क्या मी टू अभियान से होगा कोई बदलाव…

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इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार आईएस के आतंक का शिकार हुई यजीदी रेप पीड़िता नादिया मुराद को मिला। यौन उत्पीड़न के खिलाफ प्रभावी मुहिम चलाने और महिला अधिकारों के लिए उत्कृष्ट कार्य के लिए नादिया को सम्मान मिला। नादिया मुराद की कहानी किसी उपन्यास या फिल्मी कथा की तरह लगती है, जिसमें आईएस के आतंकी उनके पूरे गांव को अगवा कर पुरुषों को मार देते हैं और सारी महिलाओं को बेचा जाता है या उपहार में दे दिया जाता है। इसके बाद दरिंदों ने कई बार महिलाओं के शरीर को नोचा।

नादिया ने करीब तीन सालों तक शरीर और मन पर इस अत्याचार को सहन किया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और किसी तरह वहां से भागी और दुनिया के सामने इस कड़वी सच्चाई को बताया। नादिया जैसी हिम्मत हर लड़की नहीं दिखा पाती।

यह अज़ीब है कि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यौन उत्पीड़न के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें नामचीन हस्तियों के नाम शामिल है। अमरीका के फिल्मकार ‘हार्वे वाईस्टीन’ के खिलाफ यौन शोषण के मामले के बाद ‘मी टू अभियान’ ने ज़ोर पकड़ा था. जिसमें हॉलीवुड सहित कई क्षेत्रों की महिलाओं ने अपने ऊपर हुए यौन शोषण का दर्द सोशल मीडिया पर शेयर किया। भारत में ‘हैशटैग मी टू’ और ‘हैशटैग टाइम्स अप’ के ज़रिये महिलाएं आपबीती बता रही हैं। वे अपने साथ हुए दुर्व्यवहार और प्रताड़ना को सोशल मीडिया पर शेयर कर रही हैं। फिल्म, मीडिया, व्यापार ऐसे तमाम क्षेत्रों के कई दिग्गज लोगों के नाम सामने आए हैं।

हाल ही में अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने अभिनेता नाना पाटेकर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। तनुश्री का कहना है कि 2008 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। अब इस मामले पर आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। मामला पुलिस तक जा पहुंचा है। जिस तरह कई अभिनेताओं, पत्रकारों, फिल्म निर्माताओं, नेताओं पर सोशल मीडिया में महिलाएं आरोप लगा रही है इन आरोपों को देखकर प्रश्न उठता है कि कैसे किसी संगठन या ऑफिस के अंदर ही सारी चीजें घटित हो रही हैं और किसी को कोई भनक तक नहीं लगती।

भारत में यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानून और सख्त हुए हैं, लेकिन इन सबके बावजूद यदि कार्यक्षेत्र में महिलाएं सुरक्षित नहीं है तो फिर समाज़ को अपने भीतर झांककर देखना चाहिए। भारत, अमरीका हो या ईरान जब तक महिलाओं को उपभोग की वस्तु समझा जाएगा, ऐसे अपराधों पर लगाम नहीं लगेगी।

– कुशाग्र वालुस्कर

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