साबरमती के संत की नगरी हुई बदनाम

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गुजरात में पिछले दो दिनों से जो हो रहा है, उस पर लिखना ज़रूरी है| गुजरात के व्यवसायियों के मुनाफ़े की मुख्य वजह कहे जाने वाले उत्तर भारतीय मजदूर या तो डर के गुजरात की सीमा से बाहर जा रहे हैं या फिर वहां बंधक बनाए जा रहे हैं| खबर बताने की प्राथमिकता पहले है क्योंकि यह ऐसा राज्य है, जो बापू यानी महात्मा गांधी की जन्मभूमि है| यह एक ऐसा राज्य है, जिसे गांधी जैसा बनाने के लिए गांधीजी की मृत्यु के बाद तमाम कोशिशें की गई| अहिंसा के लिए मन में क्रोध नहीं आए, इसके लिए पूरे राज्य को 1950 से मद्यपान रहित राज्य बनाया गया| मन राक्षसी न हो इसलिए इसे शाकाहारी राज्य बनाने के लिए बूचड़खानों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन शायद कृत्रिम उपायों से किसी भी प्रदेश का मानचित्र बदला जा सकता है, मानसिकता नहीं|

गुजरात से उत्तर भारतीयों का अचानक पलायन

एक उत्तर भारतीय ने असहिष्णुता का परिचय देते हुए 14 महीने की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया| कानून अपना काम जल्द करेगा और आरोपी को फांसी दी जाएगी| वह गिरफ्तार भी हो चुका है, लेकिन उसके उस कुकर्म की सज़ा आज पूरे उत्तर भारतीयों को भुगतनी पड़ रही है| सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि हिन्दी भाषी हर राज्य जैसे उस मासूम की दरिंदगी का गुनहगार सा बन गया है| गुजरात के धन्ना सेठों के यहां हीरे तराशने के काम से लेकर ढोकले में मिर्च मिलाने वाले 95 प्रतिशत कारीगर उत्तर भारत से संबंध रखते हैं| एक दरिंदगी जो वहां हुई, इससे हम सभी शर्मसार हैं और यकीन मानिए उत्तरभारत के हर राज्य भी उतने ही शर्मसार हैं, लेकिन जिस तरह गुजरात की जनता ने अपने ही हाथों को काट-काटकर लोगों को बेघर किया, वह निंदनीय है|

बापू के मरने के बाद हिंसात्मक बनने लगे गुजराती

उत्तर भारतीयों के पलायन के बाद गुस्से से एक हाथ में आईना पकड़कर गुजरात की असभ्य जनता को असली चेहरा दिखाना ज़रूरी हो गया है| खुद को सभ्य और गांधीवादी कहने वाले गुजराती गोधरा कांड के जनक हैं| गोधराकांड किसी से छिपा नहीं, जिसमें सैकड़ों मासूमों को ट्रेन में ज़िन्दा जला दिया गया था| इसके अलावा गुजरात का साम्प्रदायिक दंगा, जिसमें सैकड़ों लोगों का कत्ल तो किया ही साथ ही तलवार की हर चोट से गांधी को घायल भी किया| साबरमती के संत का यह राज्य शायद अहिंसा की आड़ में ऐसे हिंसात्मक प्रयोगों को अंजाम देता रहा, जिन्होंने बापू के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया|

भगवान श्रीकृष्ण भी अनजान थे इस प्रदेश से

प्राकृतिक सौन्दर्य और सामुद्रिक चंचलता को देखकर गोकुल के लाल ने भी अपनी राजधानी शांति के लिए गुजरात के द्वारका में स्थापित कर ली थी| इस विषय पर यदि गहन अध्ययन किया जाए तो इस प्रदेश के दोमुंहे चरित्र को देखकर ही भगवान श्रीकृष्ण ने भी न सिर्फ अपने अस्तित्व को बल्कि पूरे परिवार के अस्तित्व को मिटा डाला| वहीं ईश्वर का दोष साबित न हो इसलिए अपनी भूल को छिपाने के लिए पूरे द्वारका को जल में विलीन कर दिया| यानी ईश्वर के चरित्र को बदनाम करने वाला राज्य बन गया गुजरात तो फिर इंसानों का वहां क्या मूल्य!

सरस और सुलभ गुजरात का दानवीर चित्रण

जिन लोगों को अपने प्रदेश गुजरात पर नाज़ हो, उनकी गलतफहमियां दूर करने के लिए इतिहास के कुछ पन्नों को पलटना ज़रूरी है| अफगानिस्तान के गजनी शासकों द्वारा इस प्रान्त की इज्जत को कई बार रौंदा गया यानी सोमनाथ मंदिर को सबसे पहले मोहम्मद गजनी द्वारा फिर उसके कई मुस्लिम शासकों द्वारा लूटा गया और तबाह किया गया| उस समय गुजरात के लोग कहां थे, क्यों वे घरों से निकलने में कतराते थे? इतिहास का काला पन्ना यह भी बताता है कि आतंकियों द्वारा किसी मंदिर पर पहला प्रहार गुजरात में ही हुआ| वहां के अक्षरधाम मंदिर पर पहला आतंकी हमला किया गया था| उस समय सारे गुजरातियों ने क्यों दूसरे मंदिरों में जाना छोड़ दिया? इतिहास का नवीनतम सूर्य यह बताता है कि नवरात्रि के दौरान पूरे विश्व में सबसे अधिक देह व्यापार का खेल गुजरात के डांडिया पंडालों में खेला जाता है| नवरात्रि के पावन पर्व पर गुजरातियों का खून क्यों नहीं खौलता?

कुल मिलकर मेरा इरादा किसी राज्य की पोल खोलना नहीं था और न ही किसी प्रान्त की दुखती रग पर हाथ रखना| मेरा इरादा सिर्फ उन्हें आईने के पास खड़ा करना है| एक ऐसे आईने के सामने, जिसमें किसी और का भविष्य बिगाड़ने से पहले वे अपना भूतकाल देख सके|

-रंजीता पठारे

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