क्यों जन्मदिन नहीं मनाते थे दादामुनि?

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दिलीप कुमार, राजेश खन्ना, शाहरुख़ खान और सलमान खान फिल्म जगत के सुपरस्टार कहे जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म जगत का पहला सुपरस्टार कौन है? शायद नहीं! आज हम आपको फिल्म जगत के पहले सुपरस्टार के बारे में बताने जा रहे हैं| वह सुपरस्टार और कोई नहीं बल्कि अशोक कुमार हैं| अशोक कुमार को फिल्म जगत का पहला सुपरस्टार कहा जाता है| दादामुनि के नाम से पहचाने जाने वाले अशोक कुमार ने आज यानी 10 दिसंबर के दिन इस दुनिया को अलविदा कह दिया था|

अभिनय की कला के सागर दादामुनि के पिता यह नहीं चाहते थे कि वे अभिनय करें| उनके पिता पेशे से वकील थे, वे चाहते थे कि उनका बेटा भी उन्हीं की तरह वकील बने, लेकिन अशोक कुमार के सिर पर अभिनय की धुन सवार थी| इसी दीवानेपन की वजह से उन्होंने वकालत की पढ़ाई छोड़ दी और ​फिल्मों में काम करने का फैसला कर लिया|

टेक्नीशियन की नौकरी करते थे अशोक कुमार

एक बार अशोक कुमार अपनी बहन के घर मुंबई गए हुए थे, वहां उन्होंने अपनी बहन के पति से कहा कि उन्हें मुंबई में ही कोई काम दिला दें| जल्द ही उन्हें मुंबई में एक टेक्नीशियन की नौकरी मिल गई यानी फिल्मों में काम न करने से पहले दादामुनि ने टेक्नीशियन की नौकरी की| इसके बाद वर्ष 1936 में फिल्म ‘जीवन नैया’ से उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा|

किशोर कुमार की मौत से लगा था सदमा

हिंदी सिनेमा के मशहूर गायक किशोर कुमार, अशोक कुमार के छोटे भाई थे| वर्ष 1987 में अशोक कुमार अपने जन्मदिन की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें अपने छोटे भाई के निधन की खबर मिली| अशोक के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी| किशोर उम्र में अशोक कुमार से 18 साल छोटे थे| उस दिन के बाद से उन्होंने अपना जन्मदिन मनाना छोड़ दिया था| वे अक्सर कहते थे कि मैं उस दिन खुश कैसे हो सकता हूं, जिस दिन मेरा भाई चला गया|

घर में मच गया था हड़कंप

अशोक कुमार का जन्म एक मध्यमवर्गीय बंगाली परिवार में हुआ था| पिता कुंजीलाल गांगुली पेशे से वकील थे| दादामुनि की प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में हुई| जब उनके परिवार को कुमार के एक्टर बनने की खबर लगी तो घर में हड़कंप मच गया था| यहां तक कि उनकी तय शादी टूटने के कगार पर आ गई थी| अशोक कुमार के पिता उनके एक्टर बनने की बात से बहुत नाराज़ थे और वह चाहते थे कि अशोक एक्टिंग छोड़ दें| यही बात बताने के लिए अशोक निर्देशक हिमांशु राय के पास गए और उन्हें अपनी नौकरी के कागज़ दिखाए और कहा पिताजी भी आए हैं और उनसे बात करना चाहते हैं|

फिर अशोक कुमार के पिता ने हिमांशु राय से बात की| थोड़ी देर बाद अशोक के पिता उनके पास गए और कहा, हिमांशु कहते हैं कि यदि तुम यह काम करोगे तो बहुत नाम करोगे, मुझे लगता है कि तुम्हें यही करना चाहिए| हिमांशु राय के साथ अशोक कुमार की पहली फिल्म ‘जीवन नैया’ थी| अशोक डायरेक्टर हिमांशु राय के बॉम्बे टॉकीज में बतौर लैब असिस्टेंट काम करते थे|

दादामुनि को मिले थे ये पुरस्कार

अशोक कुमार को दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फ़िल्मफेयर अवॉर्ड ने नवाज़ा जा चुका है| पहली बार वर्ष 1962 में उन्हें फिल्म ‘राखी’ के लिए और दूसरी बार वर्ष 1968 में फिल्म ‘आशीर्वाद’ के लिए फ़िल्मफेयर दिया गया था| इसके अलावा वर्ष 1966 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘अफसाना’ के लिए उन्हें बतौर सहायक अभिनेता फ़िल्म फेयर अवॉर्ड दिया गया था| इसके अलावा उन्हें हिन्दी सिनेमा के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान के लिए उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाज़ा गया था| वहीं वर्ष 1999 में अशोक कुमार को पद्मभूषण सम्मान से नवाज़ा गया था|

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