विश्वगुरु होने का सपना

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बड़े-बड़े साधु-संत जो काम नहीं कर पाते, वह काम दिल्ली के कुछ पुलिसवालों ने कर दिखाया। उन्होंने संगम विहार के 56 अवैध शराब विक्रेताओं में से 51 विक्रेताओं से संकल्प करवा लिया कि वे इस काले धंधे को बंद कर देंगे। उन्होंने सिर्फ वैसा कहा ही नहीं। वैसा कर दिखाया। हीरादेवी के घर के दरवाजे पर ठर्रा खरीदनेवालों की लाइन लगी रहती थी। अब उनके दरवाजे पर लिखा हुआ है- ”यहां अब शराब नहीं बिकती है। सिर्फ दूध बिकता है। कृपया शराब न मांगें।”

हीरादेवी की तरह अन्य लोगों में से कुछ ने सब्जियों के ठेले लगा लिये हैं, कुछ ने किराने की दुकान लगाई हैं, कुछ चड्डी-बनियान-मौजे बेचने लगे हैं, कुछ ढाबा खोलने की फिराक में हैं और कुछ टेंट-हाउस के जुगाड़ में लगे हुए हैं। इस तरह जो संगम विहार कल तक ठर्रेबाजी का एक बड़ा अड्डा बन गया था, अब अपनी पुरानी बदनामी को धो रहा है।

पुलिस को यह सफलता सेंत-मेंत में नहीं मिली है। उसने 42 अवैध शराब विक्रेताओं को गिरफ्तार किया और 6000 शराब की बोतलें बरामद कीं। मुकदमे चलाए लेकिन मुकदमों में शायद ही किसी को सजा मिली। पुलिस पर इन लोगों ने हमला किया, औरतें नंगी हो गईं, भीड़ टूट पड़ी, पत्थरबाजी हुई लेकिन पुलिस डरी नहीं। उसने बड़ी संख्या में हथियारबंद होकर छापे मारे। उन्होंने घर—घर जाकर लोगों को समझाया।

आखिरकार सोमवार को 5-6 लोगों के अलावा सभी शराब-विक्रेता थाने में इकट्ठे हुए और सब ने इस धंधे को त्यागने का संकल्प ले लिया। यदि वे सचमुच अपने संकल्प पर अमल कर सके तो वे लाखों लोगों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत बनेंगे। संगम-विहार थाने के पुलिसकर्मी भी प्रशंसा और पुरस्कार के पात्र हैं। इस तरह की कोशिशें सारे देश में होनी चाहिए और इससे भी बढ़कर होनी चाहिए। शराब विक्रेताओं से ही नहीं, शराब पीनेवालों से भी संकल्प करवाया जाना चाहिए।

यदि भारत के सारे साधु-संत, मुल्ला-मौलवी, पादरी-ग्रंथी और नेतागण इस अभियान में शामिल हो जाएं तो भारत एक नशामुक्त राष्ट्र बन सकता है। आज दुनिया में एक राष्ट्र भी ऐसा नहीं है, जो नशामुक्त और मांसाहार-मुक्त हो। यदि भारत वैसा बन जाए तो इसे विश्व-गुरु कौन नहीं कहेगा ?

-वेदप्रताप वैदिक

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार हैं)

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