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गांधीजी की ह्त्या के मुकदमे के दौरान यह थी गोडसे की सफाई

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नाथूराम गोडसे इन दिनों राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए है | कमल हासन ने उन्हें हिन्दू आतंकवादी बताकर जो तार छेड़ दिया था, उसे भोपाल की भाजपा प्रत्याशी उषा ठाकुर ने और झंकृत कर दिया था, जब उन्होंने उसे देशभक्त बता दिया था| इसके बाद सभी दूर बवाल सा मच गया है| हम आपको बताएंगे कि जब नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse’s defence) पर गांधीजी की ह्त्या का मुकदमा चल रहा था, तब उन्होंने अपनी सफाई में क्या वक्तव्य दिया था| उन्होंने इसमें गांधीजी की ह्त्या के कारण (Mahatma Gandhi Death Reason) बताए थे|

ममता आखिर इतनी निर्मम क्यों ?

दरअसल, गांधीजी की हत्या के मुकदमे के दौरान न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं (Nathuram Godse’s defence) पढ़कर सुनाने की अनुमति मांगी थी और उसे यह अनुमति मिली थी| बाद में गोडसे का यह वक्तव्य भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था, परंतु बाद में उस प्रतिबंध के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गांधीजी की हत्या के सह-अभियुक्त गोपाल गोडसे ने 60 वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी और बाद में उच्च न्यायालय ने उस प्रतिबंध को हटा दिया|

गोडसे ने गांधीजी की हत्या का जो भी कारण बताया है, सरकार ने (Nathuram Godse’s defence) किसी भी कारण को उचित नहीं ठहराया है| कुछ कारण निम्नलिखित है|

Mahatma Gandhi Death Reason : 

# अमृतसर के जलियांवाला बाग़ गोलीकांड (1919) में लोग चाहते थे कि जनरल डायर पर अभियोग (case) चलाया जाए और गांधीजी ने इस बात को मानने से मना कर दिया|

#  जब भगतसिंह को फांसी दी जा रही थी, तब दुनिया गांधीजी की तरफ देख रही थी कि शायद गांधीजी कुछ हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को बचा सकते हैं, परंतु गांधीजी ने भगतसिंह की हिंसा को अनुचित ठहराया और मना कर दिया|

6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को दिए गए अपने सम्बोधन में गांधी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी|

देश के लिए तोड़ी मूर्ति

मोह्म्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा किया और खिलाफत आंदोलन जारी किया| केरल में मुसलमानों द्वारा 1500 हिन्दुओं को मार दिया गया और 2000 को मुसलमान बना लिया| गांधीजी ने इसका विरोध नहीं किया, बल्कि खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया|  (Nathuram Godse’s defence)

#  गांधीजी ने अनेक अवसरों पर शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरु गोविन्दसिंहजी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा|

#  सन् 1926 में स्वामी श्रद्धानंद ने आर्य समाज में शुद्धि आन्दोलन चलाया और उस समय उनकी अब्दुल नामक व्यक्ति ने हत्या कर दी| यह जानने के बाद भी गांधीजी ने रशीद को अपना भाई कहा और रशीद के इस काम को सही माना|

गांधीजी ने कश्मीर के राजा हरीसिंह को कश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने और काशी जाकर प्रायश्चित करने के लिए कहा और हैदराबाद में निजाम के शासन का हिन्दू बहुल हैदराबाद में समर्थन किया|

# गांधी ने ही मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आजम की उपाधि दी थी|

# कांग्रेस के ध्वज (झंडे) बनाने के लिए बनी समिति ने (1931) भगवा कपड़े पर चरखे का चिन्ह रखा था, लेकिन गाँधीजी ने जिद करके झंडे का रंग तिरंगा रखा|  (Nathuram Godse’s defence)

#  कांग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को कांग्रेस अध्यक्ष चुन लिया, लेकिन गांधीजी ने पट्टाभि सीतारमैया का सही मना| आखिर में लगातार उनके खिलाफ और बिना किसी के सहयोग के वो पद भी त्याग दिया|

गोडसे : कमल हासन को माफ करें  

# लाहौर में कांग्रेस चुनाव में वल्लभभाई पटेल को सबसे ज्यादा बहुमत मिला, मगर गांधीजी की जिद के कारण जवाहरलाल नेहरू को प्रथम प्रधानमंत्री बनाया गया|

# 14-15 जून 1947 को दिल्ली में भारतीय अखिल कांग्रेस समिति में भारत का विभाजन का फैसला मना होने वाला था, लेकिन गांधीजी ने वहां पहुंचकर उस फैसले का समर्थन किया जबकि गांधी ने कहा था कि भारत का विभाजन उनकी लाश पर होगा|

# सोमनाथ मंदिर का सरकारी खर्च पर दोबारा बनाया जाना था| मंत्रिमंडल की अध्यक्षता जवाहर लाल नेहरु के हाथ थी| गांधीजी तो मंत्रिमंडल के सदस्य भी नहीं थे उन्होंने इस प्रस्ताव को मना करवाया और 13 जनवरी 1948  को आमरण अनशन पर बैठ कर मस्जिदों का पुनर्निर्माण करने के लिए दबाव डाला|  (Nathuram Godse’s defence)

#  गांधीजी ने पाकिस्तान से आए हिन्दुओं को, जो  दिल्ली की खाली मस्जिदों में शरण लेने के लिए आए थे, उनके पास रहने के लिए जगह भी नहीं थी, तब गांधीजी ने उस स्थिति में उन हिन्दुओं को शीत लहर में ठिठुरते हुए बाहर खदेड़ भगाया जबकि उनमे बच्चे बूढ़े स्त्रियाँ सभी शामिल थे| उन हिन्दुओं को ठण्ड में बाहर रात बितानी पड़ी थी|

# 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान के आक्रमण करने के बावजूद भी बची हुई राशि, जो हिंदुस्तान द्वारा पाकिस्तान को दी जानी थी | गांधीजी चाहते थे कि यह राशि उन्हें दी जाए और अपनी बात मनवाने के लिए हर बार की तरह अनशन पर बैठ जाते थे|  (Nathuram Godse’s defence)

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