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एक्ज़िट पोल का मार्केट या मार्केट का एक्ज़िट पोल

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चुनाव के कई सारे कारक यानी फैक्टर होते हैं। ये कई बातों पर निर्भर करते हैं और अर्थव्यवस्था का एक बड़ा भाग इसमें शामिल होता है इसलिए चुनाव का आकलन अर्थव्यवस्था के पक्ष से भी करना ज़रूरी हो जाता है। इस बार के लोकसभा चुनाव के परिणाम कई बातों को निर्धारित करेंगे। इनमें से ही एक पहलू है बाज़ार यानी मार्केट।

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क्या वाकई इस बार का चुनाव बाज़ार को निर्धारित करने के लिए है या फिर बाज़ार के कुछ पूंजीपति मिलकर इस चुनाव को चला रहे  थे, इस बात की पहल भी की जानी चाहिए।

जैसे ही देश के लोकसभा चुनाव का सातवां चरण संपन्न हुआ, विभिन्न मीडिया हाउस ने देश के नतीजे एक्जिट पोल के रूप में जारी किए। हालांकि यह केवल एक अनुमान मात्र है, जिसके एक निश्चित क्षेत्र के सैंपल लेकर जारी किया गया, लेकिन फिर भी काफी हद तक लोग इन एक्जिट पोल से प्रभावित हुए।

इन एक्जिट पोल में सभी एजेंसियों और समाचार चैनलों ने एनडीए को बहुमत दिया और कम से कम 277और अधिकतम 340 सीटें तक दीं। इसके बाद दूसरे दिन इन एक्जिट पोल का प्रभाव बाज़ार पर भी देखने को मिला।

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सोमवार को सेंसेक्स 39,352 तक पहुंचा। वहीं निफ्टी 11,828 तक गया। दोनों सूचकांक में क्रमशः 1422 और 421 अंकों की बढ़त देखी गई। इससे मार्केट कैपिटल भी लगभग 2.79 लाख करोड़ तक बढ़ा।

सोमवार को अधिकांश लोगों की नज़र बाज़ार पर थी। माना जा रहा है कि एक्जिट पोल के आने के बाद देश में जिस तरह से एक बार फिर मोदी सरकार के आने की सूचना दी गई है, उसका बाज़ार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है, लेकिन इससे उलट भी एक बदलाव हुआ, जिस पर किसी की नज़र नहीं गई।

सोमवार से पहले शुक्रवार को जब बाज़ार बंद हुआ, उस पर किसी का ध्यान नहीं गया। शुक्रवार को सेंसेक्स 37,930 और निफ्टी 11,407 पर बंद हुए थे। इस दिन भी मार्केट तेज़ी से उपर गया था। इससे यह साफ होता है कि बाज़ार से जुड़ा हुआ एक धड़ा ऐसा भी था, जिस तक शायद एक्ज़िट पोल की सूचना पहले से ही पहुंच गई थी। इसमें मीडिया घरानों के मालिक, मीडिया जगत से जुड़े कुछ बड़े नाम, नेता और ट्रेडर भी हो सकते हैं, जिन्हें एक्जिट पोल की जानकारी शायद पहले से ही होगी।

जिस तरह से देश में छह चरण के चुनाव संपन्न हो चुके थे, उस समय मीडिया ने एक्ज़िट पोल तो पहले से ही निकालकर रख लिए होंगे। उसके बाद केवल सातवें चरण के आंकड़ों को ही उनमें शामिल करना शेष रहा होगा, लेकिन मोटे-मोटे तौर पर यह साफ हो गया होगा कि एक्जिट पोल के नतीजे इशारा किस ओर कर रहे हैं।

इस कारण शुक्रवार को जिन शेयरों की खरीदारी हुई, उनमें शायद इस व्यवसाय या इससे जुड़े लोगों ने बाज़ार में इन शेयरों को खरीदा होगा, जिससे बाज़ार ऊपर गया।

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अब जबकि सोमवार को बाज़ार खुला तो वह खुला ही बढ़कर। जैसे, जो शेयर शुक्रवार को 100 रुपए पर बंद हुआ होगा वह सोमवार को 120 रुपए से खुला यानी शुक्रवार को शेयर खरीदने वाले उपभोक्ता को वह सीधे 20 रुपए का फायदा दे गया जबकि सोमवार को बाज़ार बंद होने तक उस शेयर की कीमत और भी बढ़ गई थी। इस कारण सोमवार सुबह भी जिन लोगों ने शेयर खरीदे, उन्हें भी फायदा हुआ, लेकिन वह फायदा शुक्रवार वालों के मुकाबले कम ही था।

ऐसे में अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या वाकई एक्ज़िट पोल, जो कि बड़ी सर्वे कंपनियों द्वारा किए जाते हैं, बाज़ार को फायदा पहुंचाने का भी काम कर रहे हैं? यदि इस बारे में सोचा जाएगा तो शायद जवाब हां में ही हो।

सरकार बनने के बाद क्या स्थिति होगी

एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि बाज़ार तो सरकार के बनने से ऊपर नीचे जाएगा। यदि पीएम मोदी की सरकार दोबारा बनती है तो बाज़ार का उपर जाना तय है, लेकिन इसके बाद की स्थिति क्या होगी?

– क्या वाकई बाज़ार स्थिर होगा?

– क्या सरकारी योजनाएं वास्तविक धरातल पर उतर पाएंगी?

– क्या बैंकों की ब्याज़ दरें कम होंगी?

– देश की औद्योगिक विकास दर बढ़ पाएगी?

– क्या रोजगार के क्षेत्र में बीते 45 सालों की तुलना मंे स्थिती सुधरेगी?

– क्या जीएसटी की दरों में कटौती के साथ व्यापार सुलभ होगा?

इन बातों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

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