मोदी सरकार का सपना हो रहा सच

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नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश को कैशलेस बनाने का जो सपना देखा था, वह पूरा होता नजर आ रहा है| रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा ज़ारी रिपोर्ट्स की माने तो देश बड़ी तेजी से ऑनलाइन और कैशलेस ट्रांजेक्शन की ओर बढ़ रहा है|

नोटबंदी को डेढ़ साल हो चुका है| नोटबंदी को लेकर तरह-तरह की बातें हुई, विवाद हुए| किसी को इससे परेशानी का सामना करना पड़ा तो कुछ लोगों ने इसे अच्छा कदम बताया| आंकड़ों की माने तो इन तीन सालों में कैशलेस ट्रांजेक्शन में लगभग 60 फीसदी का इजाफा हुआ| इसमें सबसे ज्यादा डेबिट और क्रेडिट कार्ड का यूज़ हुआ है| इससे यह तो साफ़ है कि नोटबंदी के बाद लोगों का रुझान डिजिटल लेनदेन की ओर बढ़ा है|

आरबीआई की रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोदी सरकार के लिए अच्छी खबर यह है कि नवंबर के बाद से लगातार इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रांजेक्‍शन बढ़ा है| इससे सरकार के कैशलेस इकोनॉमी बनाने के सपने को भी बल मिला है| रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2018 में 109 करोड़ 80 लाख इलेक्‍ट्रॉनिक पेमेंट ट्रांजेक्‍शन हुए हैं| नवंबर 2016 में 67 करोड़ 15 लाख ट्रांजेक्‍शन हुए थे| हालांकि, जनवरी 2018 में रिकॉर्ड 112 करोड़ 23 लाख ट्रांजेक्‍श्‍ान हुए थे|

डेबिट और क्रेडिट कार्ड के साथ-साथ यूपीआई ट्रांजेक्‍श्‍ान भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं| सरकार ने नोटबंदी के बाद यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस (UPI) की शुरुआत की थी| इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार ने भीम एप भी लॉन्च किया| साथ ही सभी बैंकों को मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग को इससे जोड़ा| यूपीआई के चलन का असर अब पूरी तरह दिख रहा है|

RBI के मुताबिक, नवंबर 2016 में लगभग 3 लाख ट्रांजेक्‍श्‍ान यूपीआई से हुई थीं, वहीं मार्च 2018 में यह बढ़कर 15 करोड़ 17 लाख तक पहुंच गई हैं| देश में एप और वॉलेट से लेन-देन भी बढ़ रहा है| संसद की वित्त स्थायी समिति को सौंपी गई एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि UPI-BHIM, आईएमपीएस, एम-वॉलेट और डेबिट कार्ड के जरिये लोग पहले से ज्यादा डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं|

प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के दौरान कहा था कि देश को कैशलेस इकोनॉमी की ओर ले जाना ही सरकार का सपना है और वित्तमंत्री ने भी बार-बार इस बात का जिक्र किया और आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट से मोदी सरकार के इस सपने को बल मिलता दिख रहा है|

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