3 इंजीनियर, जिन्होंने दिखाया अध्यात्म का मार्ग

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बचपन से लेकर आज तक जब भी किसी बच्चे से पूछा जाता है कि बेटा बड़े होकर क्या बनोगे ? जवाब में डॉक्टर, इंजीनियर, मैनेजर या कोई दूसरा जवाब होता है। कभी भी कोई भी बच्चा यह नहीं कहता कि मैं बड़ा होकर साधु बनूंगा। आज विश्व इंजीनियर दिवस पर हम बात करेंगे उन 3 शख्सियतों की, जो पहले इंजीनियर तो बने, लेकिन बाद में उन्होंने अध्यात्म का मार्ग चुना।

गौर गोपाल दास प्रभु

प्रभु गौर गोपाल दास का जन्म 24 दिसंबर 1973 को हुआ था। उन्होंने सन् 1992-1995 में पुणे के इंजीनियरिंग कॉलेज से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग इन इलेक्ट्रॉनिक्स की डिग्री हासिल की। उसके बाद उन्होंने सन् 1996 में अध्यात्म की ओर कदम बढ़ाए और इस्कॉन से जुड़ गए।  इसके बाद प्रभु गौर गोपाल दास ने करीब दो दशक तक कई स्कूलों, कॉलेजों, कंपनियों तथा धर्म सभाओं में प्रेरक उद्बोधन दिए। इसके अलावा वे गूगल मुख्यालय और ब्रिटिश सांसद भवन में भी उद्बोधन दे चुके हैं। संत गौर गोपाल दास सोशल मीडिया पर भी काफी प्रचलित हैं।  आज उनके 43,600 से ज्यादा फॉलोअर इंस्टाग्राम पर और 6,56,635 से ज्यादा सब्सक्राइबर यूट्यूब पर हैं।

राधेश्याम दास

प्रभु राधेश्याम दास का जन्म सन् 1968 में एक दक्षिण भारतीय परिवार में हुआ। इन्होंने भी आईआईटी मुंबई से मास्टर ऑफ़ इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। सन् 1993 में इन्होंने स्वामी राधानाथ महाराज की प्रेरणा से संन्यास ग्रहण किया और सन् 1973 में पुणे इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष बने। राधेश्याम प्रभु भी युवाओं के लिए कई उद्बोधन दे चुके हैं। मुख्य रूप से ‘तनाव प्रबंधन’ विषय पर इन्होंने कई पुस्तकें  और उद्बोधन दिए हैं। इसके अलावा इनकी पुस्तक ‘मॉर्डन युवाओं के लिए अध्यात्म’ भी युवाओं में बहुत प्रचलित है। राधेश्याम प्रभु को 2004 में ‘ग्लोबल एक्सीलेंसी अवॉर्ड’ भी मिल चुका है।

ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी

ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी का जन्म सन् 1972 में पुणे में हुआ। शिवानी दीदी ने सन् 1994 में पुणे यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनिरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद वे 2 साल तक भारती विद्यापीठ इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर के पद पर रहीं। वे सन् 1995 में आध्यात्मिक संस्था प्रजापति ब्रह्माकुमारी से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने ब्रह्मकुमारी विश्वविद्यालय में लैक्चरर का पद संभाला। सन् ब्रह्माकुमारी से उनका टीवी शो ‘अवैकिंग विद ब्रह्माकुमारी’ शुरू हुआ, जो आज भी प्रतिदिन आस्था टीवी पर  प्रसारित  किया जाता है। इनके प्रवचनों को टीवी के माध्यम से लोगों ने बहुत पसंद किया। आज वे देश ही नहीं विदेश में भी अपने प्रवचन के लिए प्रचलित हैं।

गौर गोपाल दास, शिवानी दीदी और राधेश्याम प्रभु तीनों ने ही अपने जीवन की शुरुआत इंजीनियरिंग से की और बाद में लोगों को अध्यात्म का मार्ग दिखाया। दुनिया को धार्मिक मार्ग से परिचित कराने के लिए तीनों ने ही अलग-अलग मार्ग चुना। जहां गौर गोपाल दास ने सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम को चुना। वहीं शिवानी दीदी ने टीवी को और राधेश्याम प्रभु ने पुस्तक के माध्यम को अपनाया।

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