सुप्रीम कोर्ट ने लिए बड़े फैसले

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सुप्रीम कोर्ट ने तीन बड़े फैसले लिए हैं, जिनका सीधा संबंध जनता से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी वर्ग को प्रमोशन में आरक्षण, आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता के अलावा कोर्ट की कार्यवाही के सीधे प्रसारण की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण को खारिज न करते हुए, इसका निर्णय राज्य पर छोड़ दिया है। अब हर राज्य सरकार अपने अनुसार तय कर सकेगी कि उसे प्रमोशन के दौरान आरक्षण लागू करना है भी या नहीं।

अदालत का दूसरा बड़ा फैसला अदालती कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग का रहा। इससे पहले अदालत में पक्ष-विपक्ष की बहस पूरी होने के बाद ही जनता के पास जाती थी, लेकिन अब अदालती कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए अदालतों की कार्यवाही को लाइवस्ट्रीम करने की अनुमति दे दी है। इन दो फैसलों के साथ सबसे बड़ा फैसला आधार कार्ड की अनिवार्यता और संवैधानिक वैधता से जुड़ा हुआ आया।

आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के उस दावे पर मुहर लगाई कि आधार कार्ड के ड्यूप्लिकेसी संभव नहीं है। इससे देश के गरीबों को ताकत मिली है। नई सिम लेते वक्त, बैंक में खाता खुलवाने और स्कूल में दाखिले के लिए आधार की अनिवार्यता को हटाकर आम जनता की बड़ी समस्या दूर की गई है। वहीं पैन कार्ड और आयकर भरते वक्त आधार को अनिवार्य करते हुए कहा गया है कि आधार एक्ट में ऐसा कुछ भी नहीं है।

पिछले कुछ समय से आधार कार्ड को लेकर जनता में डर और संशय था। इससे निजता भंग होने का भी खतरा बना हुआ था। हर जगह आधार नंबर की मांग की जाती है, जिस कारण नाम, पते से लेकर बैंक खाते तक हर चीज उजागर हो जाती थी। पहले यह जानकारी सरकार के पास रहती थी, उससे कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन निजी कंपनियों के पास आधार नंबर जाने का मतलब है कि आम जनता का डेटा बैंक एकत्र होना, जिसका गलत इस्तेमाल हो सकता था। जनता अभी तकनीकी इस्तेमाल पर इतनी जागरूक नहीं है और न ही उसके गलत इस्तेमाल करने वाले को सज़ा दिला सके। आधार की अनिवार्यता पर हमेशा संशय भरा सवाल उठाया जाता रहा है। केंद्र सरकार भी जनता का भय आधार को लेकर दूर नहीं कर पाई। बैंक, ऑनलाइन पेमेंट, स्कूलों, हर जगह आधार कार्ड की मांग की जाने लगी। कुछ दिनों पहले ही झारखंड के रामगढ़ जिले में आधार कार्ड नहीं होने पर राशन नहीं मिला और भूख से मौत की खबर सामने आई थी। अकेले झारखंड में ही आधार कार्ड न होने के कारण बीते एक वर्ष में भूख से 14 लोगों ज्यादा लोगों की मौत हो गई।

कुछ मिलाकर देखा जाए तो देश में ऐसा माहौल बन गया कि आधार कार्ड जनता की सुविधाएं बढ़ाने की जगह मुश्किलें पैदा करने लगा। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को लेकर जो फैसला सुनाया है, उससे आम जनता को काफी राहत मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट के तीनों ही फैसले जनता के हित के लिए हैं। आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से हर दल को कुछ न कुछ मिला है। उम्मीद है कि राजनीतिक दल इस पर राजनीति न कर फैसले का सम्मान करेंगे।

– कुशाग्र वालुस्कर

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