आयुष्मान भारत योजना विडियो: क्या 90 हजार में संभव है बायपास सर्जरी ?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों को  ‘आयुष्मान भारत योजना’ की सौगात दी| भाजपा का कहना है कि इस योजना से 50 करोड़ से अधिक लोगों को फायदा मिलेगा| इस योजना के जरिये सस्ता स्वास्थ्य बीमा और सस्ता इलाज गरीबों को मुहैया करवाया जाएगा, लेकिन योजना की हकीकत कुछ और ही है| सरकार द्वारा पेश की गई विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना अब सवालों के घेरे में आ रही है|

सरकारी तंत्र का दावा है कि गरीबी रेखा के नीचे के व्यक्तियों के लिए सरकारी अस्पताल से लेकर निजी अस्पताल में भी इलाज की व्यवस्था होगी, जो पूरी तरह से कैशलेस होगी| वहीं इस बारे में नीति आयोग का कहना है कि भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद का महज 1.3 फीसदी ही स्वास्थ्य पर खर्च करता है यानी अब ‘आयुष्मान भारत योजना’ के कारण आने वाला अतिरिक्त भार आम जनता पर डाला जाएगा|

खर्च किसके भरोसे?

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के तहत प्रतिवर्ष 10 करोड़ गरीब परिवारों को इलाज के लिए 5-5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध करवाया जाएगा| सरकार ने इसके लिए 2000 करोड़ रुपए का प्रावधान भी बना लिया है, लेकिन क्या यह प्रावधान पर्याप्त है? इस योजना का लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए 1 लाख आयुष्मान मित्रों की नियुक्ति की जाएगी, जिनका वेतन 15 हजार रुपए रहेगा| ये लोग ‘आयुष्मान भारत योजना’ के लाभार्थी और अस्पतालों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करेंगे| बीमारियों की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना भी की जाएगी| लोगों की जांच से लेकर उन्हें दवाइयां भी मुफ्त में मुहैया करवाई जाएगी| ये सारे खर्चे सरकार के 2000 करोड़ रुपए के प्रावधान से ही किए जाएंगे|

नीति आयोग का मानना है कि भारत में हॉस्पिटलाइजेशन रेट 1 से 1.5 फीसदी है और योजना में शामिल 50 करोड़ लोगों के हिसाब से इसके 1 फीसदी लोगों को हॉस्पिटल जाना पड़ा तो इनकी संख्या 50 लाख होगी या फिर डेढ़ फीसदी लोग अस्पताल में भर्ती हुए तो उनकी संख्या 75 लाख होगी| सरकार ने 5 लाख रुपए का बीमा प्रति परिवार  लगभग 10 करोड़ परिवार को दिया है, जो संख्या काफी ज्यादा है| वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार योजना में 1082 रुपए प्रति परिवार प्रीमियम का खर्च आएगा और 10 करोड़ परिवार पर यह खर्च लगभग 10 हजार करोड़ रुपए होगा| इसके लिए 60 फीसदी लागत केंद्र सरकार वहन करेगी और बाकी राज्य सरकार| अरुण जेटली ने इस योजना के बारे में बताते हुए कहा कि यह योजना ट्रस्ट मॉडल या इंश्योरेंस मॉडल पर काम करेगी और पूरी तरह कैशलेस होगी| राज्य सरकार के पास यह अधिकार होगा कि किसे योजना का लाभ दिया जाएगा|

निजी अस्पतालों ने शामिल होने से किया इनकार

जहां एक ओर केंद्र सरकार इस योजना को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है| गरीबों को भरोसा दिला रही है कि उनका इलाज अब सरकारी और निजी अस्पताल में भी फ्री किया जाएगा वहीं बड़े निजी अस्पतालों ने योजना में शामिल होने से इनकार कर दिया| डॉक्टर्स का कहना है कि सरकार ने इलाज के जो खर्च तय किए हैं, वे बहुत कम हैं| एंजियोप्लास्टी, नी रिप्लेसमेंट, स्पाइनल सर्जरी, सर्वाइकल सर्जरी न्यूरो, ट्यूमर सर्जरी, आर्टरी सर्जरी और सीएबीजी आदि की दरें सरकार ने बहुत कम निर्धारित की हैं| इन दरों पर इलाज करना अस्पतालों के लिए घाटे का सौदा होगा|

कम खर्च में इलाज असंभव

‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’ (आइएमए) हरियाणा से जुड़े अधिकांश डॉक्टर्स का कहना है कि कुछ क्रिटिकल उपचारों के लिए तय की गई दरें व्यावहारिक नहीं हैं| इतने कम खर्च में इलाज मुहैया करवाना लगभग असंभव है| योजना में सिजेरियन डिलीवरी का पैकेज मात्र 9 हजार रुपए बताया गया है वहीं बायपास जैसी मेजर सर्जरी के लिए  90 हजार रुपए निर्धारित किए गए हैं| वहीं इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में डेढ़ लाख रुपए निर्धारित किए गए थे| अब डॉक्टर्स के साथ-साथ आम जनता भी कम खर्च में इलाज की योजना पर सवाल उठा रही है| कई लोगों का मानना है कि सरकार इस ‘आयुष्मान भारत योजना’ के लिए आम आदमी को निशाना बनाकर उनसे वसूली करेगी|

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