देश का माहौल बिगाड़ने वालों को कड़ी सज़ा मिले

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वर्ष 2015 का जुलाई माह, गुजरात में पाटीदार समुदाय (पटेल उपनाम वाले) के कुछ युवाओं ने निर्णय लिया कि वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में अपने समुदाय के आरक्षण और समाज को अन्य पिछड़ी जातियों में शामिल करवाने के लिए आंदोलन करेंगे| युवाओं के इस निर्णय को लालजी पटेल की अध्यक्षता में बने सरदार पटेल ग्रुप (एसपीजी), सरदार पटेल सेवादल,  केडी शेलडीया की अध्यक्षता में बनी अखिल भारतीय पाटीदार परामर्श समिति, पाटीदार संकलन समिति और पाटीदार आरक्षण समिति ने उचित ठहराया और उन्हें समर्थन दे दिया| इससे युवाओं का हौसला बढ़ा और उन्होंने सार्वजनिक रूप से आंदोलन शुरू कर दिया| इसके बाद  हार्दिक पटेल की अध्यक्षता में पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) का गठन किया गया।

22 जुलाई 2015 को मेहसाणा जिले में आंदोलन शुरू कर दिया गया| 23 जुलाई को जिले के विसनगर में प्रदर्शन हिंसक हो गया, कुछ आंदोलनकारियों ने वाहनों में आग लगा दी और भारतीय जनता पार्टी के विधायक ऋषिकेश पटेल के कार्यालय में तोड़फोड़ भी की। इसके बाद हार्दिक पटेल सहित सभी 17 लोगों के खिलाफ आगजनी, दंगा करने और आपराधिक साजिश के तहत आरोप लगाए गए थे। इसके बाद सुरेंद्रनगर, भरुच और वडोदरा, अहमदाबाद, ऊंझा सभी स्थानों से हिंसक घटनाओं की ख़बरें आने लगीं| यहां तक कि तोड़फोड़ व आगजनी भी हुई। सवा सौ गाड़ियों में आग लगा दी व 16 थाने जला दिए गए। ट्रेन की पटरियां भी उखाड़ दी गईं। आंदोलनकारियों के नेता हार्दिक पटेल को हिरासत में ले लेने के बाद जब पुलिस ने माहौल बिगड़ता देखा तो घंटेभर में उसे छोड़ दिया, लेकिन तब तक पटेल समाज के लोग अहमदाबाद व सूरत सहित 12 से ज्यादा शहरों में सड़कों पर उतर आए।

अब प्रश्न यह उठता है कि अपना अधिकार पाने का यह कौन सा तरीका है| आप धरना-प्रदर्शन कीजिए, हस्ताक्षर अभियान चलाइए, प्रतिनिधिमंडल भेजकर सरकार से बातचीत करें, रैली निकालें, नारेबाजी करें यहां तक तो ठीक है परन्तु इस तरह राज्य और केंद्र सरकार की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाना और मारपीट करना सर्वथा अनुचित है|

गुजरात की एक अदालत ने पाटीदार समुदाय के नेता हार्दिक पटेल और उसके साथियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया| इसके लिए हार्दिक को दो साल की सज़ा सुनाई गई और 50 हज़ार जुर्माने का अर्थदंड लगाया गया। यह फैसला उचित था| परंतु हमारे देश की क़ानून व्यवस्था के लचीले नियमों के कारण हार्दिक पटेल को जमानत मिल गई और उन्होंने फिर से 2015 की तरह आंदोलन की शुरुआत कर दी है|

हार्दिक पटेल 25 अगस्त 2018  से आरक्षण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं| उनकी भूख हड़ताल आज तीसरे दिन में प्रवेश कर गई| उन्होंने फिर अपने समुदाय के सदस्यों के लिए आरक्षण तथा गुजरात के किसानों के लिए ऋण माफी की अपनी मांगें पूरी होने तक अनशन जारी रखने का संकल्प लिया| सरकार को उनके खिलाफ सख्ती से कदम उठाना चाहिए| उनसे अदालत ने बांड पर हस्ताक्षर करवाना चाहिए कि यदि वे अनशन जारी रखेंगे तो उनकी जमानत निरस्त कर उन्हें जेल भेज दिया जाएगा|

2015 में हार्दिक का आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से शुरू किया था, परंतु बाद में उसने हिंसक रूप ले लिया था| अब भी उन्होंने भूख हड़ताल से शुरू किया है, जो बाद में हिंसक हो सकता है| हार्दिक और उन जैसे हिंसक आंदोलन कर आरक्षण की चाह रखने वालों पर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है| अव्वल तो लोगों को हिंसा के लिए भड़काने वाले हार्दिक को जमानत ही नहीं दी जानी चाहिए थी| जमानत मिलने के कारण उनका हौसला बढ़ गया है और वे फिर बेखौफ होकर आंदोलन की राह पर निकल पड़े हैं| गौरतलब है कि 2015 के आंदोलन के मामले के अलावा भी बहुत सारे मामले हार्दिक के खिलाफ चल रहे हैं, जिनमें से कुछ मामले तो देशद्रोह तक के हैं।

2 साल की सज़ा के फैसले से हार्दिक पटेल की राजनीति में कोई रुकावट नहीं आई| कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद हार्दिक पटेल की जो प्रतिक्रिया मिली है, वह यही बताती है कि गुजरात के पटेल समुदाय के इस युवा नेता ने फैसले को अपनी राजनीति चमकाने के अवसर के रूप में ही लिया है।

हार्दिक जो आंदोलन कर रहे हैं,  उसे 2019 के आम चुनाव की उनकी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा था। इससे वे अपने समुदाय के मतदाताओं को अपने साथ जोड़े रख सकेंगे और विरोधियों के खिलाफ मजबूत हो सकेंगे|  खबर है कि हार्दिक पटेल लोकसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं, और इसी हिसाब से वह इस फैसले को भुनाना भी चाहेंगे।

चुनावी राजनीति से अलग हमें आरक्षण आंदोलनों पर भी ध्यान देना होगा। महाराष्ट्र में मराठा समुदाय का आरक्षण आंदोलन काफी उग्र हो गया था। राजस्थान के गुर्जर नेता भी आरक्षण की ताल ठोकने लग गए हैं। जाटों के आरक्षण का मुद्दा भी जोर पकड़ने वाला है, इसके लक्षण नज़र आने लगे हैं। लोगों को उकसाकर राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले और उन्हें हिंसा के लिए भड़काकर देश का माहौल बिगाड़ने वाले ऐसे तत्वों को कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए| इन पर कोई दया या इन्हें कोई छूट नहीं दी जानी चाहिए|

-अंकुर उपाध्याय

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