खूबसूरत काश्मीर, जहां कभी नहीं रही शांति!

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काश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग, एक ऐसा हिस्सा, जहां यदि बीमार भी पहुंच जाए तो ताज़ी हवा में स्वस्थ हो जाए| खूबसूरत वादियों से घिरा काश्मीर आज खून से लथपथ है| यह वही जगह है जहां मुग़ल बादशाह बाबर लोदी को हराकर अफगान लौटते समय विश्राम के लिए रुका था| तब उसके मुंह से एक ही शब्द निकला – स्वर्ग यदि कहीं है तो यहीं है, यहीं है, यहीं है, लेकिन आज काश्मीर अपनी सुंदरता के कारण ही रोने पर मजबूर है| कभी किसी ने तो कभी किसी ने काश्मीर की आबरू को तार-तार किया| आज आज़ाद भारत में काश्मीर की हवा में गोलियों और बमों का धुआं घुल गया है|  आइये जानते हैं कब किसने काश्मीर पर राज किया|

 3120 ईसा पूर्व से साल 3103 ईसा पूर्व तक गोनंद प्रथम का शासन

काश्मीर का लिखित इतिहास तो नहीं है,लेकिन कथाओं के अनुसार, ईसा से लगभग 3100 साल पहले हिमालय से घिरे अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर काश्मीर पर गोनंद वंश ने राज्य किया| जितनी शांति वहां थी, उतनी ही शांत वहां की प्रजा थी| कम आबादी वाला काश्मीर बेहद शांत और फलों से लैस था| हिन्दू राजा गोनंद भी काफी शांत स्वभाव के थे, उनके राज में वहां कभी खून नहीं बहा|

काश्मीर की आखिरी हिन्दू रानी  

1339 तक कोटा रानी काश्मीर की शासक थीं| कोटा रानी की हत्या कर शाह मीर इस्लामिक शासन आया| लगभग 2000 साल तक शांत रहने वाले काश्मीर में पहली बार आतंक ने दस्तक दी| हिन्दू रानी की हत्या कर दी गई| शाह मीर ने अफगानिस्तान से आकर काश्मीर पर हमला कर दिया| अफगानिस्तान से वहां पहुंचना बहुत आसान था| पर्वत श्रृंखला से रास्ता बनाकर वहां पहुंचे अफगानियों के कारण पहली बार काश्मीर पर खून के छींटे पड़े| काश्मीर का बर्फ सफ़ेद से लाल होने लगा|

सन 1555 से 1586 तक काश्मीर में चक शासन था| जब अफगानिस्तान से आए लुटेरों ने काश्मीर को लूटा, तब वे खानाबदोश की तरह काश्मीर को नोचकर चले गए| कहा जाता है कि अफगानों के राज में एक हरा पेड़ तक नहीं बचा सिर्फ सफ़ेद बर्फ और सूखे मुरझाए पेड़| फिर हिन्दू ब्राह्मण राजाओं ने काश्मीर को संभाला| चक शासन में काश्मीर को हरा-भरा किया गया| उसके बाद फिर से वहां सेब के पेड़ लहलहाए थे|

1586 से 1752 तक काश्मीर में मुगलों ने राज किया| काश्मीर का बुरा वक़्त इस काल से शुरू हुआ, मुग़लों ने काश्मीर की पाक ज़मीन को दागदार बना दिया| बाबर पानीपत की पहली लड़ाई जीतने के बाद अफगानिस्तान लौटने लगा| थका हुआ बाबर और उसकी सेना के लिए काश्मीर एक आरामगाह बना| बाबर को काश्मीर इतना अच्छा लगा कि उसने हिंदुस्तान में ही रहने का फैसला कर लिया| मुग़ल साम्राज्य की स्थापना हुई और फिर शुरू हुआ काश्मीर में खौफ और दहशत का माहौल| काश्मीर में अमन और चैन का खून होने लगा, महिलाएं बाबर की सेना के अधीन हो गयी| काश्मीर दागदार हो गया|

1752 से सन 1819 तक अफगानों का शासन चला|मुग़ल अब कमजोर हो गए, औरंगजेब के बाद मुग़ल खुद की रक्षा के लिए तरसने लगे| अफगानी लूटेरे फिर आये और काश्मीर को फिर से लूटने लगे|

सन 1819 से सन 1846 तक काश्मीर में सिख शासक

कुछ सालों तक सिखों ने भी काश्मीर में अमन-चैन लाने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे| सरहद को बचाने में नाकाम सिख काश्मीर छोड़कर चले गए फिर रजत राजाओं ने काश्मीर को अपने अधीन कर लिया|

सन 1846 से सन 1947 तक डोगरा राजपूत शासक 

यह काल काश्मीर के लिए खुशहाली भरा रहा| डोगरा शासक ने काश्मीर को  फिर से सजाया| अंग्रेजों को काश्मीर से ज्यादा मतलब नहीं था क्योंकि व्यापारिक दृष्टि से काश्मीर कमजोर था इसलिए वहां के राजा भी खुश थे|

आज़ादी के बाद काश्मीर के राजा हरिसिंह खुद हिंदुस्तान के लोकतंत्र में मिलाने को राजी हो गए|  80 के दशक तक काश्मीर सैलानियों के लिए सबसे सुन्दर जगह बना रहा, लेकिन कश्मीर 1980 के बाद राजनीति और धर्म का अखाड़ा बन गया| पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर में आतंकवाद को जन्म मिला| हिन्दुओं को भगाया गया, जो नहीं भागे, उन्हें मार डाला गया| डल झील का पानी खून से लाल होने लगा| आज तक कश्मीर सुलग रहा है, अब तो कश्मीर की जनता भी अपने उस इतिहास को भूलने लगी कि कभी इसे धरती का स्वर्ग कहा जाता था| पत्थरों और गोलियों ने कश्मीर का सीना छलनी कर दिया| अब तो वहां बिना गोली की आवाज़ सुने लोगों को नींद तक नहीं आती| पाकिस्तान किसी भी हद तक कश्मीर में शांति भंग करने की फिराक़ में रहता है| अब हिंदुस्तान को मिशन कश्मीर की पुकार है और सरकार है कि सुनती ही नहीं|

-रंजीता पठारे

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