Hardik B’day : रंग तो महज नकाब है, हुनर देखो बाबू

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भारतीय टीम का उभरता सितारा हार्दिक पांड्या आज भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार बन चुके हैं| उनके हुनर के चर्चे अब देश-विदेश में जो होने लगे हैं| यहां तक कि उनकी तुलना भारतीय टीम को पहला विश्वकप दिलाने वाले महान ऑलराउंडर कपिल देव से की जाती है| फिलहाल वे अपने करियर के शुरुआती दौर में हैं| अभी भारतीय टीम के साथ उन्हें लंबा समय व्यतीत करना है| आज हार्दिक पांड्या का जन्मदिन है और इस ख़ास मौके पर हम आपको उनसे जुड़ी कुछ ख़ास बातें बताने वाले हैं|

दुनिया के कुछ देश ऐसे हैं, जहां आज भी लोग शरीर के रंग की वजह से लोगों को चिढ़ाते हैं| उन्हीं में से एक देश है भारत, जहां लोग काले रंग को लेकर तरह-तरह की टिप्पणी करते हैं और उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे लोग कभी उनके हुनर की तारीफ नहीं करते, उन्हें तो बस कुछ देर हंसने के लिए किसी के रंग और कद-काठी को लेकर मजाकिया टिप्पणी करना जरूरी है| बचपन में हार्दिक पांड्या भी काफी काले और दुबली कद-काठी के थे और मोहल्ले के लोग उन्हें काला कहकर चिढ़ाते थे|

हार्दिक के भाई क्रुणाल ने एक बार इंटरव्यू के दौरान बताया, “हार्दिक बचपन से ही वेस्टइंडियन की तरह दिखता है| जब कभी उसे कोई काला कहकर बुलाता था तो मेरी मां उनके साथ लड़ने लगती थी कि वह काला नहीं है| मैं हमेशा मां को कहता कि आप लड़ क्यों रहे हो| आपका बेटा काला है और अगर कोई उसे काला कहकर बुलाता है, तो क्या गलत है|”

मैगी खाकर गुजारे गरीबी के दिन

आज हार्दिक अपने करियर के जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुचने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया| इस क्रिकेटर की ज़िन्दगी से प्रेरणा लेने के लिए बहुत कुछ है| हार्दिक के परिवार की आर्थिक स्थिति कुछ ख़ास नहीं थी| उनके पिता हिमांशु पांड्या गुजरात के सूरत में फाइनेंस का व्यापार करते थे| उन्हें 1998 में इसे बंद करना पड़ा और पूरा परिवार फिर वडोदरा चला गया|

उनके पिता क्रिकेट के बहुत बड़े फैन हैं, इस वजह से उन्होंने अपने दोनों बेटों को क्रिकेटर बनाने का सपना देखा| वे हार्दिक और क्रुणाल को मैच दिखाने के लिए ले जाते थे| आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद पांड्या ब्रदर्स के पिता ने हार नहीं मानी और अपने बेटों को वडोदरा में किरण मोरे एकेडमी में भेजा, लेकिन उनके पास फीस देने के पैसे नहीं थे| भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर किरन मोरे ने पांड्या ब्रदर्स को पहले तीन साल तक बिना फीस लिए क्रिकेट खेलना सिखाया|

खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ अपनी डाइट पर भी ध्यान देना पड़ता था| रुपए न होने की वजह से हार्दिक को रात में मैगी खाकर गुज़ारा करना पड़ता था| एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपनी गरीबी की दास्तान बयां की थी| पढ़ाई के मामले में हार्दिक पांड्या नील बटा सन्नाटा थे| वे नौवीं क्लास में फेल हो गए थे, इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और पूरी तरह से अपना ध्यान क्रिकेट पर लगाया|

हार्दिक पांड्या का ऑलराउंड करियर

हार्दिक पांड्या ने वनडे, टेस्ट और टी-20 तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम की ओर से क्रिकेट खेला है| उनके वनडे करियर पर नजर डाली जाए तो उन्होंने 42 मैचों में कुल 670 रन बनाए हैं और कुल 40 विकेट लिए हैं| इस दौरान उन्होंने 4 अर्धशतक लगाए हैं| वहीं उनके टेस्ट करियर पर नज़र डाली जाए तो उन्होंने 11 मैचों में 532 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक और 4 अर्द्धशतक शामिल हैं| वहीं टेस्ट में गेंदबाजी में उन्होंने कुल 17 विकेट अपने नाम किए हैं| उनके टी-20 करियर को देखा जाए तो उन्होंने 35 टी-20 मुकाबलों में कुल 271 रन बनाए हैं और 33 विकेट हासिल किए हैं|

-ह्रदय कुमार

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