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प्रेम धवन की 95वीं जयंती आज

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शब्द की साधना जब सलीके से जाती है तो उन शब्दों की माला काव्य रूप में परिणीत हो जाती है और उस काव्य का अमर हो जाना भी स्वाभाविक सी बात है, लेकिन शब्दों का वह विन्यास जब आम जनमानस के ह्रदय में चिरस्थायी होकर सदियों तक उसे प्रेरित करता रहे तो उस काव्य की महत्ता कई गुना बढ़ जाती है| ऐसा काव्य कुछ बिरले साहित्यकारों द्वारा ही रचा जाता है| उनमें से एक हैं प्रेम धवन, जिनकी आज 95वीं जयंती है|

प्रेम धवन का जन्म 13 मई 1923 को अम्बाला में हुआ था| उन्होंने अपनी शिक्षा लाहौर में पूरी की| इसके बाद वे साहित्य, फिल्म और संगीत की दुनिया में उतर गए| वहां उन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया| उनके लिखे गीत आज भी बच्चे-बच्चे की जुबान पर चढ़े हुए हैं| उन्होंने चंदा रे जा रे जा रे, ए वतन -ए वतन हमको तेरी कसम, सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है, जोगी तेरे प्यार में तथा मेरा रंग दे बसंती चोला जैसे अमर गीतों की रचना की| उनके प्रेम गीत हृदय में एक अनूठी तरंग उत्पन्न करते हैं तो देशभक्ति के गीत मन में ऐसा ज्वार लाते हैं, जिसकी लहर में हर कोई भारत मां के लिए कुछ भी कर गुजरने का प्रण कर लेता है|

साथ ही उन्होंने संगीत, नृत्य तथा अभिनय के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया|  भारत सरकार ने प्रेम धवन को 1970 में पद्‍मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया।

प्रेम धवन का  देहांत 7 मई 2001 को मुंबई में हुआ, परंतु उनके गीतों के माध्यम से वे आज भी हिन्दुस्तानी मिट्टी के कण-कण में रमे हुए हैं| सदी के महान गीतकार को पूरी आस्था और श्रद्धा से नमन|

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