कुछ पल प्रकृति के लिए, सुनहरे कल के लिए…

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आज विश्व पर्यावरण दिवस है| यह दिवस मनाने की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हों| लोगों को इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि प्रकृति का संरक्षण ही हमारे और हमारी आने वाली पीढ़ी के सुनहरे भविष्य का आधार है| आज कई संगठनों द्वारा कई आयोजन करवाए जा रहे हैं, लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन क्या प्रकृति के लिए सिर्फ एक दिन देना पर्याप्त है? क्या सिर्फ एक दिन के प्रयास से हम पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं?

नहीं…एक दिन नहीं आपके प्रतिदिन का एक पल ही काफी है पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए| जी हां, आपके कुछ पल आपके और आने वाली पीढ़ी के सुनहरे भविष्य का आधार बन सकते हैं| प्रकृति से हमें बहुत कुछ मिला है, हमें भी प्रकृति का स्वभाव अपनाते हुए बिना किसी लोभ-लालच के पर्यावरण के लिए कुछ पल निकालना चाहिए|

आपका पहला कदम कई लोगों के लिए मिसाल बन सकता है| जरूरत है तो सिर्फ आगे आकर कुछ करने की| आज इंसान सिर्फ अपने फायदे के लिए प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहा है, पर ज़रा सोचिए कि यदि आप किसी की नि:स्वार्थ भावना से मदद करें और वह आपका नुकसान करे तो आप कितने दुखी होंगे| पर्यावरण हमारे जीने का आधार है|

कहते हैं ‘अति सर्वत्र वर्जयेत’ यानी किसी भी चीज की अति हानिकारक होती है, वैसे ही यदि प्रकृति की भी सहने की सीमा ख़त्म हो गई हो तो इंसान को पतन की गर्त में समाने से कोई नहीं रोक सकता, तब संसार का विनाश निश्चित होगा इसलिए हमें हमारे अपनों की तरह पर्यावरण का भी ख्याल रखना चाहिए| पेड़ लगाने चाहिए, कुछ पल निकालकर उनका ध्यान रखना चाहिए, जितना हो सकता हो पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कार्य करना चाहिए| जब हम प्रकृति को अपना समझकर ध्यान रखेंगे तो हम असीम शांति का अनुभव कर सकते हैं|

सुनहरे कल के लिए सिंचाई जरूरी है, चाहे वह बच्चों की गुणों से हो या पौधों की पानी से…|

–  रंजीता पठारे

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