दलित मुद्दे पर अब ऐसे काम करेगी भाजपा

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देश में हुए दलित आंदोलन को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर है| सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट को लेकर दिए गए फैसले में देरी के बाद से ही पूरे देश के दलित भाजपा के खिलाफ हो गए हैं| दूसरे दलों के नेताओं ने इसे एक राजनीतिक मुद्दा बनाकर भुनाना भी शुरू कर दिया है| सबसे ज्यादा इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को कांग्रेस ने घेरने का प्रयास किया है| यदि इस कानून पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान कोई बड़ा फैसला देता है तो आने वाले दिनों में केंद्र से एक बड़ा वोट बैंक दूर भी जा सकता है|

इन सभी परेशानियों को लेकर भाजपा में अब मंथन शुरू हो गया है| भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लगातार पार्टी के नेताओं से दलितों से संपर्क कर उन्हें सरकार के साथ लेने की हिदायतें दे रहे हैं| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने सांसदों को दलितों तक सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं|

इस पूरे मामले में दलितों को फिर से साथ लाने के लिए प्रधानमंत्री ने आंबेडकर का भी सहारा लेने की कोशिश की है| बीते 4 सालों में मोदी सरकार पर ऐसा कोई आरोप नहीं लगा था और लगभग सभी वर्ग को सरकार ने साधकर रखा था, लेकिन इस मुद्दे के बाद अब विपक्ष सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकता है|

4 साल से मोदी सरकार में कोई सेंध नहीं लगा पाया था| उन्हें रोकने के लिए कोई रणनीति नहीं थी| इसे लेकर अब भाजपा ने भी अपने दलित सांसदों को निर्देश दिए हैं कि वे दलित बाहुल्य क्षेत्र में जाकर सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करें| देश में दलित आन्दोलन के बाद हो रहे विरोध को दबाने के लिए भी भाजपा के दलित सांसद कैलाश मेघवाल और केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत जैसे नेता भी लगातार विरोध को रोकने की कोशिश कर रहे हैं|

अब आंबेडकर जयंती से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘ग्राम स्वराज अभियान’ के तहत दलितों को एक बार फिर सरकार के साथ लाने की तैयारी में हैं| इस अभियान के तहत देश के 20 हज़ार से ज्यादा गांव, जिनमें 50 प्रतिशत से ज्यादा दलित रहते हैं, उन्हें कवर किया जाएगा| इस दौरान सरकार ने सभी योजनाओं के क्रियान्वयन की तैयारी की है| प्रधानमंत्री ने अपने मंत्री और सांसदों को निर्देश दिए हैं कि वे  इन गांवों में जाएं और लोगों को सरकार के फायदों के बारे में बताएं|

इस तरह एक बार फिर सरकार ने अपने जाते हुए वोट बैंक को वापस लाने की तैयारी कर ली है| अब देखना होगा कि इस विरोध के बाद केंद्र सरकार के इस अभियान से क्या दलितों का आक्रोश शांत हो पाता है या एक बार फिर दलित राजनीति किसी सरकार के लिए घाटे का सौदा साबित होती है|

-पॉलिटिकल डेस्क

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