मध्यप्रदेश में कांग्रेस के साथ कोई नहीं…!

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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस ने सभी तरह के गठजोड़ की तैयारी कर ली है, लेकिन उसकी किस्मत की तरह ही उसके सहयोगी भी उसका साथ नहीं दे रहे हैं। कांग्रेस को जिन-जिन सहयोगियों से उम्मीद थी, वे ही कांग्रेस के अरमानों पर पानी फेर रहे हैं। ऐसे में अब बसपा वाली बुआजी के हाथी के बाद उनके भतीजे अखिलेश यादव ने भी कांग्रेस के काफिले से अपनी साइकिल अलग कर ली है।

सपाध्यक्ष और उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मायावती से नजदीकियां किसी से छिपी नहीं हैं। उन्होंने पहले भी यह कहा था कि उत्तरप्रदेश में जीतने के लिए बुआजी के साथ जाने में उन्हें कोई हर्ज नहीं है। ऐसे में एक बार फिर मध्यप्रदेश के चुनाव में बुआ-भतीजे की सांठ-गांठ साफतौर पर नज़र आ रही है। कांग्रेस पर मायावती द्वारा आरोप लगाने के बाद मंगलवार को अखिलेश ने भी स्पष्ट कर दिया कि बसपा से बात किए बिना मध्यप्रदेश में वे कांग्रेस से गठबंधन नहीं करेंगे।

अखिलेश ने छतरपुर के खजुराहो में प्रेसवार्ता में बताया कि सपा का मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) से गठबंधन पहले ही हो गया है। वहीं उनके दल की बसपा से गठबंधन की बात चल रही है, जो जल्द ही होगा।

गठबंधन के बाद तय करेंगे सीटें

मध्यप्रदेश में अखिलेश की पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इस बारे में उन्होंने साफ किया है कि किसी भी दल से गठबंधन होने के बाद ही यह तय होगा कि सपा कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सपा ने फिलहाल 6 उम्मीदवारों की घोषणा की है। पूर्व अध्यक्ष अशोक यादव ग्वालियर ग्रामीण सीट से सपा के उम्मीदवार होंगे।

भाजपा घोलती है जहर

अखिलेश ने इस दौरान भाजपा पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा समाज में जहर घोलने का काम किया है। यदि भाजपा को हटा दिया जाए तो समाज में प्यार व मोहब्बत अपने आप पैदा हो जाएगी। भाजपा के राज में गरीब, किसान, मजदूर, व्यापारी और आम नागरिक परेशान हैं। यहां महिलाएं और बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और भाजपा कहती है कि हमने विकास किया है।

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