खेल हो या फिल्म हर जगह चला विजेंद्र का सिक्का

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भारत के मुक्केबाज विजेंद्र सिंह खेल के साथ ही अपने आकर्षक लुक के लिए हमेशा ही सुर्ख़ियों में बने रहते हैं| उनके लुक की वजह से ही विजेंद्रसिंह ने खेल जगत के साथ ही अभिनय में भी अपना जलवा दिखाया| वर्ष 2014 में भारत को मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक दिलाने वाले विजेंद्रसिंह का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था| कड़े संघर्ष के बाद विजेंद्र मुक्केबाजी में अपना करियर बना पाए| आज यानी 29 अक्टूबर को विजेंद्र का 33वां जन्मदिन है| इस मौके पर आइए, उनसे जुड़ी कुछ ख़ास बातें जानते हैं|

विजेंद्र सिंह का जन्म 29 अक्टूबर 1985 को हरियाणा के भिवानी जिले में हुआ था| उनके पिता महिपाल सिंह बेनीवाल हरियाणा रोडवेज़ में बस चलने का काम करते थे| उनकी मां एक गृहिणी हैं| विजेंद्र एक बेहद ही निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखते हैं| विजेंद्र ने अपनी पूरी पढ़ाई भिवानी से की थी| उन्हें कॉलेज के दिनों से ही मुक्केबाजी और कुश्ती का काफी शौक था|  वह मुक्केबाजी का अभ्यास भिवानी बॉक्सिंग क्लब में करते थे| उन्होंने कोचिंग का प्रशिक्षण भारतीय बॉक्सिंग कोच गुरबक्शसिंह संधू से लिया हैं|

विजेंद्र सिंह का करियर

वर्ष 2014 से विजेंद्र सिंह के करियर की शुरुआत हुई| उन्होंने एथेंस ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में हिस्सा लिया| हालांकि उन्हें इस टूर्नामेंट में तुर्की के मुस्तफा करागोल्ला के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था| वर्ष 2006 में उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा किया और सेमीफाइनल भी जीता| फाइनल में हार के बाद उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा| इस साल वे चोटिल हो गए और फिर वर्ष 2008 में उन्होंने वापसी की और बीजिंग ओलंपिक 2008 में अपनी जगह पक्की की| इस टूर्नामेंट में उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा| इस टूर्नामेंट में पदक हासिल करने वाले वे भारत के पहले मुक्केबाज थे|

वर्ष 2009 में उन्होंने विश्व अमेचर मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया| इसी वर्ष उन्हें ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के लिए राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड और पद्मश्री अवॉर्ड से नवाजा गया| वर्ष 2010 उनके लिए कुछ खट्टा और कुछ मीठा रहा| दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में विजेंद्र सिंह ने स्वर्ण पदक जीता| वहीं इसी वर्ष वे कॉमनवेल्थ गेम्स में विवाद में फंस गए| उन पर 4 अंकों का जुर्माना लगा और उन्होंने सेमीफाइनल खो दिया| उन्हें इस टूर्नामेंट में कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा| इसी साल उन्होंने एशियाई गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया|

वर्ष 2012 उनके लिए काफी निराशाजनक रहा| इस वर्ष लंदन ओलंपिक के लिए वे क्वालिफाई हुए, लेकिन वे इस टूर्नामेंट में कोई पदक हासिल नहीं कर पाए| इस साल वे ड्रग मामले के विवाद में भी रहे, लेकिन जल्द ही वे इस समस्या से निकल गए| नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी ने उन्हें ऑल क्लीन का प्रमाण-पत्र दिया| साल 2014 विजेंद्र के लिए काफी ख़ास रहा| उन्होंने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया और रजत पदक जीता| इसी के साथ उन्होंने बॉलीवुड में भी डेब्यू किया| विजेंद्र सिंह अक्षय कुमार की फिल्म ‘फुगली’ में एक पुलिस ऑफिसर का किरदार अदा करते हुए नजर आए थे|

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