कहीं शानदार जीत तो कहीं जमानत जब्त

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राजस्थान के चुनावी गढ़ में सेंध लगाने वाली कांग्रेस ने महारानी से उनका किला छीन लिया। राजस्थान के किले को भेदने वाली कांग्रेस अपने ही चक्रव्यूह में उलझकर रह गई है। कांग्रेस चुनाव तो जीत गई, लेकिन अब मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए, इस सवाल ने आलाकमान का भी दिमाग घुमा दिया है। प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करने वाली कांग्रेस अब राजस्थान की सत्ता संभालने जा रही है, लेकिन राजस्थान में एक जिला ऐसा भी है, जहां प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई। दौसा जिले की 5 सीटों पर 46 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे थे। इन 46 उम्मीदवारों में से 35 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई|

इस विधानसभा में केवल 11 प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचाने में सफल हो सके। महवा विधानसभा में तो सत्ता पर काबिज़ होने वाली कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी अजय बोहरा ही अपनी जमानत नहीं बचा सके। वहीं कई पूर्व विधायक भी अपनी जमानत जब्त होने से नहीं बचा सके। दौसा सीट से चुनावी मैदान में उतरे पूर्व विधायक नंदलाल बंशीवाल, सिकराय सीट पर चुनाव लड़ने वाली पूर्व विधायक गीता वर्मा और महुआ सीट से पूर्व जिला प्रमुख अजीत सिंह भी अपनी जमानत जब्त होने से नहीं बचा पाए।

बांदीकुई सीट पर केवल भाजपा, कांग्रेस और बसपा के प्रत्याशियों की जमानत बच पाई। वहीं दौसा में भाजपा और कांग्रेस को छोड़कर बाकी सातों प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। लालसोट सीट पर भी भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी ही जमानत बचा पाए। महुवा में भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र मीणा और निर्दलीय प्रत्याशी ओमप्रकाश हुड़ला को छोड़कर बाकी 10 प्रत्याशियों की जमानत हो गई।

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