धीरूभाई ने दिलाई देश को नई पहचान

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कहते हैं कि यदि हम मन में कुछ ठान लें, उसके लिए कड़ी मेहनत करें और सपनों को पूरा करने की हिम्मत रखें तो चाहे बड़ी से बड़ी परेशानी ही क्यों न आ जाए, सपने साकार हो ही जाते हैं| इस बात को यदि किसी ने पूरी तरह चरितार्थ किया है तो वह धीरूभाई अंबानी ने किया है| गरीबी से निकलकर उन्होंने कड़ी मेहनत की और अपना खून-पसीना बहाकर रिलायंस इंडस्ट्री की शुरुआत की| धीरूभाई अंबानी के जन्मदिन ( Dhirubhai Ambani 86th Birth Anniversary ) पर आज हम जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें, जो आपको भी तूफ़ान से टकराने की हिम्मत देंगी|

धीरूभाई का जन्म 28 दिसंबर, 1932 (Dhirubhai Ambani 86th Birth Anniversary) को गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित एक छोटे से गांव चोरवाड़ में हुआ था| उनका पूरा नाम धीरजलाल हीरालाल अंबानी है| उनके पिता एक शिक्षक थे| उनके परिवार में माता-पिता के साथ ही चार भाई-बहन थे|

गरीबी के कारण उन्हें बचपन में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी| हाईस्कूल तक शिक्षा लेने के बाद ही वे छोटे-मोटे काम करने लगे| उन्होंने बचपन में बहुत संघर्ष किया| उन्होंने परिवार पालने के लिए भजिये भी बेचे, लेकिन यह काम ज्यादा नहीं चला क्योंकि मुनाफ़ा पर्यटकों पर निर्भर रहता था और ऐसे में उन्हें यह काम छोड़ना पड़ा| इसके बाद पिता की सलाह मानकर उन्होंने यमन जाकर पेट्रोल पंप पर 300 रुपए के वेतन पर नौकरी की शुरुआत की| उनके अंदर का जज़्बा देखकर महज दो साल के अंदर ही उन्हें मामूली कर्मचारी से कंपनी का प्रबंधक बना दिया गया|

जब भारतीयों के लिए विदेशों के दरवाजे बंद हो रहे थे, ऐसे कठिन दौर में यानी वर्ष 1950 में वे भारत लौटे और अपने चचेरे भाई चंपकलाल दमानी के साथ मिलकर मसालों और पॉलिएस्टर धागे का व्यापार शुरू किया| दोनों भाइयों ने मिलकर एक छोटे से कमरे में व्यापार की शुरुआत की| रिलायंस के अस्तित्व की शुरुआत अब हो चुकी थी| ‘रिलायंस कमर्शियल कॉरपोरेशन’ के नाम से उनका मसालों का व्यापार शुरू हो चुका था| 1965 में धीरुभाई अंबानी और चंपकलाल दमानी के बीच हुई कारोबारी साझेदारी खत्म हो गई क्योंकि दोनों के कार्य करने का तरिका अलग-अलग था|

कुछ समय बाद धीरुभाई अपने परिवार के साथ मिलकर मुंबई आए, तब उनके पास केवल हजार रुपए थे| उन्होंने अब सूत का व्यापार शुरू किया और अपने नए विचारों के कारण वे बॉम्बे सूत व्यापारी संगठन के संचालक बन गए| इसके बाद उन्हें सूत के कारोबार में महारथ हासिल हो गई|

धीरूभाई अंबानी (Dhirubhai Ambani 86th Birth Anniversary) ने 1966 में गुजरात में एक टेक्सटाइल मिल शुरू की। नरोदा में स्थापित इस टेक्सटाइल मिल ने 14 महीनों के अंदर 10  हजार टन पॉलिएस्टर यार्न का उत्पादन किया, जिसने विश्व रिकॉर्ड बना दिया| बस यहीं से धीरुभाई के अच्छे समय की शुरुआत हो गई| इसके बाद उन्होंने कपड़ों का नया ब्रांड ‘विमल’ शुरू किया| विमल धीरूभाई अंबानी के बड़े भाई रमणीकलाल अंबानी के बेटे हैं| यह ब्रांड देश में खूब चला|

1986 में धीरुभाई अंबानी (Dhirubhai Ambani 86th Birth Anniversary) को दिल का दौरा पड़ा, जिसके कुछ समय बाद उनके दाएं हाथ पर लकवा मार गया| इसके बाद उनके दोनों बेटे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी आगे आए और उन्होंने कारोबार संभाला|

धीरूभाई अंबानी ने साल 2002 में आरकॉम लॉन्च की| रिलायंस समूह ने मोबाइल की दुनिया में ‘कर लो दुनिया मुट्ठी में’  के स्लोगन के साथ कदम रखा था| 6 जुलाई 2002 को धीरुभाई अंबानी ने अंतिम सांस ली| धीरुभाई अंबानी द्वारा शुरू की गई इस रिलायंसस इंडस्ट्री आज दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार हो चुकी है|

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