अटलजी विशेष : हमेशा यादों में अटल रहेंगे

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने इस वर्ष दुनिया से अलविदा कह दिया था| आज वे हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके द्वारा कही गईं बातें आज देशवासियों के ज़ेहन में हैं| आज यानी 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन ( Atal Bihari Vajpayee 94th Birth Anniversary ) है| देश के पूर्व प्रधानमंत्री का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था| उनके जन्मदिन के मौके पर आज हम आपको उनसे जुड़े कुछ ख़ास किस्से बताने जा रहे हैं|

अटल बिहारी वाजपेयी का मंदिर

भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी का देश में एक मंदिर भी है, जिसके बारे में शायद कम ही लोग जानते हैं| मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में अटलजी का मंदिर है, जहां हर सुबह शाम आरती और भजन किए जाते हैं| अटल बिहारी वाजपेयी का मंदिर ग्वालियर शहर में सत्यनारायण की टेकरी क्षेत्र में हिन्दी माता मंदिर के करीब है| ग्वालियर अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मस्थली रही है| यहां उन्होंने न केवल पत्रकारिता बल्कि राजनीति का ककहरा भी सीखा है|

ग्वालियर के विजयसिंह चौहान अटलजी के इतने बड़े प्रशंसकों में से हैं कि उन्होंने उनका एक मंदिर ही बना दिया| इस मंदिर में अटल बिहारी की प्रतिमा नहीं बल्कि एक तस्वीर रखी गई है| मंदिर बनाने वाले विजयसिंह का मानना है कि अटलजी भगवान नहीं बल्कि हिंदी के संत है इसलिए सत्यनारायण के टेकरी क्षेत्र में हिन्दी माता मंदिर के करीब ही अटल बिहारी वाजपेयी का मंदिर बनवाया गया| यह मंदिर 2005 में बनाया गया था| अटलजी के जन्मदिन के मौके पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है|

विरोधी भी थे अटल बिहारी वाजपेयी के मुरीद

अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे नेता थे, जिन्हें विपक्ष भी काफी ज्यादा पसंद करता था| अटल बिहारी वाजपेयी को एक ऐसे नेता के तौर पर याद किया जाएगा, जिन्होंने विपरीत विचारधारा के लोगों को भी साथ लिया और गठबंधन सरकार बनाई| विपक्षी पार्टियों के नेताओं की वे आलोचना तो करते ही थे साथ ही अपनी आलोचना सुनने का भी साहस रखते थे| ऐसे में विरोधी भी उनकी बात को शांतिपूर्वक सुनते थे|

हिंदी से था ख़ास लगाव

अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी को विश्वस्तर पर पहचान दिलाने के लिए काफी प्रयास किए| वह वर्ष 1977 में जनता सरकार में विदेश मंत्री थे| संयुक्त राष्ट्र संघ में उनके द्वारा दिया गया हिंदी में भाषण उस समय काफी लोकप्रिय हुआ था| उनके द्वारा हिंदी के चुने हुए शब्दों का ही असर था कि यूएन के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर वाजपेयी के लिए तालियां बजाईं थीं| इसके बाद कई बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अटलजी ने हिंदी में दुनिया को संबोधित किया|

नेता के साथ एक अच्छे कवि थे अटल

अटलजी के दिल में एक राजनेता से कहीं ज्यादा एक कवि बसता था| लोग उनकी कविताओं को काफी ज्यादा पसंद करते थे| हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं… उनकी लोकप्रिय कविताओं में से एक है| संसद से लेकर जनसभाओं तक में वे अक्सर कविता पाठ के मूड में आ जाते थे|

अटल बिहारी वाजपेयी की कविता

कदम मिलाकर चलना होगा

बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा|
कदम मिलाकर चलना होगा|

हास्य-रूदन में, तूफानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा|
कदम मिलाकर चलना होगा|

उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा|
कदम मिलाकर चलना होगा|

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढलना होगा|
कदम मिलाकर चलना होगा|

कुछ कांटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा|
क़दम मिलाकर चलना होगा|

अटलजी का भाषण

अब कांग्रेस के अटलजी

एक मंदिर भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का

काल के कपाल पर …

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