बीएसएफ स्थापना दिवस : जिनके कारण सुरक्षित हैं हम

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दिन हो या रात, ठंड हो या गर्मी, चाहे कितनी भी प्रतिकूल परिस्थितियां हों, सीमा पर जांबाज़ हमेशा देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं| जब हम देश में खुशियां मना रहे होते हैं, तब भी सीमा पर हमारे जवान दुश्मनों से देश की रक्षा के लिए तैनात रहते हैं| चाहे देश के बाहर के आतंकी हो या फिर देश के उपद्रवी, सभी जगह जवान शांति फैलाने के लिए तैनात हो जाते हैं| आज विश्व की सबसे बड़ी पैरामिलिट्री फोर्स बीएसएफ  यानी ‘बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स’ का स्थापना दिवस है, जो पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है|  इस अवसर पर पूरा देश सैन्य बल को शुभकामनाएं दे रहा है|

बीएसएफ स्थापना दिवस की शुरुआत

‘बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स’ की स्थापना 1 दिसंबर, 1965 को की गई थी| सीमा सुरक्षाबल अपने गौरवशाली इतिहास के 53 साल पूरे कर चुका है| सीमा सुरक्षा बल देश का एक प्रमुख अर्धसैनिक बल तो है ही, साथ ही विश्व का सबसे बड़ा सीमा रक्षक बल है| भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की निरंतर निगरानी करना, सीमा की रक्षा तथा सीमा के जरिये होने वाले अपराध को रोकने की जिम्मेदारी भी ‘बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स’ के जांबाज़ों के कंधों पर ही होती हैं| वे घने जंगलों, पहाड़, नदी, घाटियों, बर्फीली वादियों में भी हमेशा देश की रक्षा के लिए डटे रहते हैं|  मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद बीएसएफ के जवान समर्पण भाव के साथ और मजबूत इरादे लिए अपने सीने पर दुश्मन का वार सहने के लिए तैयार रहते हैं| वे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित महसूस करवाने के लिए हमेशा चौकन्ने रहते हैं|

क्यों हुई बीएसएफ की स्थापना

जब 1962 में चीन के साथ युद्ध हुआ था, तब देश की सुरक्षा को लेकर एक जैसी नीति नहीं थी, जिस कारण कई समस्याएं भी हुईं| उस समय तक पुलिस ही अपने-अपने राज्यों से लगते अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर की सुरक्षा किया करते थे| जहां पंजाब में पाकिस्तान सीमा  की रक्षा पंजाब पुलिस के कंधों पर थी तो वहीं बंगाल, गुजरात या जम्मू-कश्मीर की सीमा वहां के पुलिस के कंधों पर थीं|

पाकिस्तान के साथ हुए 1965 के युद्ध के बाद बीएसएफ की स्थापना की गई|  9 अप्रैल, 1965 को तड़के 3 बजे पाकिस्तान ने कच्छ के रण स्थित भारत की दो चौकियों पर हमला कर दिया| इसके बाद ही पाकिस्तानी दुश्मनों को सबक सिखाने के लिए 1 दिसंबर को सीमा सुरक्षा बल का गठन किया गया| दरअसल, जब युद्ध हुआ तब तो भारत ने किसी तरह विजय प्राप्त कर ली, लेकिन पिछले अनुभवों के आधार पर वे बीएसएफ की स्थापना का प्रस्ताव लाए और 1 दिसंबर 1965 को इसकी स्थापना की गई| केएफ रुस्तमजी सीमा सुरक्षा बल के पहले महानिदेशक थे|

बीएसएफ के जवान केवल सीमा पर ही देश की रक्षा नहीं करते हैं बल्कि वे देश के भीतर भी देशवासियों की रक्षा करते हैं| छत्तीसगढ़ में साल 2009 में प्रदेश आंतरिक आतंकवाद की समस्या से निपटने के लिए भी बीएसएफ के जवानों ने अहम रोल अदा किया था| अभी भी वहां कई जिलों में बीएसएफ के जवान बहादुरी से नक्सलियों का मुकाबला कर रहे हैं| आज बीएसएफ में 188 बटालियन है और यह 6,385.36 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करती है|

जवान केवल देश की सुरक्षा के लिए ही नहीं बल्कि अपने कई करतबों के लिए भी जाने जाते है| वाघा बॉर्डर पर बीएसएफ के जवानों का कौशल देखते ही बनता है| इसके अलावा राजपथ पर परेड में भी बीएसएफ के जवान अपने हुनर का प्रदर्शन कर चुके हैं| आज बीएसएफ स्थापना दिवस के मौके पर देश में कई लोगों ने जवानों को सलाम करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं|

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