तसल्ली देती मौसम विभाग की भविष्यवाणी

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इस वर्ष मानसून सामान्य रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, पूरे सीजन 97% बारिश हो सकती है। कम बारिश की आशंका बेहद कम है। अनुमान 5 फीसदी ऊपर-नीचे हो सकता है। वहीं गर्मी भी तेज पड़ सकती है। सामान्य से ज्यादा बारिश 56 फीसदी जबकि कम बारिश 44 फीसदी होगी। मई के अंतिम या जून के पहले हफ्ते में केरल में पहली बारिश हो सकती है।

निश्चित ही मौसम विभाग का अनुमान उत्साह जगाने वाला हो, किंतु आज के हालात में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। कई हिस्से सूखे से जूझ रहे हैं। मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा अधिकांश स्थानों पर सूख गई है। वहीं सरदार सरोवर में पानी 105 मीटर है, जो सामान्य से 50 फीसदी से भी कम है। पानी को लेकर गुजरात और मध्यप्रदेश आमने-सामने हैं। अधिक पानी लेकर गुजरात पर्यावरण मंत्रालय तक जा पहुंचा है। वहीं नर्मदा किनारे मालवा-निमाड़ अंचल में पानी को लेकर स्थिति आतंकित करने वाली है।

हर वर्ष गर्मी के दौरान देश के कई हिस्सों में पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के डाटा के अनुसार, अक्टूबर 2017 से देश के 404 जिलों में बहुत कम बारिश हो रही है। इनमें से 140 जिलों में हालात काफी बुरे हैं क्योंकि अक्टूबर 2017 से मार्च 2018 के बीच बारिश न के बराबर है। वहीं 109 जिलों की हालत थोड़ी सही है और 156 जिले सूखे की जद से काफी बाहर हैं। इनमें अधिकांश उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में है, साथ ही पूर्व में बिहार और झारखंड जैसे स्थानों पर हालात खराब हैं।

इस वर्ष सूखा पड़ने की संभावना इसलिए ज्यादा है क्योंकि सर्दियों में न के बराबर बारिश हुई है। जनवरी और फरवरी के महीने में 63 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं मार्च और अप्रैल के महीने में 31 फीसदी बारिश कम हुई है। यह कहना गलत नहीं होगा कि पर्यावरण की मार के लिए हमारी नीतियां जिम्मेदार हैं। जल प्रबंधन को लेकर हमारी ठोस नीति निर्धारित नहीं है। गर्मी में पानी की कमी होने पर पानी सहेजने की याद आती है। इस वर्ष भी यही हालात है। ऐसे में मौसम विभाग की भविष्यवाणी सिर्फ तसल्ली देने वाली है। अब देखना होगा कि यह कितना सच साबित होता है।

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