कोरोना एक मझधार, हाथ खड़े कर गई सरकार

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दुनियाभर की सरकारें आज कोरोना के खिलाफ लड़ते हुए अपने देश और देशवासियों के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, वही भारत में मोदी सरकार ने शानदार भाषण देते हुए अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली. अभी तक जनता को ताली, थाली, मोमबत्ती और भाषण का डोज दिया गया, लेकिन अब वो भी नहीं. मतलब जब लाक डाउन खोला जा रहा है जहाँ और भी ज्यादा सजग होने की दरकार थी सरकार ने हाथ खड़े कर दिए.

राज्य सरकारें वेसे भी ज्यादा कुछ कर नहीं रही है और काम के नाम पर केंद्र के आदेशो का आमूल- चुल पालन करने का कार्य किया जा रहा था सो वो भी अब बंद हो गया. मप्र की शिवराज सरकार हो या गुजरात की राज्यसभा के लिए तैनात बीजेपी कोई अपनी और से एक प्रयास तक नहीं गिनवा पाया .जर्मनी ने अपने लोगो के लिए ऐलान किया है कि बेरोजगारों को भत्ता और कामगारों को 60 से 87 फीसदी वेतन दिया जायेगा. ऐसे में कटोती तो हुई लेकिन नौकरी नही जाएगी और जीवन भी बच जायेगा. अमेरिका ने भी जरा देरी से और अधूरे मन से ही सही लेकिन यही निति अपनाई . किन्तु भारत सरकार ने कोरोना के चलते एक साथ 12 करोड़ से ज्यादा लोगों को बेरोजगार करने से पहले एक बार भी नहीं सोचा.

वेसे ही मोदी सरकार बेरोजगारी पर बोलने से बचती रही है और रोजगार उन्हें पकौड़ा तलने में नजर आता है. अब इस 12 करोड़ लोगो के साथ कम से कम दो से तीन लोगो का पेट जुड़ा होगा ऐसे में 24-36 करोड़ भारतीय भुखमरी की कगार पर आ गए है. अभी यह शुरुआत है आंकड़े और भी भीषण होंगे.
वेसे जवाब सवाल की इजाजत किसी को है नही फिर भी यदि ऐसे में पीएम से जब भी पूछा जायेगा की रोजगार का क्या इंतजाम है तो वे आत्मनिर्भर भारत का नया जुमला पकड़ा देंगे और पकौड़ा जैसे न जाने कौन-कौन से रोजगार गिनवा देंगे और वो भी इस अंदाज में जैसे पकौड़ा तलना कोई सरकारी योजना से मिला लाभ है . वैसे पीएम उनके भाषण या इंटरव्यू का अंत सरकार की उन उपलब्धियों के साथ कर देंगे जिनका जनता से कोई वास्ता ही नहीं . इस बीच किसी ने क्रॉस कोश्चन किया तो उनके इर्दगिर्द वाले उसे देशद्रोही करार देंगे.

रोजगार से याद आया जब एक बार मप्र के इंदौर में बीजेपी की प्रखर वक्ता और बड़ी नेत्री मीनाक्षी लेखी से देश में बढ रही बेरोजगारी की वजह पूछी गई थी तो उन्होंने बड़ा हास्यास्पद जवाब दिया था. मप्र विधानसभा चुनावों के दौरान प्रचार के लिए आई मीनाक्षी का जवाब था कि आज कल सरकार ने स्कूल कालेज इतने बनवा दिए है की शिक्षा का स्तर अचानक बढ गया है और इसके अनुपात में सरकार रोजगार पैदा नहीं कर पा रही है. जोरदार हँसी ठहाकों के बाद जब एक पत्रकार ने पूछा की तो क्या कुछ समय के लिए शिक्षा दीक्षा रोक दी जाये तो अब मीनाक्षी का चेहरा देखने लायक था. बहरहाल जब सरकार में खुद पीएम और उनके मंत्री संत्री इस तरह का नजरियाँ रोजगार जेसे मुद्दे पर रखते हो तो फिर भारत की जनता का अन्य मुद्दों के साथ कोरोना के खिलाफ जंग में अकेले लड़ लेना ही बेहतर है.

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