मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री कभी पेशे से…

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मध्यप्रदेश पर कई मंत्रियों ने राज किया, किसी ने कुछ दिन, किसी ने कुछ महीनों तो कइयों ने अपना पूरा कार्यकाल मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश के विकास में अपना योगदान दिया| प्रदेश के जैसे कई रंग हैं, वैसे ही यहां की राजनीति के भी कई रंग हैं| मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री भी कुछ ही समय तक अपने पद पर रहे| प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पहले मास्टर साहब बने, फिर वकील और फिर राजनीति में आए और जेल जाना पड़ा, जेल से लौटकर उन्हें सबसे बड़ी कमान मिली और सूबे के मुख्यमंत्री बन गए | आज प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री की पुण्यतिथि (Ravishankar Shukla Death Anniversary 2018) पर जानते हैं उनके बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य|

एक आम परिवार में जन्म लेने वाले पंडित रविशंकर शुक्ल (Ravishankar Shukla Death Anniversary 2018) का जीवन आम नहीं था| उनका जन्म ब्रिटिशकालीन भारत में 2 अगस्त, 1877 ई. में सीपी और बेरार के सागर शहर में हुआ था| इनके पिता  पंडित जगन्नाथ शुक्ल और माता तुलसी देवी थीं| परिवार में शिक्षा का महत्व था इसलिए वे शिक्षक बन गए, लेकिन उनके भाग्य में कुछ बड़ा मुकाम लिखा था तो उन्होंने वकील बनने पर विचार किया, वकालत उनके जीवन के लिए मील का पत्थर साबित हुईं| वैसे तो उनका पूरा जीवन रायपुर के आसपास ही बीता, लेकिन वे वकालत का ज्ञान हासिल करने के लिए नागपुर गए| नागपुर में वे कांग्रेस के संपर्क में आए और कई नेताओं से पहचान हुई|

प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री नियमों के बड़े पाबंद थे| वे सभी कार्यों को समय पर पूर्ण करने से साथ ही काम को नए और अच्छे तरीके से भी करते थे| ऐसा कहा जाता है कि वे एक बार अंग्रेजों से ऐसे भिड़े कि उनकी पूरे शहर में परेड निकाल दी गई| दरअसल, वर्ष 1918 में रविशंकर शुक्ल ने अपने सहयोगी बामनराव के साथ मिलकर कांग्रेस का एक कार्यक्रम आयोजित करवाया, जिसमें टिकट लेकर ही प्रवेश मिल रहा था, लेकिन उस कार्यक्रम में एक अंग्रेज अधिकारी बिना टिकट के ही पहुंच गया| शुक्ल ने अधिकारी को नियमों के बारे में बताकर उसे प्रवेश करने से रोका| इस घटना से अंग्रेज अधिकारी इतना गुस्सा हुआ कि उसने शुक्ल और वामनराव दोनों को हथकड़ी पहनाकर पूरे शहर में घुमाया|

अंग्रेजों से बैर और कांग्रेस से मित्रता यही वह कारण बना, जिससे एक आम परिवार में जन्मे शुक्ल मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने| वे 1 नवम्बर , 1956 को प्रथम मुख्यमंत्री नियुक्त हुए| उन्हें नए मध्यप्रदेश के पुरोधा के रूप में भी याद किया जाता है| वे 31 दिसंबर 1956 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर रहे| 31 दिसंबर को उनका निधन हो गया था|

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