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कहां गए सर्कस के वे शेर, क्या हुआ उनका हाल?

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हमने सर्कस में शेरों और बाघों के करतब को तो देखा ही है| सरकार द्वारा सर्कस में जानवरों पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद कई वर्षों तक गैरकानूनी रूप से सर्कस में शेरों और बाघों को दिखाकर लोगों का मनोरंजन किया गया| सरकार की सख्ती के बाद आखिरकार शेरों का सर्कस में दिखना बंद हो गया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका मनोरंजन करने वाले शेरों और बाघों का क्या हुआ? वे कहां हैं और किस हाल में हैं? 

दरअसल, सबसे ताकतवर जानवर सिंह और बाघों को सरकार के फैसले के एक कागज ने ढेर होने के लिए छोड़ दिया| मनोरंजन के लिए इंसानों ने पहले तो उनका आज़ादी छीनी और फिर उनकी सांसें भी छीन ली|

मरने के लिए छोड़ दिया गया

दरअसल, दुनिया के सबसे ताकतवर जानवर का इंसानों ने अपने स्वार्थ और प्रलोभन के कारण खेल बनाया और उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा| आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया गया| जी हां, सर्कस में करतब दिखाने वाले शेरों का जीवन सरकारी आदेश के बाद अधर में रह गया| जब यह कानून पारित हुआ कि अब शेरों और बाघों को मनोरंजन के लिए नहीं दिखाया जा सकता तो देश  भर के सर्कस से उन्हें एकत्रित किया गया|

इन शेरों और बाघों को जंगल में नहीं छोड़ा जा सकता था क्योंकि चाबुकों की मार ने उन्हें उनके स्वभाव से ही कोसों दूर रखा| ये जानवर जंगल में रहकर स्वयं की रक्षा करने योग्य भी नहीं बचे थे| इन्हें देश के किसी भी जू ने रखने से इनकार कर दिया| शेरों के लिए वर्ष 2002 में राजस्थान के जयपुर के नाहरगढ़ में एक रेस्क्यू सेंटर खोला गया|

नाहरगढ़ जाकर जंगल के राजा सबकी दया के पात्र बन गए| उनकी दहाड़, उनकी गरज सब सीमित हो गई| वहां उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया गया| हैरानी वाली बात यह है कि ऐसे जानवरों का वंश आगे न बढ़ सके, इसके लिए भी वहां पर बंदोबस्त करवाए गए| शेरों और बाघों को अलग तथा शेरनियों और बाघिन को अलग रखा गया ताकि इनकी नस्ल का कोई आगे जन्म न ले सके| ऐसा इसीलिए किया गया क्योंकि ये जानवर चाबुकों की मार खा-खाकर बहुत कमजोर हो गए थे और सरकार नहीं चाहती थी कि ऐसा आगे भी हो|

कुत्ता करता है रखवाली

सबसे बड़ी बात यह है कि नाहरगढ़ में शेरों और बाघों की हिफाजत के लिए दिन में तो कर्मचारियों और अधिकारियों की टोली रहती है, लेकिन रात में इनकी रखवाली एक कुत्ते के जिम्मे होती है| अब नाहरगढ़ में इक्का-दुक्का ही शेर बचे हैं| यहां एक-एक करके सभी सर्कस के शेरों ने इंसानों के कारण दम तोड़ दिया| अब भारत में सर्कस में किसी भी जानवर का खेल दिखाना प्रतिबंधित है| हाथी, बंदर या अन्य का खेल दिखाना अब गैरकानूनी है|  पीसीए एक्ट के सेक्शन 22(2) के अनुसार, भालू, बंदर, बाघ, तेंदुए, शेर और बैल को मनोरंजन के लिए ट्रेन करना और इस्तेमाल करना गैरकानूनी है|

-रंजीता पठारे

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