गांधी के समकक्ष मोदी

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नेहरु स्टेडियम के मंच से प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में जो कहा उसे पचा पाना भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के लिए तो बहुत मुश्किल ही होगा।अपने भाषण में गांधी और मोदी इन दोनों को महापुरुष बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी को देखा नहीं, उन्हें पढ़ा ही है । जिस तरह गांधी जी आह्वान करते थे अंग्रेज़ी कपड़ों की होली जलाओ, नमक सत्याग्रह के लिए दांडी यात्रा निकालते, देशवासियों को एकजुट कर अंग्रेज़ों भारत छोड़ो का नारा देते और लोग उनके पीछे चल पड़ते थे वैसे ही मोदी जी ऐसे दूसरे महापुरुष हैं जिनके आह्वान का देश पालन करता है। रसोई गैस सब्सिडी छोड़ने का आह्वान किया तो देश सहमत हुआ। योग करो का आह्वान किया तो विश्व में योग की धूम मच गई। स्वच्छता अभियान के लिए कहा तो पूरा देश झाड़ू लेकर निकल पड़ा।मोदीजी देश ही नहीं दुनिया के लोकप्रिय और शक्तिशाली नेता हैं।

श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर शिवराज सिंह का गांधी जितना मोदी को भी महापुरुष बताना अगले कुछ दिनों में मीडिया और कांग्रेस सहित अन्य दलों में बहस का मुद्दा बनना तय है।यह इसलिए भी मुद्दा बनेगा कि इन्हीं चार वर्षों में गांधी की स्वीकार्यता को सोशल मीडिया से लेकर भाजपा के मंचों पर सर्वाधिक नकारा गया है। यही नहीं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय तो एकाधिकार बार ‘दे दी हमें आज़ादी, बिना खड़ग बिना ढाल..’ गीत में महात्मा गांधी के अतिरंजित महिमामंडन की निंदा करने के साथ ही देश के बँटवारे के लिए राष्ट्रपिता को ही दोषी ठहराते रहे हैं।

यह बात भी सर्वविदित है कि मोदी ने देश से जो स्वच्छाग्रह का आह्वान। किया है वह गांधी जी के सत्याग्रह से ही प्रेरित है।स्वच्छता संबंधी जो पुरस्कार दिए जाते हैं उसमें प्रमाणपत्र के साथ राष्ट्रपिता की प्रतिमा दी जाती है। यही नहीं स्वच्छ भारत अभियान के लोगो का प्रतीक भी गांधी चश्मा ही है।

-कीर्ति राणा 

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं )

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