CBI Vs Mamata Banerjee : ममता की नौटंकी का समापन

0

सर्वोच्च न्यायालय ने कोलकाता में चल रहे बड़े नाटक का पटाक्षेप कर दिया है। उसने केंद्र और पश्चिम बंगाल (West Bengal) सरकार दोनों को ठंडा कर दिया है। उसने फैसला दिया है कि कलकत्ता के पुलिस आयुक्त (Kolkata Police Force) को गिरफ्तार न किया जाए और वह सीबीआई के सामने पेश हो। अब भी यदि ममता बनर्जी अपना धरना (Mamata Banerjee Dharna) जारी रखेंगी तो वे अपना मज़ाक खुद बनाएंगी। इससे बड़ा राजनीतिक मज़ाक क्या हो सकता है कि कोई मुख्यमंत्री अपने एक पुलिस अफसर की खातिर धरना लगाकर बैठ जाए ? और ऐसे धरने को लगभग सभी प्रमुख विरोधी दल (मार्क्सवादी पार्टी के अलावा) अपना समर्थन दे दें। वह कांग्रेस भी दे दे, जिसकी पश्चिम बंगाल शाखा उसका तीखा विरोध कर रही है।

राम मंदिर : बहानेबाजी

पुलिस आयुक्त राजीवकुमार (Rajeev Kumar) ऐसे कौन-से महापुरुष हैं, जिनकी खातिर ममता जैसी अहंकारी नेता धरना देने बैठ जाए ? इस अफसर के बारे में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को संदेह है कि इसने शारदा चिट फंड मामले में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को बचाने की कोशिश की है और उनके विरुद्ध मिले प्रमाणों को वह नष्ट करने पर आमादा है। शारदा चिट फंड (Saradha Chit Fund Scam) में 40,000 करोड़ रु. का घपला हुआ है। यह पैसा 17 लाख लोगों का है। पांच साल पहले जब इस फंड की धोखाधड़ी उजागर हुई तो मालूम पड़ा था कि इस चिट फंड को चलाने में ममता की तृणमूल कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं का हाथ है। वे सांसद भी हैं।

तालिबानः भारत सोया हुआ क्यों ?

कई फिल्मी सितारों, पत्रकारों और अफसरों ने भी गरीबों की इस गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ करने में ज़रा भी झिझक नहीं दिखाई है। दो-तीन तृणमूल नेता अपनी खाल बचाने के लिए भाजपा की शरण में भी चले गए हैं। दो साल पहले से सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशन में सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन कई नोटिसों के बावजूद कलकत्ता के पुलिस आयुक्त राजीवकुमार जांच से बचने के लिए बहाने बनाते रहे। अब जबकि सीबीआई (CBI) के अफसर उनके घर पहुंचे तो ममता सरकार की पुलिस ने उन्हें पकड़कर थाने में बिठा लिया। वे खुद धरने पर बैठ गईं। संसद को ठप कर दिया।

मोदी के उपहारों की नीलामी

सारे विपक्ष ने मिलकर इस मामले का पूर्ण राजनीतिकरण कर दिया। इसमें शक नहीं कि अब इस चुनाव की बेला में मोदी सरकार पर एक जुनून सवार हो गया है। वह लगभग सभी विरोधी नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों को किसी न किसी मामले में फंसाती हुई लग रही है। यही काम वह चार साल पहले करती तो उसकी मंशा पर कोई अंगुली नहीं उठाता। पिछले साढ़े चार साल उसने भाषणबाजी और नौटंकियों में गुज़ार दिए।

अब उसके सही काम पर भी उसको इसका श्रेय मिलना मुश्किल है बल्कि डर यह है कि यदि अब उसने भूपेन्द्र हुड्डा या मायावती या अखिलेश या शीला दीक्षित या यहां तक कि रॉबर्ट वाड्रा को भी अंदर करवा दिया तो उसका उल्टा असर पड़ सकता है। चुनाव की बेला में उसने पं. बंगाल, कर्नाटक और विरोधी हिंदी राज्यों में यदि किसी सही कारण से भी उसकी सरकारें बर्खास्त कर दीं तो वह अपना ही नुकसान करेगी।

-डॉ.वेदप्रताप वैदिक

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार हैं)

रहें हर खबर से अपडेट, ‘टैलेंटेड इंडिया’ के साथ| आपको यहां मिलेंगी सभी विषयों की खबरें, सबसे पहले| अपने मोबाइल पर खबरें पाने के लिए आज ही डाउनलोड करें Download Hindi News App और रहें अपडेट| ‘टैलेंटेड इंडिया’ की ख़बरों को फेसबुक पर पाने के लिए पेज लाइक करें – Talented India News

Share.