जेआरडी टाटा : भारतीय नागरिक उड्डयन के जनक

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भारत के सबसे बड़े कारोबारी घराने को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाने वाले जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा यानी जेआरडी टाटा ने दुनिया को नई ऊंचाई तक पहुंचाया| इनका नाम लेते ही जेहन में ऐसे शख्स की तस्वीर उभरती है, जो सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं, जो देश के सबसे पहले कमर्शियल पायलट बने, जिनके साथ एयर इंडिया के बनने की दास्तां जुड़ी है| जेआरडी टाटा उन चंद लोगों में से एक हैं, जिन्होंने भारतीय उद्योगों का ढांचा खड़ा करने में अपनी अहम भूमिका निभाई| एक ऐसा व्यक्ति, जिसके पास देश की सबसे बड़ी कारोबारी कंपनी होने के बाद भी उसने राजनेताओं से हमेशा दूरियां ही बनाई| आजकल राजनेताओं और कारोबारियों की आपसी नजदीकी के चर्चे आम हो गए हैं, लेकिन जेआरडी टाटा राजनीति और व्यापार के बीच दूरी के पक्षधर थे| टाटा ग्रुप ने इस साल स्थापना का 150वां जश्न मनाया|

देश के सबसे पहले कमर्शियल पायलट

जेआरडी टाटा का जन्म 29 जुलाई, 1904 को पेरिस में हुआ था| उनके पिता रतनजी दादाभाई टाटा  ने भी देश के सामने औद्योगीकरण की मिसाल पेश की थी| वे देश के ऐसे पहले व्यक्ति थे, जिन्हें हवाई जहाज चलाने के लिए लाइसेंस मिला| दरअसल, आधुनिक भारत के निर्माण में उनका विशेष योगदान था| उन्होंने ही देश की पहली वाणिज्यिक विमान सेवा ‘टाटा एयरलाइंस’  की शुरुआत की थी| इसे ही आज हम राष्ट्रीय विमान सेवा ‘एयर इंडिया’ के नाम से जानते हैं| उन्हें भारत के नागरिक उड्डयन का पिता भी कहा जाता है|

देश के सबसे बड़े कारोबारी का राजनीतिक रिश्ता

देश के पहले प्रधानमंत्री के समाजवाद से प्रभावित नहीं थे| उनके और जेआरडी के बीच मित्रता थी फिर भी उन्होंने कभी भी देश के आर्थिक मामलों के लिए जेआरडी की सलाह नहीं ली| इस बारे में जेआरडी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब भी आर्थिक मसलों पर बात करते, नेहरू उन्हें अनसुना करके खिड़की से बाहर ताकने लगते थे| उनका यह रवैया बिलकुल सही नहीं था| इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नेहरू ने जेआरडी की अध्यक्षता में देश का पहला आर्थिक ब्लूप्रिंट ‘बॉम्बे प्लान’ खारिज कर दिया था, जिसमें देश में बड़े उद्योग स्थापित करने की बात कही गई थी| ‘टाटा एयरलाइंस’ के जनक कहलाए जाने वाले जेआरडी नहीं चाहते थे कि इस एयरलाइन को सरकार चलाए, लेकिन ‘टाटा एयरलाइंस’ जब ‘एयर इंडिया’ में तब्दील हुई, तब इसका नियंत्रण सरकार के हाथों में चला गया|

पहले उद्योगपति जिन्हें मिला सर्वोच्च सम्मान

टाटा ग्रुप के 150 साल में से जेआरडी टाटा ने 53 साल तक टाटा सन्स की कमान संभाली| उन्हें इस ग्रुप का सबसे सफल चेयरमैन माना जाता है| उन्होंने इसकी कमान केवल 34 वर्ष की उम्र में ही संभाल ली थी| देश में अपने योगदान के कारण उन्होंने भारत सरकार का सबसे बड़ा सम्मान भी मिला| देश में अब तक जितने भी उद्योगपति हुए हैं, उनमें सिर्फ जेआरडी टाटा ही हैं, जिन्हें भारत रत्न प्राप्त हुआ है| उन्हें केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में भी सम्मानित किया गया|

वर्ष  1954 में उन्हें फ़्रांस सरकार की ओर से सर्वोच्‍च नागरिकता पुरस्कार ‘लीजन ऑफ द ऑनर’ से सम्मानित किया गया| इसके बाद भारत सरकार ने वर्ष 1957 में उन्हें ‘पद्म विभूषण’ से नवाज़ा| इसके बाद वर्ष 1988 में उन्हें ‘गुगेन‌हीम मेडल फॉर एविएशन’ सम्मान से नवाज़ा गया| भारत के नागरिक उड्डयन के पिता कहे जाने वाले टाटा को वर्ष 1992 में भारत सरकार ने देश का सर्वोच्‍च सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया| वहीं भारत में जनसंख्या नियंत्रण में अहम योगदान देने के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी वर्ष 1992में उन्हें ‘यूनाइटेड नेशन पापुलेशन अवॉर्ड’ से नवाज़ा| 29 नवंबर 1993 को जेआरडी टाटा ने दुनिया को अलविदा कह दिया| आज भी उनके अहम योगदान के लिए पूरी दुनिया में उन्हें याद किया जाता है|

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