बदले की आग में क्यों जला हिन्दुस्तान ?

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वर्ष 1984 में हुए सिख दंगों(1984 Anti-Sikh Riots) से सभी परिचित हैं| सिख दंगे की भयावहता का अंदाज़ा इसी बात से लगा सकते हैं कि उस समय लोगों को ज़िंदा आग के हवाले कर दिया गया था, चाकुओं से मासूमों पर वार किए गए थे, बेगुनाहों के खून की नदियां बहाई गई थी| ये दंगे भारत की एकता पर बदनुमा दाग की तरह समझे जाते हैं| 1 नवंबर 1984 का वो मंज़र, जिसने कई लोगों के हंसते-खेलते परिवारों पर ग्रहण लगा दिया, केवल एक भड़काऊ भाषण के कारण उत्पन्न हुआ, जो कई लोगों की जान लील गया| आज इसी दंगे से जुड़े एक अपराधी को 34 साल बाद सज़ा सुनाई गई, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दंगों का मूल क्या है? क्यों देश की एकता को चीरते ये दंगे हुए, जिससे इंसानों के भीतर छिपे हैवान सामने आए| वर्ष  1947 की गर्मियों में बंटवारे के समय कई लोगों का कत्लेआम किया गया था| इसके 37 साल बाद फिर दंगों के दौरान दिल्ली ऐसी ही त्रासदी की गवाह बनी थी|

कैसे फैले थे दंगे

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे फैले थे| पीएम की हत्या के रोष से भरे लोगों ने सिख समुदाय को अपना निशाना बनाया| एक नवंबर 1984 को हरदेवसिंह, कुलदीपसिंह और संगतसिंह महिपालपुर में अपनी किराने की दुकानों पर थे, उसी समय 800 से 1000 लोगों की हिंसक भीड़ उनकी दुकानों की तरफ आई, जिनके हाथों में लोहे के सरिये, लाठियां, हॉकी स्टिक, पत्‍थर और केरोसिन था| इसके बाद हैवानों की भीड़ ने हज़ारों मासूमों की जान ले ली|

कांग्रेस के कार्यकर्ता थे शामिल

जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों द्वारा मार दिया गया, तब देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे| हिंसा की इसी आग में राजधानी के पंजाबी बहुल इलाकों के साथ पूर्वी त्रिलोकपुरी इलाके में करीब 95 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग सौ घरों को जला दिया गया था| कहा जाता है कि इन दंगों को भड़काने में कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं का हाथ था| भारत सरकार की ऑफिशियल रिपोर्ट के अनुसार, दंगों में कुल 2800 लोगों  की मौत हुई थी, जिनमें से 2100 मौतें केवल दिल्ली में हुई थीं|

इस मामले के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कांग्रेस नेता सज्जन कुमार ने भीड़ को उकसाया था| सज्जन कुमार के साथ ही इस मामले पर कमलनाथ का भी नाम सामने आया, लेकिन उन्हें कोर्ट से बरी कर दिया गया| वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद सज्जन कुमार को  आज उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई|

कौन है सज्जन कुमार

राजनीति में आने से पहले सज्जन कुमार चाय बेचते थे| दिल्ली में पिछले तीन दशकों से भी ज्यादा समय से कांग्रेस के लिए झंडा बुलंद कर रहे सज्जन कुमार 70 के दशक में चाय की दुकान चलाते थे| एक बार जब उन पर संजय गांधी की नज़र पड़ी, तब उन्हें कांग्रेस में शामिल किया गया| इसके बाद उन्हें मादीपुर से निगम चुनाव लड़ने का मौका दिया गया| मादीपुर से मिली जीत के बाद ही कुमार की राजनीतिक पारी की शुरुआत हुई| सज्जन कुमार पर दंगे भड़काने के साथ ही हत्‍या, डकैती और आपराधिक साजिश का भी आरोप लगा|

नानावटी कमीशन की सिफारिश के बाद 2005 में सज्जन के खिलाफ केस दर्ज हुआ था और अब उन्हें उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई| इतने लंबे समय के बाद सज़ा देने के बाद भी न्याय व्यवस्था ने कुमार के लिए राहत की एक कड़ी छोड़ रखी है| जहां दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा यह कहा गया है कि  सज्जन कुमार को 31 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा वहीं लोगों का कहना है कि कुमार अपने बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट का कूच कर सकते हैं| आज आए इस फैसले से यह सिद्ध हुआ है कि देश में हुई हैवानियत के न्याय के लिए लोगों को दशकों तक इंतज़ार करना पड़ा| यह जांच एजेंसियों की नाकामी की ओर एक इशारा हो सकता है|

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