गुजरात सरकार ने बढ़ाई अपने मंत्री-विधायकों की पगार

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एक तरफ जहां ग़रीब और ग़रीब होता जा रहा है वहीं अमीर और अमीर बनते जा रहे हैं। आज के समय में बहुत कम लोग नौकरी करना चाहते हैं| सभी सांसद, मंत्री या विधायक बनना चाहते हैं। आखिर हर कोई विधायक या मंत्री बनने के लिए इतना उतावला क्यों है ? हां, यह बात बिलकुल सही है कि एक बार मंत्री या विधायक बनाने पर समाजसेवी का ठप्पा मिल जाता है, जो अपने आप में बहुत बड़ी बात है ,लेकिन इस ठप्पे के साथ इन समाजसेवियों को मोटी रकम भी मिलती है।

मौजूदा समय की हकीकत यह है कि आप नेता को एक बार वोट देते हैं, विधायक बनने के बाद वे जीवनभर नोट लेते हैं। जनता तो इनकी पूजा करती ही है| साथ ही साथ सरकार भी इनका अपने दामाद जैसा खयाल रखती है। विधानसभा सचिवालय में विधायक सुविधा नाम से अलग से शाखा है, जहां विधायकों की सुविधा का ध्यान रखा जाता है। जनसेवा का महान कार्य करने के बदले इनको मिलता है हर महीने मोटा-तगड़ा वेतन। इतना ही नहीं हर महीने मिलने वाले वेतन के अलावा इनको अन्य रूपों में भी वेतन दिया जाता है। जैसे यात्रा भत्ते के रूप में, चिकित्सा भत्ते के रूप में, जब विधायक नहीं भी रहें तो पेंशन के रूप में और यदि मृत्यु हो जाए तो उनके पति या पत्नी को जीवनभर पेंशन की पात्रता रहती है।

बात बस यहीं ख़तम नहीं होती  सुरक्षा के लिए एक या एक से अधिक गनमैन, मकान बनाने के लिए रियायत दर पर जमीन का आवंटन, प्रदेश के अंदर एक सहयोगी के साथ रेलगाड़ी के एसी डिब्बे में अनलिमिटेड यात्रा, प्रदेश के बाहर रेलगाड़ी के सभी डिब्बे में प्रतिवर्ष छः हजार किलोमीटर की यात्रा, फ्री लैपटॉप,  हवाई यात्रा की सुविधा,  प्रतिदिन यात्रा भत्ता, घर से स्टेशन तक तथा स्टेशन से विधायक निवास तक का भत्ता, फ्री फ़ोन कॉलिंग, 80 लाख प्रतिवर्ष से ज्यादा विधायक निधि,बीमार होने पर फाइव स्टार हॉस्पिटल सुविधा।

इन सभी बातों के बाद भी गुजरात सरकार ने राज्य के विधायकों और मंत्रियों की सैलरी में बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। आप किसी भी विधायक को हर महीने मिलने वाली पगार जानकर अचंभित रह जाएंगे। गुजरात में विधायकों की पगार अब 1 लाख 16 हज़ार रुपए हो गई है। वहीं मंत्री कैसे पीछे रह जाते, अब मंत्रियों को हर महीने 1 लाख 32 हजार रुपए मिलेंगे। विधायकों की सैलरी में वृद्धि दिसंबर, 2017 से लागू होगी। जहां विधायकों का वेतन पहले 73000 रुपए था, अब वह बढ़कर 1 लाख 16 हजार रुपए हो गया। वहीं मंत्रियों की सैलरी जो पहले 86000 रुपए थी, वह अब बढ़कर 1 लाख 32 हजार रुपए हो गया है। गुजरात सरकार द्वारा अपने मंत्री विधायकों को हर महीने 45000 रुपए बढ़ाकर दिए जाएंगे। इस धनवर्षा के साथ विधायक बनने के बाद वैधानिक और अवैधानिक कई शक्तियां इनके हाथों में आ जाती हैं।

पहले ही देश की सरकार कई बोझों के तले दबी थी और ऊपर से यह बोझ आ गया। देश की जनता बढ़ती महंगाई से मर रही है। किसान कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर रहे हैं।  हर दिन पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन कुछ उपाय नहीं निकल पा रहा है।

आखिर निकलेगा भी कैसे ? जब जनसेवक और जनता के प्रतिनिधियों को यही सब मुफ्त में मिल रहा है, इसके बाद 1 लाख रुपए महीना अलग से तो कोई क्यों आम जनता की परेशानियों की सुध लेगा। केंद्र सरकार विधायकों और मंत्रियों की सैलरी में हुई बढ़ोतरी के बाद गुजरात सरकार को करीब साढ़े छह करोड़ रुपए का एरियर देगी। इस वेतन बढ़ोतरी से सरकारी तिजोरी पर 10 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसका सीधा सा अर्थ है कि यदि सरकार की तिजोरी पर बोझ बढ़ा तो आम जनता की जेब पर भी बोझ बढ़ेगा।

प्रजातंत्र में विधायक चुनने की परपंरा इसलिए शुरू की गई थी कि वे अपने-अपने क्षेत्र के विकास एवं समस्याओं को प्राथमिकता देंगे, लेकिन अब ये मायने बदल गए हैं। विधायक रहते हुए तो ऐश है ही ,विधायक न रहने के बाद भी सरकार इन पर मेहरबान है। प्रतिमाह 6000 रुपए पेंशन,  3000 रुपए मेडिकल भत्ता, अपने एक साथी के साथ अनलिमिटेड रेल यात्रा, वो भी एसी कोच में। भला कोई भी आम आदमी अब क्यों मंत्री या विधायक नहीं बनना चाहेगा। विधायकों ने इतना धन कमा लिया है कि वे पुनः विधायक बनने के लिए जमकर रुपए लुटाने को तैयार दिख रहे हैं।

-हर्षवर्धन पाराशर

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