92 साल की उम्र में इनके पास 84 डॉक्टरेट डिग्री

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उम्र के जिस दौर में लोग किसी नई उपलब्धि के बारे में सोच भी नहीं सकते, उस उम्र में इनके साथ लगातार नई उपाधि जुड़ रही है| कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है| देश में उन्हें ‘हरित क्रांति’ का जनक माना जाता है| एमएस स्वामीनाथन के नाम के साथ एक नई उपलब्धि भी जुड़ गई है|

कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन की उम्र 92 साल है| अब उन्हें 84वीं बार डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है| ग्वालियर की आईटीएम यूनिवर्सिटी ने उन्हें डी-लिट की उपाधि से सम्मानित किया है| आईटीएम ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि कृषि और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में अग्रणी योगदान के लिए दी है|

आपको बता दें कि कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ‘फादर ऑफ ग्रीन रेवोल्यूशन इन इंडिया’ यानी ‘हरित क्रांति के पिता’ भी कहा जाता है| 7 अगस्त 1925, कुम्भकोणम, तमिलनाडु में जन्मे एमएस स्वामीनाथन पौधों के जेनेटिक वैज्ञानिक हैं| स्वामीनाथन ने 1966 में मैक्सिको के बीजों को पंजाब की घरेलू किस्मों के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूं के संकर बीज विकसित किए थे|

आपको बता दें कि ‘हरित क्रांति’ कार्यक्रम के तहत ज़्यादा उपज देने वाले गेहूं और चावल के बीज ग़रीब किसानों के खेतों में लगाए गए थे| इस वजह से भारत खाद्यान्न मामले में आत्मनिर्भर बन गया था| एमएस स्वामीनाथन को 1967 में ‘पद्म श्री’, 1972 में ‘पद्म भूषण’ और 1989 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया जा चुका है| स्वामीनाथन सिर्फ भारत ही नहीं दुनियाभर में सराहे जाते हैं|

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