केवल सत्कार्य करते रहो, सर्वदा पवित्र चिंतन करो

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विद्यावान, धनवान, दयालु,  प्रेमी, सेवाभावी, व्यवहार कुशल, आध्यात्मिक और संस्कारित होना प्रचुरता के साथ सफल जीवन की ओर एक बहुत बड़ा कदम बढ़ाना है| ये सभी आचरण एक प्रकार की दौलत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका अवसर हमारे जीवन में कदम-कदम पर हमारे सम्मुख आता है। साथ ही अनेकों प्रकार की असीम दौलत ईश्वर द्वारा हम में से हर एक को बिना भेदभाव के प्रदान की है, जो हमें प्रचुरता की ओर अग्रसर करती है| हमें एक ऐसी सृष्टि प्रदान की है ईश्वर ने, जहां पर्याप्त से ज्यादा पूर्ण प्रचुरता के साथ सब के लिए सब कुछ एक जैसा है| दिन-रात, धूप-छाया, पेड़-पौधे, पर्वत-झरने,  अवसर या कहे जिंदगी का सबसे महत्त्वपूर्ण चक्र ‘समय’ जो सभी के लिए निष्पक्षता के साथ उपलब्ध है।

समय सतत गतिशील है, समय की कीमत इन्तजार, देरी, सुख-दुख, हंसी-खुशी, दर्द , मान-अपमान, सफलता-असफलता, जिंदगी-मौत या यूं कहें जीवन के हर क्षण, हर पड़ाव में स्पष्ट झलकती है।

प्रत्येक बार समय का मापदंड व उसकी रफ्तार उभरती भावनाओं और मनोवैज्ञानिक दशाओं पर निर्भर करती है न कि घड़ी के तीन कांटों के आधार पर| वैसे तो जिंदगी हर घड़ी नई करवट लेती, फिर भी हम समय को भावना के आधार पर अच्छा-बुरा या मध्यम की संज्ञा दे देते हैं। समय हर क्षण किसी न किसी की कहीं न कहीं परीक्षा लेते ही रहता है| महाभारत-रामायण काल का संज्ञान भी लें तो    एकमात्र साक्ष्य अगर कोई है तो वो समय ही है, जिसने हर पल को अपने कोरे कागज पर विस्तार से वर्णित किया है,  ये न तब रुका था, न अब कभी किसी के लिए रुकेगा चरैवेति-चरैवेति का सिद्धांत इसी आधार पर कायम है और शायद इस ब्रह्मांड के अंत तक यूं ही कायम रहेगा।

हमारी परछाई के अलावा यदि अन्य कोई हमारे साथ हमेशा रहता है तो समय ही है| समय न कभी थके न रुके यही है, जिससे परिवर्तन का सफर भी जारी है| वर्तमान में   इस सत्य से परिचित होने के बावजूद हम अपना अमूल्य जीवन विपरीत दिशा में लोगों की अपेक्षाओं को पूरी करने में झोंक देते हैं, जिससे हमें लगता है कि हमारी महत्वाकांक्षा पूर्ण हो जाएगी, प्रकृति के आमंत्रण व समय के इशारे को हम समझ नहीं पाते और मुश्किलों की दीवार हम अपने आसपास खड़ी कर लेते हैं। जितना हम सोचते हैं, उतनी कोशिश नहीं कर पाते हैं, इरादा मजबूत नहीं रख पाते हैं और समय की मांग को नकार देते हैं, जो त्याग, सुदृढ़ विचारधारा की अवधारणा के प्रयास से प्रकृति की मांग पर परिवर्तन की ओर हमें अग्रसर करती है। समय की गति को भांपते हुए हमें अपने आत्मबल को विकसित कर कठिन परिस्थितियों में भी अपना विश्वास बनाए रखना होगा| मनुष्य सदैव परिस्थिति व दूसरों को बदलने का न मुमकिन प्रयास करता रहता है, पर समय यह कार्य अपनी गति व निर्धारित कर्म के परिणाम के अनुसार ही प्रतिफलित करता है और सतत होता रहेगा।

एक कहावत भी है समय- समय की बात है, समय बड़ा बलवान| इन बातों को अगर मनुष्य समझ ले तो उसके जीवन की लगभग बहुत परेशानियां खत्म हो जाएंगी।

यह समय ही है, जो किसी को लाजवाब तो किसी को बेकार नज़र आता है| परिवर्तन व समय सम या विषम दोनों स्थिति में गतिशील रहता है| यह मनुष्य के हाथ में होता है कि इसका सकारात्मक प्रयोग करें या नकारात्मकता, जिसका परिणाम कर्म व समय की स्थिति को परिभाषित करेगा इसलिए समय से कीमती कुछ नहीं है और इसका सही इस्तेमाल ही जीवन को सार्थक बनाता है।

स्वामी विवेकानंदजी ने भी एक बार कहा था – “केवल सत्कार्य करते रहो, सर्वदा पवित्र चिंतन करो; असत् संस्कार रोकने का और समय का सदुपयोग का बस यही एक उपाय है|”

– विशाल सक्सेना, इंदौर

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