ऊंची इमारतों की नीव में दफ़न होती उपजाऊ भूमि

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ऊंची ऊंची बिल्डिंग’स , शानदार इमारतें, भव्य बंगले, खूबसूरत फ्लैट्स और एक प्यारा सा घर इसके आलावा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट, सड़क, पुल, रियल स्टेट प्रोजेक्ट, इंडस्ट्रियल डेवलोपमेन्ट ,सरकारी और निजी निर्माण ने आज भारत की तस्वीर को बेहद खूबसूरत बना दिया है. आसमान छूती इमारतें बढ़ते भारत की परिभाषा बन गई है. आधुनिकता की दौड़ में भारत लगातार अग्रसर है. विकास की दौड़ अब शहरों से लेकर गाँवो तक पहुंच गई है. आजादी के सात दशक में भारत का चेहरा बदल गया है. आज भारत की वैश्विक छवि विकासशील देशों की फहरिस्त में  बेहद रोशन कही जा सकती . मगर इस अंध विकास के पीछे के विनाश को भी नाकारा नहीं जा सकता. विकास के नाम पर प्रकृति से छेड़छाड़ और पृथ्वी, हवा, पानी के मूल स्वरुप में इंसानी दखल आने वाले खतरे का एलान कर चूका है. भूकंप, तूफान, सुखा और बाढ के बाद कोरोना इसका ताजा उदाहारण है. 

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वैज्ञानिक और पर्यावरणविद कई सालों पहले ही इस बात से आगाह कर चुके है. मगर इसे नजरअंदाज करते हुए विश्व के साथ साथ भारत में लगातार आधुनिकता की ओर भागने की रफ्तार और बढ़ती जा रही है और इसी के चलते बढ़ते शहरीकरण का सबसे ज्यादा दबाव कृषि भूमि पर पड़ रहा है. हर साल हजारों हेक्टेयर जमीं को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट, सड़क, पुल, रियल स्टेट प्रोजेक्ट, इंडस्ट्रियल डेवलोपमेन्ट ,सरकारी और निजी निर्माण के नाम पर निगला जा रहा है. शहरों के साथ साथ ग्रामीण इलाको में भी कृषि भूमि पर भवन निर्माण का प्रचलन सा चल गया है जो लगातार कृषि भूमि को अपने आगोश में ले रहा है. शहरों ओर गाँवो के बाहर आते ही निर्माण कार्य में लगे विशालकाय उपकरण और बहुमंजिला इमारतों का निर्माण कार्य का दृश्य अब आम हो चला है. कल तक जहा फसल लहलहा रही थी वहां आज बाउंड्रीवाल बन कर तैयार है और परसो वहां एक ईमारत खड़ी होगी जो किसी नामी रियल रियल स्टेट कंपनी के मालिक का सपना भी हो सकती है.

Buying a house under construction is also beneficial ...

बढ़ती जनसँख्या, खाद्यान्न की आपूर्ति की मांग, अनावृष्टि, अतिवृष्टि,और उपजाऊ जमीन का लगातार घटना मामले को और गंभीर बना रहा है. यह तो बात हुई त्वरित दुष्परिणामों की. मगर इसके दूरगामी परिणाम और अधिक भयावह है. जाने अनजाने ये कृत्य जल- थल- वायु प्रदुषण, ग्लोबल वार्मिंग,और इनसे जनित असाध्य बीमारियों के प्रमुख कारण है. परिस्थितियां इस कदर बिगड़ गई है की धरती पर हुई इस विनाश लीला ने ब्रह्माण्ड तक को दूषित कर ओजोन तक को छेद दिया है. हिमालय की सबसे ऊंची चोटी अब मानव निर्मित गर्मी से हर साल पिघल कर समुद्र के जल स्तर को बढ़ा रही है. इंच इंच सरकता विनाश सम्पूर्ण मानव जाति को लील लेने को आतुर है. मगर 21 वी सदी की तेज रफ्तार दुनिया के साथ बने रहने के लिए भारत इस विनाश को विकास का नाम देकर जान बूझकर आँख मूंदे आगे बढ़ रहा है ..

खेतिहर मजदूरों की संख्या बढ़ी और ...

 

 

 

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