जलसंकट से उबरने के पांच आसान तरीके

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आज पर्यावरण दिवस देश में बड़े उल्लास से मनाया जा रहा है| हर जगह पर्यावरण को बचाने के लिए विभिन्न उपक्रम बड़ी आस्था और श्रद्धा के साथ किए जा रहे हैं| लगातार कई वर्षों से यह सब करने के बावजूद आज स्थिति जस की तस है| बात यदि जल की करें तो पृथ्वी पर 71 फीसदी जल होने के बावजूद  इंसान पेयजल के लिए तरस रहा है|

गर्मी के दिनों में देश के कई हिस्सों में जलसंकट हमेशा छाया रहता है| तमाम कोशिशों के बाद भी कभी हम इस संकट से उबर नहीं पाए और प्रकृति को कोसते रहे | विचारणीय बात यह है कि क्या प्रकृति को कोस देनेभर से हमारे कर्तव्य की इतिश्री हो जाएगी ? आज आवश्यकता है जल संरक्षण के उन तरीकों को खोज निकालने की, जिनसे दैनिक जीवन की गतिविधियों में जल का संरक्षण किया जा सके| यदि अपने-अपने स्तर पर सब थोड़ा-थोड़ा भी योगदान देंगे तो बड़े स्तर पर जल बचाया जा सकेगा |

तो आइए, जानते हैं जल संरक्षण के पांच आसान तरीके

सोखता गड्ढा

जल संरक्षण का बेहद आसान, सस्ता और पारम्परिक तरीका है सोखता गड्ढा|

आज गलियों  में लाखों लीटर पानी सड़कों और नालियों में व्यर्थ बह जाता है , जिससे गलियों में कीचड़ भी हो जाता है| यदि घर से निकलने वाले जल का निस्तारण घर के बाहर ही कर दिया जाए तो व्यर्थ कीचड़ भी नहीं होगा और पृथ्वी का जलस्तर भी बढ़ेगा| सोखता गड्ढा एक बार बना देने पर यह कई वर्षों तक जल सोखता है|

तालाब बनाकर

यदि हम भारत के जल स्तर का व्यापक रूप से विश्लेषण करें तो वहां का जल स्तर सदैव अधिक मिलेगा, जहां ताल-तलैया अधिक होते हैं परंतु आज हमारे देश में तालाबों की संख्या कम होती जा रही है| आज हमें पुनः ताल क्रान्ति लाने की आवश्यकता है और सरकार को चाहिए कि वे बलराम ताल जैसी योजनाओं को पुनः प्रोत्साहित करें क्योंकि तालाब और तलाई से वर्षा जल बड़े स्तर पर बचाया जा सकता है|

कड़े नियम बनाकर

घरों, मोहल्लों और सार्वजनिक पार्कों, स्कूलों, अस्पतालों, दुकानों, मन्दिरों आदि में लगी नल की टोटियां खुली या टूटी रहती हैं तो अनजाने ही प्रतिदिन हजारों लीटर जल बेकार हो जाता है। इस बरबादी को रोकने के लिए नगरपालिका एक्ट में टोटियों की चोरी को दंडात्मक अपराध बनाकर जागरूकता भी बढ़ानी होगी।

छत पर जल संग्रहण

सालभर में लगभग चार माह बारिश का मौसम रहता है परंतु उस मौसम में भी हम जल नलकूप आदि से ही भरते हैं| वर्षा जल को हम अपनी छतों पर विभिन्न त्रिकोण से टंकियों में इकठ्ठा कर लें और फिर उसका उपयोग करें| प्यूरिफायर से शुद्ध करके पेयजल के रूप में भी इसका उपयोग किया जा सकता है| इससे लाभ यह होगा कि धरती का पानी वर्षा के बाद के मौसम के लिए संरक्षित हो जाएगा तथा बाद में जलसंकट नहीं आएगा|

जनजागरूकता द्वारा

सबको जागरूक नागरिक की तरह जल संरक्षण का अभियान चलाते हुए बच्चों और महिलाओं में जागृति लानी होगी। स्नान करते समय बाल्टी में जल लेकर शावर या टब  में स्नान की तुलना में बहुत जल बचाया जा सकता है। पुरुष वर्ग दाढ़ी बनाते समय यदि टोटी बंद रखे तो बहुत जल बच सकता है। रसोई में जल की बाल्टी या टब में बर्तन साफ करें तो जल की बहुत बड़ी हानि रोकी जा सकती है।

–  बलराम यादव ‘बल्लू’

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