हुआ ‘दूध का दूध-पानी का पानी’

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मध्यप्रदेश में 1 से 10 जून तक आयोजित दस दिवसीय किसान आंदोलन शांतिपूर्ण माहौल में पूर्ण हो गया| इस दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, किसान क्रांति सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक पटेल, बीजेपी सांसद यशवंत सिन्हा, बीजेपी नेता शत्रुघ्न सिन्हा और शिवनारायण शर्मा ‘कक्काजी’ सहित अन्य नेता मंदसौर पहुंचे और किसानों के हित में अपनी बात  कहकर लौट गए|

इन सभी नेताओं ने किसानों के हित में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, उत्पादन का उचित दाम दिए जाने, मंदसौर गोलीकांड के दोषियों को सजा दिए जाने, 7000 किसानों पर लदे मुकदमे वापस लिए जाने के साथ ही किसानों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दे को उठाया और केंद्र और राज्य सरकार पर प्रहार किए|

मुद्दों को दी हवा

इस आंदोलन के दौरान जहां विपक्षी दलों ने किसानों के पक्ष में आवाज़ बुलंद की और किसान हितैषी मुद्दों को हवा दी वहीं केंद्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों के हित में चलाई जा रही किसान कल्याणकारी योजनाओं की जानकारियों का भी प्रचार-प्रसार किया गया, जिसका असर यह हुआ कि आंदोलन की पहले दिन ही कमर टूटती दिखाई दी | किसान आंदोलन के दौरान न तो सड़क पर किसान दिखाई दिए न ही प्रदेशभर में अप्रिय स्थिति  निर्मित हुई और दूध का दूध- पानी का पानी हो गया |

किसान आंदोलन के दौरान 6 जून को मंदसौर गोलीकांड की बरसी पर हुई कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा को छोड़ दिया जाए तो किसान इस आंदोलन के दौरान कड़ा विरोध नहीं दर्ज करवा पाए|  आंदोलन की शुरुआत के साथ एक दिन सब्जी के दाम बढ़े, लेकिन 10 दिनों तक दूध के दाम पर किसी प्रकार का असर नहीं रहा|

किसानों ने निकाली समर्थन रैली

इंदौर में निकाली गई किसान समर्थन रैली ने किसान आंदोलन पर पूरी तरह पानी फेर दिया| ट्रैक्टर रैली के रूप में निकले किसानों ने इस रैली के माध्यम से  केंद्र की मोदी और प्रदेश की शिवराज सरकार का आभार माना और उनकी किसान हितैषी नीतियों का समर्थन कर दिया| इस बीच किसानों का आक्रोश इसलिए भी आंदोलन के दौरान ऊपर नहीं आ सका क्योंकि प्रशासनिक अमला 10 दिनों तक हर स्तर पर अलर्ट रहा|

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