स्टॉक मार्केट ज़िन्दगी को गहराई से समझने का जरिया

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स्टॉक मार्केट और ज़िन्दगी…, जी नहीं, मैं यहां यह विवरण करने नहीं जा रही कि स्टॉक मार्केट की किसी सज्जन को ऐसी लत लगी कि वह उसकी ज़िन्दगी बन गया, परन्तु कुछ समय से शेयर बाज़ार से जुड़े होने के कारण इसे नजदीक से रूबरू होने का मौका मिला, इसलिए मैंने आपसे अपने वे विचार साझा करने चाहे, जो मेरे लिए स्टॉक मार्केट के माध्यम से ज़िन्दगी को और गहराई से समझने का जरिया बना |

बाज़ार का नफा-नुकसान हमारी ज़िन्दगी का सुख और दुःख का बोध कराता है और इसका उतार-चढ़ाव उन विचारों का, जो हमारे मन में कभी भी हलचल पैदा कर देते हैं| मां कहती हैं कि समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता, इसलिए अति दु:खी होना या अति प्रसन्नता के भाव की कोई आवश्यकता नहीं होती पर हां… हमारी गलतियों से हमें सीख अवश्य लेनी चाहिए और सफलताओं से प्रेरणा | शेयर बाज़ार के बारे में हमने अक्सर ये भ्रान्ति सुनी है कि यह तो सट्टा बाज़ार है…. ऐसा वही कहते हैं, जो इससे असीमित राशि प्राप्त करना चाहते हैं| संयमित और सुरक्षित ट्रेडिंग हमें हमेशा सफल बनाती है वैसे ही जीवन में भी संयम ही हमें दिशाहीन होने से रोकता है|

बड़े-बुज़ुर्गों ने शायद सोच-समझ के ही यह पहलू हमारे लिए रखा था कि निरंतर प्रयास और सही मौका सफलता की सीढ़ी चढ़ने में सहायक होता है तथा जितनी चादर हो, उतने ही पैर मनुष्य को फैलाना चाहिए| दुनियाभर में अनेक स्टॉक एक्सचेंज हैं, जिन पर विश्लेषक काफी गौर करते है और मनन भी क्योंकि टेक्नोलॉजी के इस युग ने सब चीज़ों को इतना पास ला दिया है कि एक का असर दूसरे पर तुरंत देखा जा सकता है | इससे ज़िन्दगी की यही सीख सामने आती है कि हमारा जीवन भी कई लोगों से प्रभावित रहता है, चाहे वे हमारे माता-पिता, मित्र, रिश्तेदार आदि हों|

सभी से लिया गया सही परामर्श व सीख हमेशा ही जीवन में लाभदायक होती है…. और सबसे महत्वपूर्ण बात, जिस तरह कोई भी ट्रेडर वही ट्रेड करता है, जिसकी उसे समझ हो अथवा उसे अच्छा लगता हो, उसी प्रकार हमें भी जीवन में उसी ओर कर्मशील रहना चाहिए या यूं कहें कि उसी दिशा में करियर चुनना चाहिए, जो हमारी पसंद हो, तभी तो देश के युवा सफल होकर सही दिशा में अग्रसर हो सकेंगे और देश तरक्की की राह पर जा सकेगा| जिन सबके लिए यह चक्र चलता है – पूंजी|  वह दोनों में ही बनती है, बाज़ार में पैसों की और ज़िन्दगी में रिश्तों की| आज का ट्रेडिंग सेशन यही समाप्त|

 -बकुल गुप्ता, इंदौर 

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