अन्ना हजारे हुए 80 साल के

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भारत पिछली कई शताब्दियों से कई समस्याओं से जूझता आया है और उन समस्याओं के निवारण समय-समय पर कोई महापुरुष, क्रांतिकारी या फिर किसी आंदोलन का अग्रदूत सामने आता है| उन्हीं में से एक हैं अन्ना हजारे, जिनका भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है| उनको दूसरा गांधी भी कहा गया और वे उस समय भारत के बच्चे-बच्चे के दिलो-दिमाग पर चढ़ गए थे| हिन्दुस्तान के सबसे बड़े अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व करने वाले आज कहां गायब हो गए, इसका उत्तर किसी के पास नहीं है|

अन्ना हजारे का जन्म 15 जून, 1938 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के भिनगरी क़स्बे में हुआ था| अपना बचपन गरीबी में बिताकर 1963 में वे सेना में भर्ती हो गए और  1965 के इंडो-पाक युद्ध में उन्होंने एक ड्राइवर की भूमिका निभाई| 1975 में सेना से स्वैच्छिक अवकाश लेकर वे  महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि आकर समाजसेवा में लग गए | पहली बार वे 1992 में प्रकाश में आए, जब उन्होंने वन विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा किए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई|

2013 में लोकपाल विधेयक को लेकर उनके नेतृत्व में देशव्यापी आंदोलन हुआ, जिसके बाद लोग उन्हें एक नायक की भूमिका में देखने लगे| उस 72 वर्षीय बुजुर्ग की एक आवाज पर पूरा देश दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा हो गया| इस आंदोलन के लिए कई  लोगों ने अपनी नौकरियां छोड़ दी और आजादी की दूसरी लड़ाई में कूद पड़े| अन्ना हजारे को उस समय दूसरे गांधी की उपमा भी दी गई| ऐसा समय पहली बार आया था, जब भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरा देश खड़ा हो गया, लेकिन उस समय वे मांगें पूरी नहीं हो पाई|

सरकार बदलने के बाद ऐसा क्या हुआ कि अन्ना हजारे गायब ही हो गए| अभी भी केंद्र सरकार ने उनके जनलोकपाल बिल को पूरी तरह लागू नहीं किया, लेकिन आज अन्ना हजारे न तो खबर में हैं और न ही वर्तमान सरकार ने उन्हें यथोचित सम्मान दिया है| उसी आंदोलन से उपजे कुछ लोगों ने सत्ता पर हाथ जरूर आजमाया और वे दिल्ली में वजीर हो गए| उसी आंदोलन में कविता गाकर जनता की नज़रों में आने वाला एक शख्स उसी राजनीतिक दल का बागी हो गया| इनमें से कोई भी आज शायद अन्ना हजारे को स्मरण तक नहीं करता|

इतने बड़े आंदोलन के अग्रदूत और समाज और देश के लिए उम्र के इस पड़ाव पर भी इतने चिंतित रहने वाले इंसान को इस तरह उपेक्षित कर देना कितना उचित है|  आज उन पर सिर्फ जुमलेबाजी करके क्या सिद्ध करना चाहते हैं| ह्रदय में एक ही प्रश्न बारम्बार आता है कि आखिर क्यों अन्ना हजारे भुला दिए गए हैं|

आज उनके जन्मदिन पर उन्हें शत-शत नमन|

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