानक बरामदा

सिख समुदाय को केंद्र सरकार का तोहफा

पाकिस्तान दूसरों की जंग नहीं लड़ेगा – इमरान खान

Share.