गुरुनानक देव : सूखी रोटी से बहाई दूध की धारा…

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सिख पंथ के पहले गुरु गुरुनानक देव एक ऐसे गुरु हुए, जिन्हे केवल सिखों में ही नहीं बल्कि सभी धर्मों में पूजा जाता है| उन्होंने अपने जीवन में भटके हुए लोगों को राह दिखाई साथ ही कई ऐसे चमत्कार भी दिखाए कि लोगों की उनके प्रति आस्था मजबूत होती गई| उन्होंने गरीबों को हक़ दिलाने के लिए भी कई कार्य किए| आज गुरुनानक देव की जयंती है| आज के दिन को प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाया जाता है|आज के दिन को हिन्दू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है|

गुरुनानक देव का जन्म लाहौर के तलवंडी गांव में किसान परिवार के घर कार्तिक माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था| उनमें बचपन से ही तेज था| उनका जन्म ऐसे समय में हुआ, जब देश में जातिवाद को लेकर युद्ध छिड़ा था| विदेशी ताकतें लोगों को गुमराह कर रही थी| केवल 16 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई| वे बचपन से ही धर्म और अध्यात्म से जुड़े हुए थे इसलिए उन्होंने अपने दो पुत्रों और पत्नी को छोड़ धर्म की राह अपना ली|

जब रोटी से बहाई दूध की धारा

एक बार गुरुनानक देव को एक अमीर व्यक्ति ने अपने घर पर भोजन के लिए बुलाया| नानक साहिब उनके घर नहीं गए क्योंकि वह अमीर व्यक्ति गरीबों पर अत्याचार करता था| वहीं जब उन्हें मजदूर ने बुलाया तो उन्होंने उसका निमंत्रण ख़ुशी से स्वीकारा| इस बात का जब अमीर व्यक्ति को पता चला तो उसने गुरुनानक की बहुत आलोचना की| इसके बाद व्यक्ति ने कहा, “वास्तव में तुम अव्वल दर्जे के पाखंडी हो और नीच कुल के हो, तभी तो नीच कुल वालों का ही निमंत्रण स्वीकार करते हो? मेरे स्वादिष्ट व्यंजनों से तुम्हें खून निकलता दिखाई देता है और उस मजदूर की बासी रोटियों से दूध?” इसके बाद गुरुनानक ने कहा कि गरीब की सूखी रोटी से भी दूध निकल सकता है| अमीर व्यक्ति ने अपने घर से स्वादिष्ट व्यंजन मंगवाए और गरीब व्यक्ति के घर से सूखी रोटी मंगवाई गई| नानक ने एक हाथ में स्वादिष्ट व्यंजन लिए और दूसरे में मजदूर के घर की बासी रोटी और दोनों हाथों को एक साथ दबाया| कुछ ही देर में रोटी से दूध निकलने लगा| यह देख अमीर व्यक्ति का घमंड चूर-चूर हो गया| गुरुनानक देव ने समाज में फैले अंधविश्वास और जातिवाद को मिटाने के लिए बहुत से कार्य किए| वे हमेशा गरीबों को सम्मान दिलाने के लिए कार्य करते थे|

गुरुनानक देव के जीवन से जुड़े गुरुद्वारे 

गुरुद्वारा कंध साहिब

गुरुदासपुर, बाटला का यह गुरुद्वारा जहां गुरुनानक का विवाह हुआ था| वहां पर प्रतिवर्ष उनकी वर्षगांठ पर उत्सव का आयोजन होता है|

गुरुद्वारा हाट साहिब, सुल्तानपुर लोधी

कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी में स्थित गुरुद्वारा हाट साहिब से भी गुरुनानक साहब की यादें जुड़ी हुई हैं| यहां उन्होंने सुल्तानपुर के नवाब के यहां शाही भंडार के देखरेख की नौकरी प्रारंभ की थी|

गुरुद्वारा गुरु का बाग

सुल्तानपुर लोधी में ही स्थित गुरुद्वारा गुरु का बाग में गुरुनानक देवजी का घर था| वहीं उनके बेटों का जन्म हुआ था|

गुरुद्वारा कोठी साहिब

सुल्तानपुर लोधी का गुरुद्वारा कोठी साहिब एक ऐसा स्थान है, जहां पर नवाब दौलतखान लोधी ने हिसाब-किताब में गड़बड़ी की आशंका में नानकदेव को जेल भिजवा दिया था, लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो उन्होंने नानक के सामने प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव रखा|

गुरुद्वारा बेर साहिब

सुल्तानपुर लोधी में स्थित इस गुरुद्वारे में नानक साहब को ईश्वर से साक्षात्कार हुआ था| दरअसल, वे वैन नदी के किनारे बैठे थे तो अचानक उन्होंने नदी में डुबकी लगा दी और तीन दिनों तक लापता हो गए, जहां पर कि उन्होंने ईश्वर से साक्षात्कार किया| सभी ने उन्हें मरा हुआ मान लिया था, लेकिन वे वापस लौटे और उन्होंने कहा- इक ओंकार सतनाम…|

गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक

गुरुदासपुर में स्थित गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक जो रावी नदी के किनारे स्थित है| वहां सन् 1539 ई. ने नानक परम ज्योति में विलीन हो गए|

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