श्रीकृष्ण से जुड़े 10 रहस्य को जानकर रह जाएंगे हैरान!

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यशोदा के लाल और भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाने वाले श्रीकृष्ण का आज जन्मदिन है। हर वर्ष की तरह इस बार भी पूरा देश श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को बड़े धूमधाम से मना रहा है। इस बार जन्माष्टमी को दो दिनों तक मनाया जा रहा है। कुछ जगह रविवार को मनाया गया, कुछ लोग सोमवार को इसका जश्न मना रहे हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। उनके जन्मदिन को ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। आज हम आपको भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े 10 रहस्य से अवगत कराएंगे, जो आपने न कभी पढ़े और न सुने होंगे, जिन्हें पढ़कर आप हैरान रह जाएंगे।

भगवान श्रीकृष्ण का रंग

श्रीकृष्ण का रंग काला और ज्यादातर लोग श्याम रंग मानते हैं। श्याम रंग अर्थात कुछ काला और कुछ नीला। मतलब काले जैसा नीला। जैसा सूर्यास्त के बाद दिन अस्त होने वाला रहता है तो आसमान का रंग काले जैसा नीला हो जाता है, लेकिन विद्वानों का कहना है कि उनका रंग न काला और न नीला था। श्रीकृष्ण का रंग मेघ श्यामल था अर्थात काला, नीला और सफेद मिश्रित रंग।

श्रीकृष्ण की गंध

कहा जाता है कि श्रीकृष्ण के शरीर से मादक गंध निकलती रहती थी। इस गंध का इस्तेमाल वे अपने गुप्त अभियानों को छिपाने में करते थे। माना जाता है कि श्रीकृष्ण के शरीर से निकलने वाली गंध गोपिकाचंदन और कुछ रातरानी की सुगंध से मिलती-जुलती थी।

शरीर के गुण

कहा जाता है कि श्रीकृष्ण का शरीर लड़कियों के समान कोमल था, लेकिन युद्ध के समय उनका शरीर विस्तृत और कठोर हो जाता था। जानकारों के अनुसार, ऐसा इसलिए हो जाता था क्योंकि वे योग और कलारिपयट्टू में पांरगत थे। इसका मतलब यह है कि श्रीकृष्ण अपने शरीर को किसी भी प्रकार का बना लेते थे।

द्वारका    

कृष्ण ने गुजरात के समुद्री तट पर अपने पूर्वजों की भूमि पर एक भव्य नगर का निर्माण करवाया था। कुछ जानकारों का कहना है कि उन्होंने पहले से उजाड़ पड़ी कुशस्थली को दोबारा निर्मित करवाया था। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण अंतिम वर्षों को छोड़कर कभी द्वारका में छह महीने से ज्यादा नहीं रहे। द्वारिका को विश्वकर्मा और मयदानव ने मिलकर बनाया था।

ईसा मसीह और श्रीकृष्ण

अब तक जितने विद्वानों ने शोध किया, उनका कहना है कि ईसा मसीह ने भारत का भ्रमण किया था और वे कश्मीर से लेकर जगन्नाथ मंदिर तक गए थे। शोधकर्ता मानते हैं कि श्रीकृष्ण का ईसा मसीह के जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ा था। उनके जन्म की कथा भी श्रीकृष्ण के जन्म की कथा से कुछ मिलती-जुलती है।

मार्शल आर्ट के जन्मदाता

कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने ही मार्शल आर्ट का अविष्कार किया था। पहले इसे कलारिपयट्टू कहा जाता था। इस विद्या के माध्यम से उन्होंने चाणूर और मुष्टिक जैसे पहलवानों का वध किया था। तब उनकी आयु 16 वर्ष की थी। जानकारों के अनुसार, श्रीकृष्ण ने मार्शल आर्ट का विकास ब्रज क्षेत्र के वनों में किया था। डांडिया रास उसी का एक नृत्य रूप है। कलारिपयट्टू विद्या के प्रथम जन्मदाता भगवान श्रीकृष्ण को माना जाता है। हालांकि बाद में इसे अगस्त्य मुनि ने प्रचारित किया था।

परशुरामजी ने दिया सुदर्शन चक्र

भगवान श्रीकृष्ण के पास कई प्रकार के अस्त्र-शस्त्र थे, लेकिन श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र परशुराम ने दिया था। वहीं श्रीकृष्ण पाशुपतास्त्र चलाना भी जानते थे। पाशुपतास्त्र शिव के बाद श्रीकृष्ण और अर्जुन के पास ही था। इसके अलावा उनके पास प्रस्वपास्त्र भी था, जो सिर्फ भोलेनाथ, वसुगण और भीष्म के पास था।

प्रेमिका और पत्नियां

कृष्ण के बारे में कहा जाता है कि उनकी 16 हजार पटरानियां थीं, लेकिन यह गलत है। उनकी 8 पत्नियां थीं। कृष्ण की जिन 16 हजार पटरानियों के बारे में कहा जाता है कि दरअसल, उन सभी को दानव नरकासुर ने बंधक बनाया था, जिन्हें श्रीकृष्ण ने मुक्त कराया था। ये महिलाएं किसी की मां, बहन और पत्नियां थीं, जिनका नरकासुर ने अपहरण कर लिया था।

श्रीकृष्ण का दिल

कहा जाता है कि जगन्नाथ मंदिर के मूर्ति के भीतर भगवान कृष्ण का दिल का एक पिंड रखा हुआ है, जिसमें ब्रह्मा विराजमान हैं। कहा जाता है कि जब श्रीकृष्ण की मृत्यु के बाद पांडवों ने उनके शरीर का दाह-संस्कार किया, तब उनका दिल जलता ही रहा। ईश्वर के आदेश अनुसार पांडवों ने पिंड को जल में प्रवाहित कर दिया। उस पिंड ने लट्टे का रूप ले लिया। लट्टा राजा इन्द्रद्युम्न को मिला| उन्होंने इसे जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर स्थापित कर दिया। उस दिन से लेकर अब तक लट्टा भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर है।

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