इंदौर में नेता की आमद, आमजन की आफत

0

चुनाव की तारीखों की घोषणा किए जाने से पहले ही हमारे इंदौर के लोगों ने परेशान होने की रिहर्सल कर ली | आज अमित शाह के इंदौर दौरे ने सारे शहर का यातायात अस्त-व्यस्त कर दिया … कहीं लोगों को अपने कार्यालय में हाफ डे लेना पड़ा तो कहीं देर से पहुंचने पर बॉस की डांट सुननी पड़ी..बीमारों के हाल भी बेहाल हैं| एक तो शहर परेशान था वायरल से….डॉक्टरों की दुकान (?) पर तो लाइन लगी है, पर जैसा कि हमेशा होता है,  एम्बुलेंस भी फंसी पड़ी थी आज के जाम में..एक पुल क्या टूटा इंदौर के ट्रैफिक जाम को एक और बहाना मिल गया ..पुलिस और अधिकारियों को कोई मतलब नहीं है आम नागरिक से या उनके दर्द से ..उनको तो बेचारों को लगे रहना पड़ता है नेताओं की चाकरी में ..पुलिस को कभी उनकी चाकरी से फुर्सत मिल भी जाए तो लग जाते हैं बेचारे राज्य की वित्त व्यवस्था में.. ऐसे में आम जनता का क्या ?

इंदौर के ट्रैफिक को बिगाड़ने की पूरी जिम्मेदारी हमारी पुलिस पर ही जाती है..वे भी क्या करें.. उनको टारगेट जो मिला हुआ होता है ..सरकार के खजाने को भरने का .. ट्रैफिक सुधारने की बजाय उनको टास्क मिलता है ..चालान बनाने का ..भरपूर चालान बनाने का ..खूब पैसा कमाने का …अब आप बताओ वे यातायात सुधार देंगे तो खजाना कैसे भरेंगे ..रोज सुबह शाम हर चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग होती है ..इधर वाहन चालक गुत्थमगुत्था हो रहे होते हैं, उधर पुलिस अपने शिकार की खोज में लगी रहती है ..पूरा रोड जाम हो रहा है, पर उनको इसकी चिंता नहीं है ..कोई एम्बुलेंस जाम में फंसी हो, उनको चिंता नहीं ..कोई शिकार बचकर न निकल जाए, इसकी चिंता होती है ..कौन मुर्गा फंसा, इसकी चिंता होती है ..फिर उनको पीटना भी तो है ..इंदौर में 2-4 जगह चालान के साथ फ्री पिटाई का तोहफा भी हमारे इंदौर की ट्रैफिक पुलिस जनता को देती रही है ..कहीं झूमा-झटकी तो कहीं लट्ठ से पिटाई का प्रसाद मिल जाता है…|

इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने कभी यह नहीं किया कि सड़क किनारे खड़े होकर किसी वाहन चालक को गलती करने पर समझाइश दी हो कि भाई स्टॉप लाइन पर रुक जाओ ..पैदल चलने वालों को बताया हो कि जब सामने रेड सिग्नल है, तब ही जेब्रा क्रॉसिंग से रोड क्रॉस करना है …कभी किसी को यह नहीं बताया जाता कि लेफ्ट टर्न को खुला रखो…यहां अपने वाहन खड़े न करें..कभी यह नहीं बताया जाता है कि जिस साइड का ट्रैफिक खुला हो, उसके बीच में किसी ओर दिशा से कोई और वाहन नहीं आना चाहिए …अब बताओ यह बताने के लिए किसके पास समय है ..हमारा सारा ध्यान तो हेलमेट और लाइसेंस चेक करने में लग जाता है …अब आप ही बताओ कि हम कमाई करें या वाहन चालकों को ज्ञान बांटें ?

अब इंदौर के ट्रैफिक को तो भगवान भरोसे ही छोड़ना होगा क्योंकि आचार संहिता भी लग गई और नेताओं का आवागमन भी शुरू हो गया ..पुलिस फिर नेताओं की सवारी को निकालने की व्यवस्था में लगेगी और अफसर बेचारे चुनाव की तैयारी में .. अब क्या करें जवाहर मार्ग के पुल को ऐसे में ही टूटना था.. यूं नहीं कि चुनाव के बाद ही टूट जाता ..? अब उस बेचारे को भी क्या पता था कि मेरे टूटने से इंदौरवालों को क्या परेशानी होगी ..उसने तो अपना कार्यकाल पूरा कर दिया …उसको क्या पता था कि चुनाव की रैलियों में इंदौर के ट्रैफिक का कैसा कचूमर निकलेगा ..किस-किस गली में से कौन-कौन और कैसे निकलेगा ..इंदौर में आए नए लोगों को भी ट्रैफिक जाम में इंदौर की छोटी-छोटी गलियों के दीदार हो जाते हैं…जिन्होंने कोई रास्ता नहीं देखा वे बेचारे फंसे रहते हैं भीड़ में …यह भी तो इंदौर दर्शन का ही एक प्रकार है …

अब तो हमारा एक ही कहना है कि यदि इंदौर की ट्रैफिक पुलिस सही में इस इंदौर का भला चाहती है और इस मामले में भी इंदौर को नंबर वन बनाना चाहती है तो बजाय शासन की झोली भरने के वे अपने लिए दुआओं की झोली भर लें और इंदौर के इस यातायात को सुव्यवस्थित कर लें|  ऐसा करने पर हम सब उनके आभारी होंगे ..

-डॉ.कमल हेतावल

Share.