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बाबरी मस्ज़िद विध्वंस ये थे सूत्रधार

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छह दिसंबर, 1992 की तारीख़ को इतिहास में कभी भी नहीं भुलाया जा सकता है| इस दिन ऐसी घटना घटी, जिसके दूसरे दिन पूरे देश में लंबा सन्नाटा छा गया था| दो धर्मों के बीच चल रही लड़ाई के कारण एक भव्य धार्मिक स्थल पल भर में ध्वस्त कर दिया गया| अयोध्या में आसमान चीरते नारों और मस्जिद पर चोट करतीं कुदालों ने मुस्लिम समुदाय के मन पर गहरा घाव कर दिया था| एक ऐसा घाव जिसके कारण आज भी देश दो गुटों में बंट जाता है| आज भी यह मुद्दा गर्माया हुआ है| तब से लेकर आज तक इसका समाधान नहीं हो पाया है| बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए पांच लोगों को मुख्यतः सूत्रधार माना जाता है|

बाबरी मस्ज़िद विध्वंस को आज लगभग 26 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी इस मुद्दे की गूंज भारत की राजनीति में सुनाई देती है| उस दिन हजारों की संख्‍या में बजरंग दल के कार्यकर्ता अयोध्‍या पहुंचे| उन्होंने  महज 17 से  18 मिनट के अंदर ही बाबरी मस्ज़िद को ढहा दिया| क्यों जरुरी था यह? क्या इसके बिना कोई और हल नहीं निकाला जा सकता था| क्या हिन्दू और मुस्लिम के बीच यह दीवार खड़ी करनी जरुरी थी| ऐसे कई सवाल जो आज भी कई हिन्दू और मुस्लिमों के मन में ताजे हैं|

ऐसा कहा जाता है कि 30 नवंबर 1992 को लालकृष्ण आडवाणी ने मुरली मनोहर जोशी के साथ मिलकर अयोध्या जाने का फैसला किया था, तब उन्होंने ऐलान किया था कि मस्ज़िद के जगह मंदिर बनवायेंगे| इसकी जानकारी केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकार को भी थी, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया और 6 नवंबर को हजारों लोगों ने मस्ज़िद को धराशायी कर दिया| इस दिन को मुसलमान काले दिवस के रूप में मनाने को मजबूर हो गए|

भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी को इस कार्य का मुखिया माना जाता है| ऐसा कहा जाता है कि यह विवाद अक्टूबर 1990 में शुरू हुआ था| मंदिर–मस्ज़िद का विवाद काफी पुराना था| हिन्दुओं का मानना था कि अयोध्या में विवादित स्थल राम जन्म भूमि है, जहां मीर बाकी ने मस्ज़िद का निर्माण कराया था| विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या, काशी और मथुरा के मंदिरों को मुक्त करने का अभियान चलाया और इसके अंतर्गत लाल कृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा की| उनके साथ कल्याण सिंह, विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल, विश्व हिंदू परिषद के सहयोगी संगठन बजरंग दल के नेता विनय कटियार और  भारतीय जनता पार्टी के नेता मुरली मनोहर जोशी को भी बाबरी मस्ज़िद विध्वंस के लिए जिम्मेदार माना जाता है| इन सभी पर आरोप लगाया गया कि इन्होंने पूरे प्रदेश में सांप्रदायिकता से ओतप्रोत भाषण दिए, जिससे हिन्दू-मुस्लिम के विवाद को बल मिला|

विवाद के बीच भी दोनों कौमों के लोगों ने हिफाजत

बाबरी मस्ज़िद विध्वंस हो जाने के बाद पूरे देश में तेज़ी से नफरत की आग फ़ैल गई थी, लेकिन उस माहौल में भी कई ऐसे लोग थे, जिनमें इंसानियत का भाव था| कई लोगों ने धर्म की परवाह किए बिना एक-दूसरे की सहायता की| दंगों के बीच धार्मिक भिन्नता को भुलाकर कई हिन्दू मुस्लिमों ने पीड़ित लोगों के लिए भोजन-पानी के साथ रहने की भी व्यवस्था की थी| आज भी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है| राजनीतिक लाभ के लिए कई लोग इस मामले को शांत नहीं होने देते हैं|

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद : कोर्ट ने सुनाया अपना फैसला

मंदिर तोड़कर बनी थी अयोध्या में बाबरी मस्जिद

मंदिर तोड़कर बनी थी बाबरी मस्जिद- शिया वक़्फ़ बोर्ड

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