पहले ही दिन हर वर्ग को खुश किया

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कमलनाथ के लिए सोमवार बेहद लकी साबित हुआ । मप्र की कमान संभालने से पहले ही उनके लिए शुभ संकेत मिल गए| दिल्ली हाईकोर्ट ने सिख दंगों को लेकर जो फैसला सुनाया, उसमें कमलनाथ को निचली अदालत का फैसला पलटते हुए सज्जन कुमार को दोषी ठहराया, लेकिन कमलनाथ को आरोपी नहीं माना जबकि निचली अदालत में भी वे मुल्जिम नहीं थे, लेकिन लोगों का आरोप था कि कमलनाथ दंगों में शामिल थे। 

कमलनाथ के शपथग्रहण समारोह वाले जंबूरी मैदान तक के रास्तों पर भोपाल में मुबारकबाद के बैनर होर्डिंग्ज लगे थे। सारी होटलें बाहर से आने वाले कांग्रेस नेताओं के कारण फुल हो गई थी। विभिन्न जिलों से आए 150 से अधिक आयएएस के कारक्अण भी होटलें बुक थीं। महागठबंधन के बड़े नेताओं में शामिल हुए राज बब्बर, कैलाश जोशी, बाबूलाल गौर, अरुण यादव, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, देवेगौड़ा,कर्नाटक सीएम कुमार स्वामी, नारायण सामी, मल्लिकार्जुन खड़गे, चंद्रबाबू नायडू, फारख अब्दुल्ला, गुलामनबी आजाद, शरद यादव, मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत, डिप्टी सीएम सचिन पायलट, शीला दीक्षित, आनंद शर्मा, एमके स्टालिन, हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, नवजोत सिंह सिद्धु मौजूद थे। मंच पर जब शिवराजसिंह आए तो नारे लगे माफ करो शिवराज। साधु-संतों में कंप्यूटर बाबा, शहर काजी इशरत अली भी मंच पर थे। कमलनाथ, सिंधिया के साथ 2.25 बजे राहुल गांधी आए तो पूरा पांडाल तालियों से गूंजा। राहुल ने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन किया। सिंधिया ने भी अभिनंदन किया। शिवराज के साथ कमलनाथ, सिंधिया ने हाथ में हाथ डालकर अभिवादन किया।दोपहर 2.30 बजे राज्यपाल का आगमन अठारहवें सीएम के रूप में शपथ ली। इससे पहले शपथ ग्रहण संचालन के लिए सीएस बीपी सिंह ने अनुमति ली राज्यपाल से।

पंडालों में करीब एक लाख लोग शपथग्रहण समारोह के साक्षी बने। इन सबको लग रहा था कि राहुल गांधी का भाषण भी होगा, मंच से इस आशय की घोषणा भी हुई थी, लेकिन गठबंधन के नेताओं की रवानगी और छत्तीसगढ़ में शाम को शपथ के कारण राहुल गांधी भी तत्काल रवाना हो गए।पहली ही प्रेस कांफरेंस में तीन प्रमुख घोषणा कर के कमलनाथ ने प्रदेश के किसानों, महिलाओं और युवाओं का एक तरह से दिल जीत लिया। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस ने अपने वचन-पत्र में जो वादे किए, उन वादों को विश्वास में बदलने का माद्दा भी उन में है। पहली घोषणा में उन्होंने जहां प्रदेश के किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ किया वहीं इस माफी को लेकर यह भी स्पष्ट कर दिया कि यूपीए सरकार के वक्त केंद्र ने डिफाल्टर्स किसानों का कर्ज माफ किया था, लेकिन हमारी इस कर्ज माफी में डिफाल्टर के साथ करंट खाते वाले किसानों को भी लाभ मिलेगा।

हमारे लिए यह बात अच्छी है कि भाजपा ने यह मान लिया है कि खजाना खाली कर के हमें सौंपा है। राशि जुटाने के लिए के लिए हम नए संसाधन भी खोजेंगे। सरकारी परिसरों में आरएसएस की शाखाओं पर प्रतिबंध के वचन-पत्र के वादे के संबंध में उनका कहना था हमने कोई नई बात नहीं की है । यह केंद्र का नियम है, जो गुजरात में भी लागू है| सरकार चाहे तो नियम बदल दे।

-कीर्ति राणा 

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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