हैवानियत की निगेहबान, पुलिस और मीडिया और संविधान!

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आज फिर से मेरी कलम चलाऊंगा और अपनी आवाज़ आप तक पहुंचाऊंगा। आज कोई भूमिका नहीं रखूंगा बात की शुरुआत सीधे मुद्दे से करूँगा। हाल में हुए हैदराबाद गैंगरैप और मर्डर के बाद अचानक से इतनी दुष्कर्म की घटना सामने आ रही हैं, आपको क्या लगता है? यह एक बीमारी है जो हैदराबाद की दिशा के बाद वायरस की तरह पूरे देश में फ़ैल रही है? नहीं दरअसल ये घटना रोज की है, लेकिन हम तक नहीं पहुंच पाती, और इस घटना को बढ़ावा देने की गलतियों में एक प्रमुख गलती का  कारण भारतीय कानून और हमारे चाटुकार मीडिया की है, जो अपने TRP की भूख के कारण उसी मुद्दे का चयन करती है जिससे व्यूवर्स उनकी ओर आकर्षित हो सकें। वहीं भारतीय कानून को यदि कोई उपाधि दी जाए, तो वह उपाधि कुम्भकरण की होगी|

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आज मैं डंके की चोट पर यह कह सकता हूँ कि पुलिस और मीडिया से बड़ा गुंडा कोई हो ही नहीं सकता, इसका प्रमाण देखने के लिए ज्यादा पीछे जाने की जरुरत भी नहीं है। बीते दिन हैदराबाद पुलिस ने दुष्कर्मियों को बिना किसी अवसर के और बिना किसी अधिकारी की इज़ाज़त के एनकाउंटर में मार गिराया। खैर यह एक सवाल बन सभी के मुख पर है। सभी ने सुना और देखा भी है कि सिक्के के दो पहलू होते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि सिक्के के दो नहीं बल्कि तीन पहलू होते हैं। तीसरा पहलू ऐसा है जो हर किसी के लिए  पारदर्शी हो और दिखाई दे, ये संभव नहीं है।

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हैदराबाद एनकाउंटर मामले के पहले पहलू की बात करते हैं। देश में 4 लाख से ज्यादा दुष्कर्म के मामले आज भी कोर्ट में है और किसी भी पीड़िता को इंसाफ नहीं मिला। निर्भया केस को आज 7 साल हो चुके है। सजा के बाद भी अब तक आरोपियों को फांसी पर नहीं चढ़ाया गया, अगर इस नाते देखें तो यह एनकाउंटर किसी फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट से कम नहीं माना जाएगा। फैसला ऑन द  स्पॉट ऐसा फिल्मो में ही देखा जाता रहा है। वहीं दूसरे पहलू की बात करें तो क्या एनकाउंटर ही एक रास्ता था? बिना किसी अधिकारी के इज़ाज़त के एनकाउंटर क्यों किया गया? फिर एक सवाल उठता है अगर वो आरोपी भागने के मनसूबे में कामयाब हो जाते तो क्या यह बुद्धिजीवी जनता या पोलिटिकल पार्टी जो आज एनकाउंटर पर सवाल खड़ा कर रही है, वह भारतीय कानून को भ्रष्ट या चालबाज के कटघरे में खड़ा नहीं कर देती ?

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इस केस में जो तीसरा पहलू है वो तो एक दम पारदर्शी है, कि क्या यह एनकाउंटर फेक है और मैं भी यही मानता हूं। शायद यह एनकाउंटर फेक ही है। आज पूरा देश इस एनकाउंटर से खुश है इसका कारण साफ़ ही तो है कि हम सभी अपने देश की ढीली कानून व्यवस्था से इतने परेशान हो चुके है कि, हैदराबाद पुलिस की सोची समझी साजिश के तौर पर यह एनकाउंटर भी न्याय का काम कर गया | अंत में यही कहूंगा इस घटना को रोकने के लिए मीडिया और भारतीय कानून ईमानदारी से सक्रियता दिखाए, तो जल्द ही इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है।

Rakesh Ranjan
(Cartoonist)

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