‘पराक्रम पर्व’ फौज के पराक्रम को घटाकर दिखाना…

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सरकार कितनी नौटंकीप्रिय है ? दो साल पहले हुई तथाकथित सर्जिकल स्ट्राइक की वह दूसरी जयंती मना रही है ? कोई उनसे यह पूछे कि उसकी पहली जयंती का क्या हुआ ? पिछले साल सितंबर में वह उसकी पहली जयंती मनाना क्यों भूल गईं ? शायद इसलिए कि पिछले साल तक उन पर चुनाव का बुखार नहीं चढ़ा था।

अपने इस आखिरी साल में उस पर चुनाव का भूत सवार हो गया है। वह अपने तरकश के किसी भी तीर को बचाकर नहीं रख रही है। यह ठीक है कि उसने 28-29 सितंबर 2016 को भारत-पाक सीमांत पर कुछ पाकिस्तानी चौकियों को उड़वा दिया था, लेकिन इस तरह के कई काम भारतीय फौजें अक्सर करती ही रहती हैं लेकिन इस तरह के नित्यकर्मों का कोई भी सेना अक्सर प्रचार नहीं करती हैं, लेकिन हमारे प्रचारमंत्रीजी के रहते, यह न हो, ऐसा कैसे हो सकता है ?

उन्होंने इसका राजनीतिक फायदा उठाने की भरपूर कोशिश की और उसका एक वीडियो भी काफी दिनों बाद जारी करवाया। वह वीडियो शुद्ध मजाक था। उससे कुछ भी सिद्ध नहीं होता था। न्यूयार्क और लंदन के अखबारों ने भी हमारे दावों की मजाक उड़ाई। इसके अलावा पिछले दो सालों में सैकड़ों बार हमारी सीमा का उल्लंघन हुआ और हमारे जवानों की बर्बरतापूर्ण हत्या हुई। कोई कठोर जवाबी कार्रवाई करने की बजाय हमारी सरकार ने पिछले चार साल लल्लो-चप्पो में गुजार दिए। न उसे बात चलानी आती है और न ही लात चलानी आती है। दूसरे शब्दों में हमारे बहादुर फौजियों की सर्जिकल स्ट्राइक को हमारी सरकार ने ‘फर्जीकल स्ट्राइक’ का रूप दे दिया है। और अब इसे वह तीन दिन के समारोह में नौटंकी का रूप दे रही है।

कहीं इसीलिए तो सुषमा-कुरैशी की न्यूयार्क में होने वाली भेंट को भंग नहीं किया गया है ? हमारे नेताओं को सर्जिकल स्ट्राइक शब्द का मतलब भी पता है या नहीं ? हमारे फौजी जनरल भी अपने नेताओं की नादानी पर चकित हैं। 1976 में मिस्र पर इस्राइल ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी। उसके सैकड़ों विमान एक झटके में नष्ट कर दिए थे। 51 साल बीत गए। आज तक मिस्र करवट भी नहीं बदल सका है। इस फर्जीकल स्ट्राइक को ‘पराक्रम पर्व’ कहना अपनी फौज के पराक्रम को बहुत घटाकर दिखाना है|

डॉ.वेदप्रताप वैदिक

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार हैं)

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